सहकार नेता की कोऑपरेटिव सोसाइटी में 50 लाख रुपये की गड़बड़ी की पुष्टि, सहकारी विभाग ने केस दर्ज किया
उत्तरदायित्व निर्धारण एवं राशि की वसूली की कार्यवाही प्रारंभ
श्रीगंगानगर, 11 जून (मुखपत्र)। श्रीगंगानगर जिले के सर्वाधिक सक्रिय और सबसे अधिक सहकारी समितियों में संचालक मंडल में सम्मिलित, लखविंद्रसिंह बराड़ (लखियां) के नेतृत्व वाली 4ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति में 50 लाख रुपये के अधिक के गबन/वित्तीय अनियमितता के मामले में सहकारिता विभाग ने उत्तरादायित्व निर्धारण एवं राशि की वसूली की कार्यवाही आरंभ कर दी है। । रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां के निर्देश पर, राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2001 की धारा 55 में इुई जांच में 50 लाख 11 हजार 482 रुपये की गड़बड़ी पकड़ में आयी थी। धारा 55(5) एवं (6) के अंतर्गत जारी जांच परिणाम के आधार पर, उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, श्रीगंगानगर द्वारा धारा 57(1) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। इसमें समिति के वर्तमान व्यवस्थापक रामपाल मान और एक पूर्व व्यवस्थापक को आरोपी मानते हुए, इनसे राशि की वसूली की जानी है। मामले की जांच सहकारी निरीक्षक (कार्यकारी) मुकेश मीणा को सौंपी गयी है।
ये है प्रकरण
बीकानेर निवासी विजयकुमार की शिकायत के आधार पर रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, जयपुर द्वारा, जोनल एडिशनल रजिस्ट्रार, बीकानेर को प्रकरण प्रेषित कर, मामले की जांच के लिये निर्देशित किया गया था। खंडीय अतिरिक्त रजिस्ट्रार, बीकानेर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए, राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम 2001 की धारा 55 के अंतर्गत जांच करवाने के लिए उप रजिस्ट्रार, श्रीगंगानगर को निर्देशित किया, जिस पर उप रजिस्ट्रार दीपक कुक्कड़ द्वारा 23 सितम्बर 2025 को मामले की जांच, सहकारी निरीक्षक (ऑडिट) चंद्रशेखर मुडासिया को सौंपी गयी।
चंद्रशेखर ने तीन माह पश्चात, 22 दिसम्बर 2025 को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कमियां पाये जाने पर पहली बार 12 जनवरी 2026 एवं द्वितीय बार 5 मार्च 2026 को, एवं अतिरिक्त सूचनाएं 17 मार्च 2026 को उप रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत की। जांच रिपोर्ट के आधार पर उप रजिस्ट्रार द्वारा 13 अप्रेल 2026 को जांच परिणाम जारी किये गये, जिसमें जांच अधिकारी ने वैधानिक लेखा परीक्षा को दरकिनार करने के साथ-साथ, अपना एक अगल ही गणित विकसित करते हुए, सोसाइटी में 92 लाख रुपये से अधिक राशि के ऋण असंतुलन के आरोप को सही नहीं पाया गया, लेकिन इस रिपोर्ट में सोसाइटी द्वारा लगातार 7 साल तक वार्षिक निरीक्षण नहीं करवाये जाने का उल्लेख करने के बावजूद, संचालक मंडल याअध्यक्ष की कर्तव्यहीनता पर टिप्पणी नहीं की गयी।
जांच परिणाम में निरीक्षक नहीं कराने का उल्लेख होने के बावजूद वित्तदाता बैंक (गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक लि.) भी, लखियां के जलवे के सामने नतमस्तक है और आज तक 4-ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति में वार्षिक निरीक्षण करवाने का हौसला नहीं जुटा पाया है।
चंद्रशेखर की जांच रिपोर्ट और उप रजिस्ट्रार दीपक कुक्कड़ द्वारा जारी जांच परिणाम में सोसाइटी को 13 लाख 57 हजार 886 रुपये की ब्याज राशि की हानि का आंकलन करते हुए वर्तमान व्यवस्थापक रामपाल मान से 97 हजार 881 रुपये और पूर्व व्यवस्थापक अशोक चंदवानी से 12 लाख 60 हजार रुपये की राशि वसूल योग्य पायी गयी। इसी प्रकार, दो अन्य मदों में क्रमश: 34 लाख 64 हजार 884 रुपये और 1 लाख 88 हजार 732 रुपये की गड़बड़ी पायी, जिसे भी पूर्व व्यवस्थापक से वसूली योग्य माना गया है।
