मुखपत्र

जनसेवा हॉस्पिटल में साढ़े पांच माह की बच्ची के दिल का छेद बिना चीरा लगाए किया बंद

श्रीगंगानगर, 3 अप्रेल (मुखपत्र)। टांटिया यूनिवर्सिटी कैम्पस में स्थित डॉ. एसएस टांटिया मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (जन सेवा हॉस्पिटल) के डॉक्टरों ने साढ़े पांच माह की बालिका के दिल में छेद को बिना चीरा लगाये बंद कर नया जीवन दिया गया। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के अंतर्गत बच्ची का उपचार पूर्णत: नि:शुल्क किया गया है।

बच्ची को बहुत परेशानी महसूस हो रही थी। वह ढंग से दूध भी नहीं पी रही थी और सांस लेने में भी परेशानी थी। परिवार वालों ने हनुमानगढ़ और जयपुर दिखाया। अंतत: टांटिया यूनिवर्सिटी कैम्पस में स्थित डॉ. एसएस टांटिया मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (जन सेवा हॉस्पिटल) में आकर बच्ची को आराम मिला। अब बच्ची ठीक महसूस कर रही है।

हॉस्पिटल के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी प्रो. बलजीत सिंह कुलडिय़ा ने बताया कि हनुमानगढ़ के निकट जंडांवाली निवासी रविकुमार की साढ़े पांच माह की बेटी तानिया को जन्म के कुछ स्वास्थ्यजन दिक्कत थी। उसे दूध पीने और सांस लेने में भी दिक्कत महसूस होती थी। बच्ची को पहले हनुमानगढ़ दिखाया गया, जहां चिकित्सकों ने बालिका को चंडीगढ़ या जयपुर ले जाने की सलाह दी। इस पर परिजन उसे जयपुर ले गए, जहां चिकित्सकों ने बताया कि बच्ची के दिल में छेद है। छाती चीर कर ऑप्रेशन करना पड़ेगा। परिवारजन तैयार भी हो गए लेकिन ऑप्रेशन की तारीख कई दिन बाद मिलने के कारण वे एक बार घर लौट आये।

 

इसी बीच बालिका के परिजनों को जन सेवा हॉस्पिटल के बारे में जानकारी मिली। यहां कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. चित्रेश चाहर ने बालिका की रिपोटर््स देखी और बिना चीरा लगाए ऑप्रेशन की सलाह दी। इस पर मंगलवार शाम को बच्ची को भर्ती करवाया गया और बुधवार सुबह उसका ऑप्रेशन कर दिया गया। डॉ. चाहर ने बिना चीरा लगाए, पैर की नस से तार डालकर सफल आप्रेशन किया। ऑप्रेशन में निषचेतन विशेषज्ञ डॉ. महेंद्र भी साथ थे।

डॉ. चाहर ने बताया कि डक्ट्स आर्टिरियोसस नाम की एक नलकी होती है, जो मां के पेट मेें पल रहे बच्चे के सिकुड़े हुए फेफड़ों में जाने वाले खून को महाधमनी की तरफ निकालती है। आमतौर पर यह नलकी जन्म के सात दिन बाद स्वत: ही सिकुडक़र बंद हो जाती है, क्योंकि जन्म के साथ ही बच्चे के फेफड़े काम शुरू कर चुके होते हैं। परंतु कुछ बच्चों में यह बंद नहीं हो पाती। इस कारण नलकी से फेफड़ों तक खून का प्रवाह बढ़ जाता है। इससे बच्चे को बार-बार फेफड़ों में इंफेक्शन होता है। इससे दूध न पी पाना, सांस सम्बंधी परेशानी होती है। डॉ. चाहर ने बताया कि जन सेवा हॉस्पिटल में नवजात बच्चों के हरप्रकार के उपचार के साथ बच्चों के हृदय संबंधी रोगों के उपचार की सारी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

 

 

 

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