एक ही कृषि भूमि का सात लोगों ने फर्जी फसल बीमा करवा कर, 30 लाख रुपए का क्लेम उठाया
श्रीकरणपुर के बाद अब सूरतगढ़ में भी फर्जी फसल बीमा के मामले पकड़े गए, कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने दिए F.I.R. दर्ज कराने के निर्देश
जयपुर, 19 अगस्त (मुखपत्र)। श्रीगंगानगर जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में फर्जीवाड़े के कुछ और मामले सामने आए हैं। जिले की सूरतगढ़ तहसील के कालूसर गांव में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जी बीमा पॉलिसी बनाकर बीमा क्लेम प्राप्त करने की गोपनीय सूचना विभागीय जांच में सही पाई गई।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने फर्जीवाड़ा का प्रकरण संज्ञान में आने पर संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जिला परिषद श्रीगंगानगर को फर्जीवाड़ा कर लगभग 30 लाख रुपए का बीमा क्लेम प्राप्त करने की ठगी में शामिल कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी/ई-मित्र) एवं दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं में एफआईआर दर्ज करवाकर कठोर कार्यवाही करवाने के लिए निर्देश दिये हैं।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल द्वारा सुरतगढ़ तहसील के कृषक बनवारीलाल पुत्र सांवला, रिछपाल पुत्र गिरधारी एवं अन्य भागीदार किसान, सीएससी (ई-मित्र) संचालक विकास कुमार व बिजेश एवं बीमा कम्पनी के विरुद्ध एफआईआर करवाने के लिए निर्देशित किया गया है।
एक ही जमीन पर सात लोगों ने 30 लाख का फर्जी बीमा उठाया
जांच में सामने आया है कि बनवारी लाल ने स्वयं के खसरा नम्बर 281/91 पर स्वयं ने ऋणी किसान के रूप में 10.37 हैक्टर में मूंगफली फसल बीमा कवाया। इसी खसरा की जमीन पर सीएससी (ई-मित्र) संचालक विकास कुमार से भी 10.37 हैक्टर में मूंगफली व बिजेश से भी 10.3 हैक्टर में मूंगफली की फसल का अलग-अलग फसल बीमा करवाया। बनवारी लाल ने तीनों फसल बीमा पॉलिसी पर कुल 23 लाख 35 हजार 319 रुपए का क्लेम प्राप्त किया है।
बनवारी लाल ने इसी खसरा की जमीन को रिछपाल पुत्र गिरधारी को बटाई/लीज पर दिया और रिछपाल ने भी 10.37 हैक्टर में मूंगफली का बटाईदार किसान के रूप में फसल बीमा करवा लिया। बाद में, रिछपाल ने भी इसी खसरे का 7 लाख 80 हजार 195 रुपए का फसल बीमा क्लेम प्राप्त किया है।
सेम खसरे में तीन और किसानों ने किया बीमे का प्रयास
इस खसरा के 10.37 हैक्टर में अन्य किसान इमीचन्द पुत्र महावीर, श्रीमती प्रमीला पत्नी सुनील साहरण एवं ओमप्रकाश पुत्र राजाराम ने भी मूंगफली का फसल बीमा करवाया, जिसे बीमा कम्पनी ने रिजेक्ट कर दिया था। इस प्रकार चयनित रूप से फसल बीमा पॉलिसी को रिजेक्ट करना बीमा कम्पनी की संलिप्तता की पुष्टि करता है।
श्री गोयल ने बताया कि एक ही खसरा पर अनेक पॉलिसी जारी की गई और खसरे के वास्तविक क्षेत्रफल से 7 गुना अधिक क्षेत्र पर बीमा करवाया गया। विभाग का मानना है कि इस तरह का संगठित फर्जीवाड़ा सीएससी (ई-मित्र), बीमा कम्पनी तथा संबंधित किसानों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
वास्तविक किसानों का लाभ पहुंचाने के लिए कटिबद्ध
कृषि मंत्री, डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक पहुंचे, इसके लिए विभाग दृढ़ है। फर्जी पॉलिसी जारी करने में शामिल बीमा कम्पनी, सीएससी (ई-मित्र), सहयोगी किसानों, सक्रिय दलालों, बीमा कंपनी के कर्मचारियों तथा वित्तीय संस्थाओं के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं के अंतर्गत कठोर कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
श्रीकरणपुर, टोंक एवं जयपुर में पहले दर्ज हो चुकी एफआईआर
उल्लेखनीय है कि कृषि विभाग द्वारा इससे पहले श्रीगंगानगर जिले के श्रीकरणपुर पुलिस थाना में नग्गी एवं आसपास के अन्य क्षेत्रों में फसल बीमा में फर्जीवाड़े को लेकर एफआईआर दर्ज करायी जा चुकी है। इसके अलावा एक दिन पहले ही टोंक जिले की मालपुरा तहसील और जयपुर जिले की शाहपुरा तहसील में फर्जी फसल बीमा कराने वाले कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालित करने वाले ई- मित्र संचालकों एवं बीमा कम्पनी सहित अन्य दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया गया।
जारी रहेगा ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा योजना

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि इस बार कृषि विभाग ने कृषि बीमा पॉलिसी के साथ फार्मर आईडी को अनिवार्य किया है। इससे फर्जीवाड़ा करने वालों की तुरंत पहचान हो जाएगी। साथ ही, ऐसे सभी किसान, जिन्होंने कृषि ऋण नहीं लिया है तथा फसल बीमा करायी है, तो उन सब मामलों की गहनता से जांच की जाएगी। कृषि विभाग ने ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा चलाया है। राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। देश की सबसे इस सबसे बड़ी योजना के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा
पॉलिसी निरस्त कराने का अंतिम अवसर
श्री गोयल ने सभी सीएससी (ई-मित्र) संचालकों, किसानों, दलालों, बीमा कर्मचारियों और वित्तीय संस्थाओं को आगाह किया है कि यदि किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़ा पाया गया तो संबंधित विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई से कोई नहीं बच पाएगा। फर्जी तरीके से बनाई गई फसल बीमा पॉलिसियों को तत्काल निरस्त करवा लिया जाए, अन्यथा भारतीय न्याय संहिता 2023 के अंतर्गत कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग ईमानदार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और योजना का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरतेगा।
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