सिर्फ गाड़ी का मालिक होना NDPS केस में दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त आधार नहीं – हाई कोर्ट
– हाई कोर्ट ने सहआरोपी को बरी करने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील खारिज की
जयपुर, 2 सितम्बर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मादक पदार्थों से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल किसी वाहन का मालिक होने के आधार पर उसके मालिक को एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोपी नहीं बनाया जा सकता। अभियोजन को यह साबित करना होगा कि वाहन मालिक को इस बात की जानकारी थी या उसने जानबूझकर अपने वाहन का उपयोग मादक पदार्थों को रखने, छिपाने या ले जाने के लिए करने की अनुमति दी थी। जस्टिस अनिल कुमार उपमन की पीठ ने इस मामले में राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें आरोपी को बरी किया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल वाहन के पंजीकृत मालिक होने से किसी व्यक्तिके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 25 के तहत आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि धारा 25 में उपयोग किया गया शब्द जानबूझकर बेहद महत्वपूर्ण है। किसी संपत्ति या वाहन का मालिक होने मात्र से यह मान लेना उचित नहीं है कि उसे इस बात की जानकारी थी कि उसका उपयोग प्रतिबंधित मादक पदार्थों को रखने या ले जाने के लिए किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि वाहन का मालिक होना, बिना ऐसे किसी साक्ष्य के जो मालिक को मादक पदार्थों के परिवहन और कब्जे से जोड़ता हो, उसे आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं बनाता।
मामले में एक स्कॉर्पियो कार से 348 किलोग्राम प्रतिबंधित मादक पदार्थ बरामद किया गया। जांच में सामने आया कि यह वाहन आरोपी ने खरीदा था और उसके नाम पर पंजीकृत था। इसी आधार पर आरोपी को मामले में जोड़ा गया। हालांकि, निचली अदालत ने साक्ष्यों पर विचार करने के बाद उसे बरी कर दिया। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। राज्य की ओर से दलील दी गई कि मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों से यह साबित होता है कि जिस वाहन से मादक पदार्थ बरामद हुआ उसे आरोपी ने एक व्यक्ति से खरीदा था और वाहन उसके नाम पर पंजीकृत था। इसलिए उसे मामले में जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पहले यह साबित करने में ही असफल रहा कि सह-आरोपी प्रतिबंधित मादक पदार्थ को उसी वाहन में ले जा रहे थे। जब परिवहन से जुड़ा यह बुनियादी तथ्य ही साबित नहीं हुआ तो केवल वाहन के पंजीकृत मालिक होने के आधार पर आरोपी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 25 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रावधान में यह जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति ने जानबूझकर अपने घर, कमरे, स्थान या वाहन को अपराध के लिए उपयोग करने की अनुमति दी हो। इसलिए किसी मकान, कमरे या वाहन में अपराध होने पर उसके मालिक को केवल स्वामित्व के आधार पर आरोपी नहीं बनाया जा सकता। (इनपुट : लाइवलॉ)

