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सहकारी संस्थाओं के क्वालिटी ऑडिट के लिए डॉ. समित शर्मा का साहसिक कदम, गबन छुपाने पर ऑडिटर भी जिम्मेदार होंगे

जयपुर, 1 जून (मुखपत्र)। गुणवत्तापूर्ण ऑडिट और सतत निरीक्षण के अभाव में हाल के वर्षों में अनेक सहकारिताओं में गबन और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर मामले प्रकाश में आये हैं। जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCB), अर्बन कोऑपरेटिव बैंक/नागरिक सहकारी बैंक (UCB), डेयरी संघ, प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक (PLDB), सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार, क्रय विक्रय सहकारी समितियां (KVSS) और ग्राम सेवा सहकारी समितियां (PACS), कोई भी सहकारिता इनसे अछूती नहीं है। सहकारिता विभाग एवं सहकारिताओं में भ्रष्टाचार मुक्त कार्यप्रणाली, पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित कार्य संस्कृति के पक्षधर, रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां डॉ. समित शर्मा ने इस कमी को शिद्दत से महसूस करते हुए सहकारी संस्थाओं की गुणवत्तापूर्ण ऑडिट सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किये हैं। इसमें संस्थाओं को वार्षिक वैधानिक लेखा परीक्षा करने वाले चारों मुख्य स्तंभों – विभागीय अंकेक्षक, विशेष लेखा परीक्षक, क्षेत्रीय अंकेक्षण अधिकारी और लेखा परीक्षक/लेखा परीक्षक फर्मों (Chartered Accountant)) के लिए निर्देश जारी किये गये हैं।

रजिस्ट्रार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ऑडिट कार्य में यदि कालान्तर में जांच/निरीक्षण/आगामी ऑडिट में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता को छुपाना पाया जाता हैं, तो उसके लिए संबंधित की जिम्मेदारी तय करते हुए नियमानुसार वर्णित प्रावधानों के अंतर्गत कार्यवाही की जायेगी।

रजिस्ट्रार द्वारा समस्त क्षेत्रीय अंकेक्षण अधिकारियों, विशेष लेखा परीक्षकों एवं अंकेक्षकों (विभागीय एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट) को निर्देशित किया गया है कि सहकारी समितियों की वैधानिक लेखा परीक्षा को अधिक प्रभावी, तथ्यपरक एवं उत्तरदायित्वपूर्ण बनाते हुए उक्त निर्देशों की गंभीरता से अनुपालना सुनिश्चित की जाए ताकि सहकारी समितियों एवं संस्थाओं की लेखा परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, प्रभावी एवं उत्तरदायी बन सके।

परिपत्र

राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 की धारा 54 एवं राजस्थान सहकारी सोसायटी नियम 2003 के नियम 73 के अंतर्गत सहकारी सोसायटियों के वार्षिक वैधानिक लेखा परीक्षा के संबंध में संज्ञान में आया है कि कतिपय विभागीय लेखा परीक्षकों, चार्टर्ड एकाउंटेंट्स/चार्टर्ड एकाउंटेंट फर्मों द्वारा वैधानिक लेखा परीक्षा कार्य सहकारी समिति मुख्यालय पर उपस्थित होकर नहीं किया जा रहा है जो कि राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम 2001 एवं नियम 2003 में वर्णित प्रावधानों एवं विभागीय परिपत्रों में प्रदत्त दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है एवं कतिपय लेखा परीक्षा प्रतिवेदनों में वित्तीय अनियमितताएं अंकित की जाती हैं, तो उन्हें प्रमाणित करने हेतु पर्याप्त साक्ष्य लेखा परीक्षा प्रतिवेदन में अंकित/उपलब्ध नहीं होते हैं। सहकारी सोसायटियों के वार्षिक वैधानिक लेखा परीक्षा के संबंध में पूर्व में जारी परिपत्रों/आदेशों की निरंतरता में निम्नांकित दिशा-निर्देश जारी किये जाते हैं:-

क्षेत्रीय अंकेक्षण अधिकारी हेतु निर्देश

1. समस्त क्षेत्रीय अंकेक्षण अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके अधीनस्थ विशेष लेखा परीक्षक निर्धारित दिशा-निर्देशों की पूर्ण पालना करें तथा प्रत्येक लेखा परीक्षा प्रतिवेदन परीक्षण उपरांत ही अग्रेषित किया जावे।

2. अपने क्षेत्राधीन सहकारी समितियों के अंकेक्षण कार्य की नियमित निगरानी एवं प्रभावी पर्यवेक्षण सुनिश्चित करेंगे।

3. अंकेक्षण प्रतिवेदनों की जांच एवं समीक्षा कर संबंधित सहकारी समितियों को आवश्यक अनुपालना हेतु निर्देशित करेंगे।

