राज्यसहकारिता

एक और क्रय-विक्रय सहकारी समिति में लाखों रुपये का घोटाला, सहकारी निरीक्षक पर मुकदमा दर्ज

आरोप, मुख्य व्यवस्थापक ने अध्यक्ष के फर्जी साइन कर 48 लाख रुपये का भुगतान कर दिया

जयपुर, 1 जून (मुखपत्र)। प्रदेश के सहकारी क्षेत्र में फैले भ्रष्टाचार का एक और संगीन मामला सामने आया है। डीडवाना-कुचामन जिले के डीडवाना में दलहन-तिलहन परिवहन टेंडर प्रक्रिया में हुई गंभीर धांधलियों की जांच के बीच अब कृषक लाडनूं क्रय-विक्रय सहकारी समिति लिमिटेड में लगभग 48 लाख रुपये के गबन का खुलासा हुआ है। इस संबंध में समिति के अध्यक्ष जगनाथ बुरडक़ की लिखित शिकायत पर लाडनूं पुलिसथाना में मुख्य व्यवस्थापक देवेंद्रसिंह, सहकारी निरीक्षक के खिलाफ फर्जी हस्ताक्षर करने, धोखाधड़ी और राजकोषीय राशि के दुरुपयोग करने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(5), 336(2), 336(3) एवं 338 में आपराधिक मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी है।

दर्ज एफआईआर के अनुसार, आरोपी देवेंद्र सिंह, सहकारी निरीक्षक ने समिति की चेकबुक, अवैध रूप से पिछले तीन महीने से अपने कब्जे में रखी हुई थी। उसने अध्यक्ष के हू-ब-हू जाली हस्ताक्षर बनाकर बैंक खातों से धड़ाधड़ भुगतान करवा दिए। अध्यक्ष जगनाथ बुरडक़ ने पुलिस को बताया कि इस गबन का पता तब चला, जब 15 मई 2026 को उनके पास भारतीय स्टेट बैंक, लाडनूं शाखा से 7,79,952.80 रुपये के आरटीजीएस भुगतान पुष्टिकरण ईमेल आया। व्यवस्थापक ने गोविंदराम पुत्र रावताराम को 7,79,952.80 रुपये का चेक काट दिया जबकि समिति द्वारा गोविंदराम नामक किसी व्यक्ति की वैधानिक देनदारी नहीं थी।

सोसाइटी अध्यक्ष का कहना है कि देवेंद्रसिंह, सहकारी निरीक्षक ने पिछले दिनों इसी प्रकार से, गणेश बीज भंडार को 17.12 लाख रुपये और फर्म मैसर्स अर्जुन खीचड़ को 23 लाख रुपये का अवैध भुगतान ट्रांसफर कर दिया था। अध्यक्ष जगन्नाथ बुरडक़ के अनुसार, व्यवस्थापक देवेंंद्रसिंह पिछले 10 दिन से लगातार अनुपस्थित है और उसके दोनों मोबाइल नंबर बंद आ रहे हैं। अध्यक्ष ने पुलिस को दोनों मोबाइल नंबर भी उपलब्ध करवा दिये हैं।

विधायक ने कलेक्टर को अवगत कराया

इस मामले को लेकर लाडनूं विधायक मुकेश भाकर ने ग्रामीणों के साथ जिला कलेक्टर डीडवाना को ज्ञापन सौंपकर दोषी अधिकारी के खिलाफ जल्द कार्रवाई की मांग की है। भाकर ने बताया कि यदि इस मामले में जल्द उचित कार्रवाई नहीं होती है तो हम बड़ा आंदोलन करेंगे।

मूंग वाले किसान भी ढूंढ रहे

अध्यक्ष जगन्नाथ बुरडक़ ने मुखपत्र को बताया कि देवेंद्र सिंह ने मूंग की सरकारी खरीद में भी गड़बड़ी की है। कुछ किसानों का माल उचंती में खरीद लिया, लेकिन उन्हें भुगतान नहीं किया गया। मूंग की खरीद-फरोख्त में कुछ व्यापारियों भी देवेंद्रसिंह से रुपये मांग रहे हैं। यह मामला, लाखों रुपये का नहीं, बल्कि कई करोड़ रुपये का है।

अधिकारी नहीं दे रहे जानकारी

बताया जा रहा है कि देवेंद्रसिंह का मूल पदस्थापन नागौर उप रजिस्ट्रार कार्यालय में है, लेकिन उसका हैडक्वार्टर डीडवाना-कुचामन है। वह नागौर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक में सहायक अधिशासी अधिकारी के पद पर भी कार्यरत है। इस मामले में नागौर और डीडवाना-कुचामन के उप रजिस्ट्रार गंगाराम गोदारा और नागौर बैंक के प्रबंध निदेशक जयपाल गोदारा से सम्पर्क किया गया, लेकिन दोनों ने कोई जानकारी नहीं दी।

 

 

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