उपनियमों के उल्लंघन के बावजूद अध्यक्ष और संचालक मंडल को क्लीन चिट
धारा 55 की जांच करने वाले जांच अधिकारी चंद्रशेखर द्वारा 4ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष लखविंद्रसिंह लखियां को इस मामले में क्लीन चिट दी जा चुकी है, जबकि ग्राम सेवा सहकारी समिति के आदर्श उप नियम के खंड ‘संचालक मंडल के कर्तव्य’ के अंतर्गत बिन्दू संख्या 1(ञ) में स्पष्ट वर्णित है कि संस्था के अंकेक्षण एवं निरीक्षण प्रतिवेदनों पर विचार करना, पूर्ति रिपोर्ट तैयार करना एवं आमसभा के समक्ष अनुमोदन एवं स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करना, इत्यादि संचालक मंडल का कर्तव्य है। वर्ष 2018 के बाद से साल 2024 तक सोसाइटी का बैंक स्तर से एक बार भी निरीक्षण नहीं हुआ।
संचालक मंडल ने अपने कर्तव्य के पालन नहीं करते हुए 7 वर्ष निरीक्षण नहीं करवाया। लगातार 7 वर्ष तक निरीक्षण प्रतिवेदन पर विचार, पूर्ति रिपोर्ट, आमसभा के समक्ष अनुमोदन एवं स्वीकृति में विफल रहने के बावजूद, इस अत्यंत गंभीर मुद्दे पर जांच अधिकारी ने आंखें मूंद ली। संचालक मंडल, गलत ऑडिट रिपोर्ट को आमसभा में अनुमोदन के प्रस्तुत करने और स्वीकृत कराने का भी दोषी है क्योंकि सी.ए. द्वारा अपनी ऑडिट रिपोर्ट में दो साल तक लाभ के गलत आंकड़े पेश किये जाते रहे, इसके बावजूद जांच रिपोर्ट और जांच परिणाम में संचालक मंडल और चार्टर्ड एकाउंटेंट का उत्तरदायित्व निर्धारित नहीं किया गया।
बैंक की मेहरबानी बरकरार
यह भी कम हैरानी नहीं कि एक ओर तो जर्जर गोदाम वाली अनेक ग्राम सेवा सहकारी समितियां एक सौ मीट्रिक टन के एक-एक गोदाम के लिए वर्षों से तरस रही हैं, वहीं दूसरी ओर लगातार 7 वर्ष तक वार्षिक निरीक्षण नहीं करवाने वाली 4 ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति पर वित्त दाता बैंक (दि गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड) और सहकारिता विभाग पूरी तरह मेहरबान रहा। इस अवधि में, बैंक की अनुशंसा पर सहकारिता विभाग द्वारा 4-ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति को 500 एमटी, 250 एमटी, 100 एमटी के गोदाम और कस्टमर हायरिंग सेंटर की सौगात दी गयी।
कौन है लखविंद्र सिंह
लखविंद्रसिंह 4 ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति के लगातार चार/पांच बार से संचालक मंडल के अध्यक्ष हैं। वे करीब दो दशक से श्रीकरणपुर क्रय विक्रय सहकारी समिति के भी अध्यक्ष हैं। करणपुर केवीएसएस के पास भी जिले में सबसे अधिक गोदाम भंडारण क्षमता है, लेकिन इन गोदामों से होने वाली आय ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। वे जिला सहकार संघ के अध्यक्ष और गंगमूल डेयरी के दो बार डायरेक्टर रह चुके हैं। लखविंद्रसिंह स्वयं भाजपाई हैं, लेकिन हनुमानगढ़ स्थित गंगमूल डेयरी का पिछला चुनाव वे कांग्रेेस के साथ मिलकर लड़ चुके हैं, हालांकि इनका पूरा ग्रुप हार गया था।
वे ब्लॉक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष शिवदयाल गुप्ता के नेतृत्व वाले श्रीगंगानगर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार के संचालक मंडल सदस्य हैं। कुछ सप्ताह पूर्व सम्पन्न हुए, मात्र 20 सदस्यों वाले जिला सहकार संघ, श्रीगंगानगर के चुनाव में भी वे निर्विरोध संचालक मंडल निर्वाचित हुए हैं। सहकार संघ के अध्यक्ष, भाजपा नेता शिव स्वामी और उपाध्यक्ष मोहित टांटिया हैं। शेष 10 में से 9 डायरेक्टर कांग्रेसी हैं। सहकार संघ के मुख्य कार्यकारी भी चंद्रशेखर मुडासिया, सहकारी निरीक्षक हैं, जिनके द्वारा 4-ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति की जांच सम्पन्न की गयी, जिसमें लखविंद्रसिंह को क्लीन चिट दी गयी।
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