सवा महीने बाद “सरकार” की नींद टूटी, सहकारिता सेवा के अधिकारी को विशेष लेखा परीक्षक का कार्यभार सौंपा
सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार के महाप्रबंधक का पद भी एक माह से रिक्त, एक्स्ट्रा चार्ज के ऑर्डर भी नहीं कर रही सरकार
जयपुर, 19 अगस्त (मुखपत्र)। राज्य सरकार द्वारा एक आदेश जारी कर, राज्य सहकारिता सेवा के एक अधिकारी को विशेष लेखा परीक्षक के पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। सहकारिता विभाग के संयुक्त शासन सचिव प्रहलाद सहाय नागा की ओर से जारी आदेशानुसार, सहकारिता सेवा के सहायक रजिस्ट्रार कैडर के अधिकारी सूर्यकांत को अपने पद के साथ-साथ, विशेष लेखा परीक्षक, श्रीगंगानगर के पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।

गत 10 जुलाई 2026 की तबादला सूची में सूर्यकांत का स्थानांतरण महाप्रबंधक, श्रीगंगानगर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार लि. से कार्यालय, उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, श्रीगंगानगर में निरीक्षक पद के विरुद्ध किया गया। इसी सूची में, विशेष लेखा परीक्षक के पद पर कार्यरत अमिताभ दिवाकर, सहायक रजिस्ट्रार का स्थानांतरण, सहायक रजिस्ट्रार, भरतपुर सरस डेयरी में कर दिए जाने से एसए, श्रीगंगानगर का पद रिक्त हो गया था। विशेष लेखा परीक्षक की भांति, सूर्यकांत के स्थानांतरण के बाद से महाप्रबंधक, सहकारी भंडार के पद भी एक माह से रिक्त है। विशेष लेखा परीक्षक का पद रिक्त होने से इस कार्यालय में पदस्थ सहकारी निरीक्षकों और मंत्रालयिक कर्मचारियों को माह, जुलाई का वेतन आज तक नहीं मिल पाया।
इसी प्रकार, 10 जुलाई 2026 से महाप्रबंधक, भंडार का पद रिक्त होने से, वहां के नियमित कामकाज पर भी प्रभावित हो रहे हैं। सरकार ने महाप्रबंधक के पद का अतिरिक्त कार्यभार भी किसी अधिकारी को नहीं सौंपा। “सरकार” की ट्रांसफर-पोस्टिंग की इस लिज-पिज नीति और व्यावसायिक सहकारी संस्थाओं में पदस्थापन में अनावश्यक लेटलतीफी के कारण दैनिक कारोबार करने वाली सहकारी संस्थाओं के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां उत्पन्न हो रखी हैं। जिला मुख्यालय पर सहकारिता सेवा के एक संयुक्त रजिस्ट्रार, एक उप रजिस्ट्रार, चार सहायक रजिस्ट्रार और एक दर्जन से अधिक सहकारी निरीक्षक पदस्थ हैं, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि “सरकार” के पास इतना-सा दिमाग लगाने के लिए भी समय नहीं है।

