सहकारिता

तीन सहकारी निरीक्षकों ने सरकारी सेवा से त्यागपत्र दिया, चौथे निरीक्षक ने वीआरएस लिया

श्रीगंगानगर, 2 सितम्बर (मुखपत्र)। वर्षों की मेहनत के बाद, राजस्थान प्रशासनिक सेवा (स्टेट एंड सबऑर्डिनेट सर्विसेज कंबाइंड कॉम्पिटिटिव एग्जाम) के कड़ी प्रतिस्पर्धा के उपरांत राजस्थान राज्य सहकारिता सेवा में चयन होने के बावजूद युवाओं में उत्साह का संचार नहीं हो पा रहा। सहकारिता विभाग युवाओं के ठहराव का आधार नहीं बन रहा, जिसका परिणाम यह है कि युवाओं का सहकारी सेवा में चयन के अल्पसमय में ही मोह भंग हो रहा है। अकेले श्रीगंगानगर में ही हाल के महीनों में तीन नवनियुक्त सहकारी निरीक्षकों ने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। जबकि एक अन्य सहकारी निरीक्षक ने 15 साल के सेवाकाल के बाद वीआरएस (VRS) ले लिया।

अगस्त, 2026 के अंतिम दिनों में, सहकारी निरीक्षक (कार्यकारी) लखन नायक ने सरकारी सेवा से त्यागपत्र दे दिया। उप रजिस्ट्रार कार्यालय, श्रीगंगानगर द्वारा लखन नायक के त्यागपत्र को स्वीकृति के लिए प्रधान कार्यालय, जयपुर प्रेषित कर दिया गया है। इससे कुछ दिन पूर्व, दो सहकारी निरीक्षक – छायांक चावला और जेनेंद्र मीणा भी इस्तीफा दे चुके हैं। सहकारिता विभाग द्वारा लखन को 24 अगस्त 2026 को अपने पद के साथ-साथ श्रीगंगानगर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार के महाप्रबंधक पद के अतिरिक्त कार्यभार के आदेश हुए थे। किसी सहकारी संस्था में ये उसकी पहली नियुक्ति थी, लेकिन उन्होंने नया कार्यभार ग्रहण करने की बजाय सरकारी सेवा को ही छोड़ दिया।

15 वर्ष के सेवाकाल के बाद ही वीआरएस लिया

इनके अलावा, सहकारी निरीक्षक संदीप इंदौरा ने भी 15 वर्ष के सेवाकाल के उपरांत वीआरएस ले लिया। राज्य सरकार द्वारा वीआरएस आवेदन स्वीकार कर लिए जाने के उपरांत वे 31 अगस्त 2026 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्त हो गए।

 

 

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