4. अंकेक्षकों एवं सी.ए. फर्मों द्वारा सहकारी अधिनियम, नियम, परिपत्रों, आदेशों एवं दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित करवाएंगे।

5. वित्तीय अनियमितताओं के प्रकरणों में अधिनियम एवं नियमों के अंतर्गत आवश्यक कार्यवाही प्रस्तावित कर सक्षम स्तर पर प्रेषित करेंगे।

6. मासिक प्रगति प्रतिवेदन प्राप्त कर उनकी समीक्षा उपरांत समेकित समीक्षा प्रतिवेदन जारी करेंगे।

7. अंकेक्षण गुणवत्ता की नियमित समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक निर्देश जारी करेंगे।

8. संयुक्त मुख्य अंकेक्षक कार्यालय को अपेक्षित सूचनाएं, प्रतिवेदन एवं प्रगति रिपोर्ट समयबद्ध रूप से प्रेषित करेंगे।

9. अंकेक्षण कार्य के दौरान उत्पन्न समस्याओं के निराकरण हेतु खंड स्तर के विभागीय अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे।

विशेष लेखा परीक्षक हेतु निर्देश

1. विशेष लेखा परीक्षक प्रत्येक माह की समीक्षा बैठकों में लेखा परीक्षा प्रगति, लंबित प्रतिवेदन एवं प्रमुख अनियमितताओं की जानकारी अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करेंगे।

2. सहकारी समितियों का वार्षिक वैधानिक अंकेक्षण अधिनियम, नियमों एवं विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप संपादित करना सुनिश्चित करेंगे।

3. अंकेक्षण प्रतिवेदन की परीक्षणोपरांत समीक्षा कर संबंधित सहकारी समिति को आवश्यक अनुपालना हेतु निर्देशित करेंगे।

4. वित्तीय अनियमितता, गबन अथवा धन के दुरुपयोग से संबंधित प्रकरणों में अधिनियम की धारा 57 के अंतर्गत आवश्यक कार्यवाही हेतु सक्षम स्तर पर प्रकरण दर्ज करने हेतू प्रस्तुत करेंगे।

5. अंकेक्षण कार्य की प्रगति की नियमित समीक्षा करेंगे।

6. मासिक प्रगति समीक्षा बैठक आयोजित कर निरीक्षकवार/संस्थावार समीक्षा प्रतिवेदन जारी करेंगे। अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने अथवा अपूर्ण अभिलेख प्रस्तुत करने अथवा अपेक्षित सहयोग नहीं करने वाली सहकारी संस्थाओं के विरुद्ध अधिनियम अंतर्गत प्रकरण तैयार कर संबंधित उप पंजीयक, सहकारी समितियां को प्रेषित करेंगे।

7. अंकेक्षण कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करेंगे।

8. अंकेक्षण संबंधी विभागीय निर्देशों, प्रक्रियाओं एवं प्रावधानों की पालना किया जाना सुनिश्चित करेंगे।

9. अंकेक्षकों को आवश्यक मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जाना सुनिश्चित करेंगे।

विभागीय अंकेक्षक हेतु निर्देश

1. सहकारी समिति मुख्यालय में उपस्थित होकर निर्धारित समयावधि में प्रभावी अंकेक्षण कार्य संपादित करना सुनिश्चित करें।

2. लेखा परीक्षा राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2001 एवं नियम, 2003 के प्रावधानों के अनुरूप निर्धारित प्रारूप में ही की जाए तथा सभी आवश्यक संलग्नक, प्रमाण-पत्र एवं अभिलेख अनिवार्य रूप से संलग्न किए जाएं।

3. ऑडिट केवल औपचारिकता न होकर वास्तविक परीक्षण आधारित हो। वित्तीय अनियमितता, गबन, दुरुपयोग, एनपीए, प्रमाणित व्यय, अनियमित ऋण वितरण, रिकॉर्ड संधारण में कमी आदि बिंदुओं पर स्पष्ट एवं तथ्यात्मक टिप्पणी अंकित की जाए।

4. पूर्व लेखा परीक्षा प्रतिवेदनों में अंकित आपत्तियों एवं अनियमितताओं की अनुपालना स्थिति का परीक्षण कर स्पष्ट उल्लेख किया जाए।

5. यदि समिति अथवा संबंधित अधिकारी अभिलेख, रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, वाउचर अथवा अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराते हैं, तो इसकी स्पष्ट टिप्पणी लेखा परीक्षा प्रतिवेदन में उत्तरदायित्व सहित अंकित की जाए।

