अगले सप्ताह से 15 जिलों में लागू होगा “फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल”- मंजू राजपाल
– किसान घर बैठे उर्वरक ऑनलाइन बुक कर सकेंगे, नजदीकी विक्रेता के पास मिलेगा
– प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता, किसानों को जरूरत के मुताबिक मिलेगा उर्वरक
जयपुर, 20 अगस्त (मुखपत्र)। किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कालाबाजारी एवं जमाखोरी पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में राजस्थान सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रमुख शासन सचिव (कृषि एवं उद्यानिकी) मंजू राजपाल की अध्यक्षता में गुरुवार को पंत कृषि भवन में उर्वरकों की मांग, आपूर्ति एवं उपलब्धता तथा फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (FFS) की प्रगति की समीक्षा की गई।
15 जिलों में अगले सप्ताह से लागू होगा फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल
प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि सिरोही और राजसमंद जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (FFS) की शुरूआत 25 जून से की गई थी। इन दोनों जिलों में अब तक लगभग 78 हजार से अधिक किसानों को 12 हजार मैट्रिक टन से अधिक उर्वरक वितरित किया जा चुका है। यहां के सफल अनुभव को देखते हुए अब अगले सप्ताह से इस व्यवस्था का विस्तार प्रदेश के 15 जिलों में किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध रूप से जल्द ही इसे पूरे राजस्थान में लागू किया जाएगा।
किसान घर बैठे जरूरत के अनुसार कर सकेंगे बुकिंग
फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के माध्यम से किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक की बुकिंग कर सकेंगे तथा नजदीकी अधिकृत रिटेलर से उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। बुकिंग के बाद जारी होने वाला टोकन 48 घंटे तक वैध रहेगा। निर्धारित अवधि में उर्वरक प्राप्त नहीं करने पर किसान को पुन: बुकिंग करनी होगी। इस डिजिटल व्यवस्था से वास्तविक जरूरत वाले किसानों को प्राथमिकता मिलेगी और उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। साथ ही, कालाबाजारी, जमाखोरी, अनियमित वितरण तथा अनावश्यक खरीद पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।
जागरूकता अभियान चलाएंगे : गोयल
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि उर्वरकों की उपलब्धता और संतुलित उपयोग को लेकर किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए कृषक सखी, कृषक साथी एवं कृषि पर्यवेक्षकों के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। कृषि कार्मिक किसानों को फसलवार उर्वरकों की आवश्यकता, उचित मात्रा एवं उपयोग के सही समय की जानकारी देंगे।
श्री गोयल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध करवाना नहीं, बल्कि हर किसान तक पारदर्शी, सुगम, तकनीक आधारित और जरूरत के मुताबिक उर्वरक पहुंचाना है। फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल है, जो प्रदेश की उर्वरक वितरण व्यवस्था को अधिक किसान-केंद्रित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
खरीफ में जरूरत से अधिक यूरिया की उपलब्धता
मंजू राजपाल ने बताया कि खरीफ-2026 में अप्रैल से अगस्त तक भारत सरकार द्वारा राजस्थान को 9 लाख 28 हजार मैट्रिक टन यूरिया आवंटित किया गया है। 1 अप्रैल को उपलब्ध स्टॉक को शामिल करते हुए अब तक 13 लाख 12 हजार मैट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया जा चुका है, जो आवंटन का लगभग 141 प्रतिशत है। अगस्त की शेष अवधि में भी लगभग 50 हजार मैट्रिक टन यूरिया की अतिरिक्त आपूर्ति प्रस्तावित है।
इसी प्रकार अप्रैल से अगस्त तक 3 लाख 80 हजार मैट्रिक टन डीएपी की मांग के विरुद्ध 1 अप्रैल के उपलब्ध स्टॉक सहित अब तक 3 लाख 41 हजार मैट्रिक टन डीएपी उपलब्ध करवाया गया है। आयातित डीएपी की आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद किसानों को वैकल्पिक फास्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। प्रदेश में अब तक 1 लाख 71 हजार मैट्रिक टन एनपीके तथा 3 लाख 76 हजार मैट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध करवाया गया है। इस प्रकार किसानों को मांग के अनुरूप कुल 7 लाख 88 हजार मैट्रिक टन फास्फेटिक उर्वरक उपलब्ध कराया गया है।
प्रदेश में पर्याप्त उर्वरक स्टॉक उपलब्ध
वर्तमान में प्रदेश में 2 लाख 59 हजार मैट्रिक टन यूरिया, 67 हजार मैट्रिक टन डीएपी, 79 हजार मैट्रिक टन एनपीके तथा 1 लाख 69 हजार मैट्रिक टन एसएसपी का स्टॉक उपलब्ध है। उर्वरकों की आपूर्ति लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा राज्यों को उर्वरकों का माहवार एवं कम्पनीवार आवंटन किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा प्राप्त आवंटन और जिलों की वास्तविक मांग के आधार पर जिलेवार आपूर्ति योजना तैयार कर उर्वरकों का पारदर्शी वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।
बैठक में अतिरिक्त निदेशक कृषि (आदान) गोपाल लाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार) खंड और सभी संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) जिला परिषद वीसी के माध्यम से जुड़े।
क्या है फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल
फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (FFS) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक डिजिटल व्यवस्था और मोबाइल ऐप है, जिसके जरिए किसानों को सब्सिडी वाला यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरक जमीन के आकार और फसल के आधार पर आसानी से और पारदर्शी तरीके से मिलते हैं। इसके माध्यम से खाद खरीदने के लिए पहले ऑनलाइन बुकिंग करनी होती है, जिससे एक क्यूआर कोड (QR Code) मिलता है।

