हनुमानगढ़ सहित राजस्थान के 11 और जिलों में कल से उर्वरक बिक्री ऑनलाइन पीओएस सिस्टम से
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जयपुर, 26 अगस्त (मुखपत्र)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर राजस्थान में किसानों को पारदर्शी एवं एकसमान तरीके से अनुदानित उर्वरक दिलाने के लिए नई डिजिटल व्यवस्था शुरू हो रही है। डीबीटी पीओएस एप्लिकेशन (DBT POS Application) का नया वर्जन 3.77 कल गुरुवार से प्रदेश के 11 जिलों में शुरू होने जा रहा है।

कृषि आयुक्त
कृषि आयुक्त नरेश गोयल ने बताया कि प्रथम दो चरणों के परिणाम उत्साहजनक एवं सकारात्मक रहे हैं। प्रथम दो चरणों में एक लाख से अधिक किसानों ने 15 हजार मेट्रिक टन यूरिया इसके माध्यम से बुकिंग की है। किसानों ने इसे काफी आसान, उपयोगी बताया है। उन्होंने बताया कि इससे पहले दो चरणों में कुल 7 जिलों (पहले 2 और फिर 5) में फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (FFS) सिस्टम सफल हो चुका है। अब 11 और जिलों में इसका विस्तार हो रहा है। ये जिले हैं – बारां, दौसा, हनुमानगढ़, डूंगरपुर, जालोर, झालावाड़, करौली, कोटा, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर और टोंक।
उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा किसान को प्रति बैग 1600 रुपए की सब्सिडी दी जाती है, जिसके बाद किसान ग्रेड यूरिया का बैग किसान को केवल 267 रुपए में उपलब्ध होता है, वहीं औद्योगिक ग्रेड यूरिया की कीमत 2500 रुपये प्रति बैग से अधिक है। इस कारण यूरिया की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी होती है और किसान को समय पर आवश्यक मात्रा में इसकी उपलब्धता नहीं हो पाती।
अब राजस्थान के 18 जिलों में यूरिया बिक्री फार्मर आईडी के माध्यम से होगी। राजस्थान फार्मर आईडी बनाने में देश में अग्रणी राज्यों में है। प्रदेश में 88.85 लाख किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी है। राजस्थान के कृषि विभाग में शीघ्र ही एग्रीस्टेक कमिश्नरेट (AgriStack Commissionerate) की स्थापना की जा रही है।
नई व्यवस्था से किसानों को क्या लाभ होगा?
– हर उर्वरक की बिक्री अब डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड होगी। इससे गलत लोगों तक उर्वरक पहुंचने की संभावना कम होगी।
– किसानों को दुकान पर जल्दी और बिना कागजी झंझट के उर्वरक मिल सकेगा।
– दुकानदारों और अधिकारियों को स्टॉक की सही जानकारी रहेगी, जिससे कमी की समस्या कम होगी।
– सरकार को भी साफ-साफ पता चलेगा कि सब्सिडी का पैसा सही जगह लग रहा है या नहीं।
– उर्वरक डीलर अब इनके साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग नहीं कर सकेंगे।
– किसान से निर्धारित दर से ज़्यादा राशि की वसूली नहीं कर सकेंगे।
नई वर्जन में सिस्टम को और आसान, तेज और स्थिर बनाया गया है, ताकि गांव-देहात में भी बिना रुकावट काम चले।
– कृषि विभाग ने उर्वरक कंपनियों, सहकारी समितियों और सभी दुकानदारों से अनुरोध किया है कि वे कल गो-लाइव के समय पूरा सहयोग दें, ताकि काम सुचारू रूप से चले।
कृषि आयुक्त नरेश गोयल के अनुसार यह कदम राजस्थान में उर्वरक वितरण को और पारदर्शी, ईमानदार और किसान-हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। सरकार चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में इस व्यवस्था को लागू करने की योजना पर काम कर रही है।

