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टैगिंग करने वाले उर्वरक विक्रेताओं व विनिर्माताओं के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए – गोयल

कृषि आयुक्त के निर्देश, विभागीय योजनाओं का लाभ अधिकतम कृषकों तक समय पर पहुंचाएं

जयपुर, 13 अगस्त (मुखपत्र)। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि खरीफ फसलों के लिए यूरिया व डीएपी पर्याप्त मात्रा में है। उर्वरकों का वितरण पूर्ण पारदर्शिता के साथ किया जाए एवं टैगिंग करने वाले उर्वरक विक्रेताओं व विनिर्माताओं के खिलाफ सख्त कार्यवाही हो। उर्वरकों की जमाखोरी और कालाबाजारी पर विभागीय अधिकारी पूर्ण सतर्कता से नजर रखें। मिलावट, जमाखारी और कालाबाजारी में लिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्यवाही की जाये।

वे गुरुवार को पंत कृषि भवन के सभा कक्ष में वी.सी. द्वारा जिलों में पदस्थापित विभागीय अधिकारियों के साथ कृषि विभाग की योजनाओं की प्रगति के संबंध में बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। आयुक्त ने कहा कि बजट घोषणाओं को ध्यान में रखते हुए विभागीय अधिकारी इन्हें शीघ्र पूरा करें। अधिकारी फिल्ड में जाकर योजनाओं की जानकारी किसानों को दें, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

अधिकतम पात्र किसानों को मिले योजनाओं का लाभ

आयुक्त ने विभागीय योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि बजट घोषणाओं को शीघ्र पूरा करते हुए अधिकतम पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाए, जिससे प्रदेश का किसान आर्थिक रूप से मजबूत एवं खुशहाल बन सके। सभी अधिकारी एवं कर्मचारी राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्य करें।

जिलेवार प्रगति की समीक्षा की

उन्होंने केंद्र प्रवर्तित योजनाओं, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना, सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, कपास उत्पादकता मिशन, नेचुरल फूड सिक्योरिटी मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन और नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजनाओं की जिलेवार वित्तीय प्रगति की समीक्षा की। बैठक में सभी जिलों में उर्वरक आपूर्ती, प्रबंधन, वितरण, प्रधानमंत्री धन धान्य योजना, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की समीक्षा की।

ये अधिकारी रहे उपस्थित

बैठक में अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार) एसएस शेखावत, वित्तीय सलाहकार डॉ. होशियार सिंह, अतिरिक्तनिदेशक कृषि (अनुसंधान) देवेंद्र कुमार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। जिलों में पदस्थापित अधिकारी वी.सी. के माध्यम से जुड़े।

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