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खरीफ ऋण वसूली की अंतिम तिथि बढाने को वित्त विभाग ने दी मंजूरी

– 5.58 लाख किसानों को मिलेगी राहत, 2200 करोड़ रुपये की ऋण वसूली संभावित

जयपुर, 14 अप्रेल (मुखपत्र)। वित्त विभाग ने जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (डीसीसीबी) एवं ग्राम सेवा सहकारी समितियां (पैक्स) के माध्यम से वितरित किये जाने वाले ब्याजमुक्त अल्पकालीन फसली ऋण की वसूली की अंतिम तिथि बढ़ाने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। सहकारिता विभाग की ओर से 1 अप्रेल 2026 को वित्त विभाग को खरीफ सीजन-2025 की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 से बढ़ाकर 30 जून 2026 किये जाने की अनुशंसा के साथ पत्रावली वित्त विभाग को भेजी गयी थी।

ग्राम सेवा सहकारी समितियां कर्मचारियों की अनिश्चतकालीन हड़ताल (कार्य बहिष्कार) और हाल के दिनों में हुई ओलावृष्टि और अतिवृष्टि का हवाला देते हुए ऋण वसूली की तिथि बढ़ाने का आग्रह किया गया था। वित्त विभाग ने इस पर निर्णय लेने में दो सप्ताह का समय लगा दिया। मुखपत्र में 14 अप्रेल 2026 को दिन में ही वित्त विभाग के सहकारिता के नकारात्मक रवैये और ऋण वसूली की अंतिम तिथि बढाने जाने के संदर्भ में विस्तृत समाचार प्रकाशित किया था।

आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वित्त विभाग द्वारा आज दोपहर को आंबेडकर जयंती के सार्वजनिक अवकाश के दिन अपेक्स बैंक और राज्य सहकारी विकास बैंक के अधिकारियों के साथ लंबी वार्ता के पश्चात, खरीफ 2025 की ऋण वसूली की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 से बढ़ाकर 15 मई 2026 या एक साल, जो भी पहले हो, करने की अनुमति दे दी है।

बुधवार को आधिकारिक आदेश जारी होने की संभावना

इस संबंध में आधिकारिक आदेश बुधवार को जारी होने की संभावना है। पैक्स कार्मिकों द्वारा अपने आंदोलन के चलते ऋण वसूली नहीं करने के कारण, राज्य के 5 लाख 58 हजार किसान ब्याजमुक्त अल्पकालीन फसली ऋण योजना की सुविधा से वंचित होने की कगार पर पहुंच गये थे। इन किसानों की ओर 2200 करोड़ रुपये का अधिक फसली ऋण बकाया है। अब तारीख बढऩे से अवधिपार श्रेणी में वर्गीकृत हो चुके इन किसानों को राहत मिलेगी, साथ ही, केंद्रीय सहकारी बैंकों और पैक्स को आर्थिक संजीवनी मिलेगी।

इन जिलों के किसान और सहकारी बैंक हो रहे थे प्रभावित

ऋण वसूली नहीं होने से बाड़मेर, जोधपुर, जैसलमेर, पाली, नागौर, भीलवाड़ा, अलवर, टोंक, हनुमानगढ़ आदि बैंकों के किसान प्रभावित हो रहे थे। सीसीबी बाड़मेर के1 लाख 76 हजार किसान अवधिपार हुए हैं, जिनकी ओर 605 करोड़ रुपये का ऋण बकाया है। जोधपुर के 56 हजार किसान प्रभावित हुए हैं एवं 324 करोड़ रुपये फंस गये हैं। जैसलमेर के 21 हजार किसानों से ऋण वसूली नहीं की जा सकी, जिससे 146 करोड़ रुपये की वसूली अटक गयी है। पाली सीसीबी के 17500 किसानों की ओर 94 करोड़ रुपये की वसूली बकाया है।

सीसीबी नागौर के 61 हजार किसान, भीलवाड़ा के 34 हजार किसान, टोंक के 21 हजार किसान, अलवर के 31500 किसान और हनुमानगढ़ के 19500 किसान अवधिपार की श्रेणी में आ गये हैं। नागौर में 186 करोड़, भीलवाड़ा में 161 करोड़, टोंक में 70 करोड़, अलवर में 128 करोड़ और हनुमानगढ़ में 89 करोड़ रुपये की फसली ऋण वसूली बकाया है।

ऋण वसूली की अंतिम तिथि बढाये जाने को लेकर “मुखपत्र ” में प्रकाशित समाचार

वित्त विभाग के नकारात्मक रवैये से 5.58 लाख किसानों पर लटकी तलवार, किसानों को 200 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाना पड़ेगा

 

 

 

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