6. गबन, वित्तीय अनियमितता अथवा दुरुपयोग पाए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों का नाम, पदनाम, अवधि एवं राशि सहित विस्तृत विवरण अंकित कर नियमानुसार ऑडिअ मिमो जारी किया जाए तथा आवश्यकतानुसार अधिनियम की धारा-57 अंतर्गत कार्यवाही हेतु अनुशंसा की जाए।

7. समितियों के स्टॉक, नकद, बैंक खातों, ऋण वितरण, ऋण वसूली, रिकॉन्सीलेशन, सीआरआर, एसएलआर, एनपीए एवं अन्य वित्तीय बिंदुओं का वास्तविक सत्यापन कर प्रतिवेदन में स्पष्ट टिप्पणी की जाए।

8. समिति में कार्मिक नियुक्ति, नियमितीकरण, सेवा शर्तों एवं प्रशासनिक कार्यवाहियों की वैधानिकता का परीक्षण भी लेखा परीक्षा का अभिन्न भाग माना जाए।

9. रिकॉर्ड संधारण, कैश बुक, लेजर, वाउचर, स्टॉक रजिस्टर एवं अन्य वैधानिक अभिलेखों के रख-रखाव की स्थिति पर स्पष्ट टिप्पणी की जाए।

10. अंकेक्षण प्रतिवेदन के प्रत्येक पृष्ठ पर हस्ताक्षर करना तथा संलग्न अभिलेखों का परीक्षण उपरांत आवश्यक टिप्पणियां अंकित की जाए।

11. पूर्व अंकेक्षण आक्षेपों एवं उनकी अनुपालना की वर्तमान स्थिति का परीक्षण कर प्रतिवेदन में उल्लेख किया जाए।

12. समयबद्ध रूप से अंकेक्षण कार्य पूर्ण कर प्रतिवेदन सक्षम अधिकारी को प्रस्तुत किया जाए।

चार्टर्ड अकाउंटेंट/सी.ए. फर्म हेतु निर्देश

चार्टर्ड अकाउंटेंट/ सी.ए. फर्म द्वारा विभागीय अंकेक्षकों हेतु जारी उक्त निर्देशों के अतिरिक्तनिम्न निर्देशों की पालना सुनिश्चित की जावे-

1. चार्टर्ड अकाउंटेंट/फर्म द्वारा की जाने वाली लेखा परीक्षा में यह सुनिश्चित किया जाए कि कार्य नियमानुसार स्वीकृति एवं प्राधिकरण के पश्चात ही किया गया हो तथा निर्धारित समयावधि में गुणवत्तापूर्ण प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए।

2. संबंधित सहकारी समिति के मुख्यालय में उपस्थित होकर अभिलेखों एवं लेखा पुस्तकों के आधार पर अंकेक्षण कार्य संपादित करना।

3. अंकेक्षण कार्य सहकारी अधिनियम, नियमों, विभागीय दिशा-निर्देशों एवं प्रचलित लेखांकन मानकों के अनुरूप किया जावे।

4. मूल अंकेक्षण प्रतिवेदन निर्धारित समयावधि में संबंधित कार्यालय में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जावे।

5. अंकेक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत किए बिना किसी प्रकार का अंकेक्षण शुल्क देय नहीं होगा।

6. विभाग द्वारा आयोजित मासिक समीक्षा बैठकों में अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर प्रगति से अवगत करवाना होगा।

उपरोक्त निर्धारित दायित्वों का निर्वहन किये जाने की अपेक्षा की जाती हैं, चूॅकि लेखा परीक्षा का कार्य बहुत महत्वपूर्ण हैं। उक्त कार्य को सभी लेखा परीक्षक/चार्टेड अकाउन्टेंट द्वारा गम्भीरता पूर्वक किया जाना चाहिए।

ऑडिट कार्य में यदि कालान्तर में जांच/निरीक्षण/आगामी ऑडिट में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता को छुपाना पाया जाता हैं तो उसके लिए संबंधित की जिम्मेदारी तय करते हुए नियमानुसार वर्णित प्रावधानों के अंतर्गत कार्यवाही की जायेगी।

समस्त क्षेत्रीय अंकेक्षण अधिकारियों, विशेष लेखा परीक्षकों एवं अंकेक्षकों (विभागीय एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट) को निर्देशित किया जाता है कि सहकारी समितियों की वैधानिक लेखा परीक्षा को अधिक प्रभावी, तथ्यपरक एवं उत्तरदायित्वपूर्ण बनाते हुए उक्त निर्देशों की गंभीरता से अनुपालना सुनिश्चित की जाए ताकि सहकारी समितियों एवं संस्थाओं की लेखा परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, प्रभावी एवं उत्तरदायी बन सके। – (डॉ समित शर्मा), रजिस्ट्रार

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