सहकारिता

वित्त विभाग के नकारात्मक रवैये से 5.58 लाख किसानों पर लटकी तलवार, किसानों को 200 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाना पड़ेगा

खरीफ ऋण वसूली की अंतिम तारीख बढाने की पत्रावली दो सप्ताह से वित्त विभाग के पास धूल फांक रही

जयपुर, 14 अप्रेल (मुखपत्र)। वित्त विभाग के नकारात्मक रवैये और सहकारिता मंत्रालय की कमजोर पैरवी के चलते, प्रदेश के 5 लाख 58 हजार किसान ब्याजमुक्त अल्पकालीन फसली ऋण योजना की सुविधा से वंचित हो गये हैं। राज्य सरकार की बजट घोषणा के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में खरीफ सीजन के लिए प्रदेश के 30 लाख किसानों को 12750 करोड़ रुपये से अधिक अल्पकालीन फसली ऋण वितरण किया गया था,

लेकिन ग्राम सेवा सहकारी समितियां (पैक्स) कर्मचारियों की अनिश्तिकालीन हड़ताल, जिसे कार्य बहिष्कार का नाम दिया गया है, के कारण वसूली ठप होने से 5 लाख 58 हजार किसान अवधिपार की श्रेणी मेें आ गये हैं और 2200 करोड़ रुपये का अधिक फसली ऋण फंस गया है। इससे लगभग 3 हजार ग्राम सेवा सहकारी समितियां के साथ-साथ करीब एक दर्जन जिला केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड (डीसीसीबी) की आर्थिक सेहत पर विपरीत प्रभाव पडऩा तय है। यदि ऋण वसूली की अंतिम तारीख नहीं बढती है, तो किसानों पर लगभग 200 करोड़ रुपये का भार पडऩा तय है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में ग्राम सेवा सहकारी समिति कार्मिकों की हड़ताल के साथ-साथ असमय हुई ओलावृष्टि और अतिवृष्टि के कारण, सहकारिता विभाग को ऋण वसूली के प्रभावित होने की आशंका थी। ऐसे में, सहकारिता विभाग की ओर से, ऋण वसूली की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 से बढाकर, 30 जून 2026 या ऋण वितरण की तिथि से एक वर्ष (जो भी पहले हो) किये जाने का आग्रह करते हुए एक प्रस्ताव 1 अप्रेल 2026 को वित्त विभाग को भेज दिया गया। इस प्रस्ताव में पूरी सूचनाएं एवं तथ्य अंकित किये गये, किस-किस जिले में, कितने किसानों से वसूली नहीं हो पायी है और कितनी ऋण राशि अटक गयी है।

14 दिन बाद भी निर्णय नहीं

सूत्र बताते हैं इसके बाद, वित्त विभाग द्वारा राजस्थान राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड (अपेक्स बैंक) और राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक लिमिटेड (आरएसएलडीबी) ने तीन-तीन बार, अवधिपार ऋण से संबंधित सूचनाएं प्राप्त की जा चुकी हैं, लेकिन सहकारी आंदोलन और सहकारी संस्थाएं के प्रति अडिय़ल रुख रखने वाले वित्त विभाग ने आज 14 दिन व्यतीत होने के बावजूद, फसली ऋण की वसूली की अंतिम तारीख आगे बढाये जाने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है।

मंत्री को नहीं मिल रही तवज्जो

सूत्र बताते हैं कि सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम दक को भी वित्त विभाग से खास तवज्जो नहीं मिल रही। ऋण वसूली की तारीख बढाये जाने को लेकर दक के प्रयास कारगर साबित नहीं हुए। मंत्रालय स्तर से कमजोर पैरवी के कारण, और ऋण वसूली की तारीख आगे नहीं बढऩे से, राज्य के 5 लाख 58 हजार किसान सहकारी साख संरचना के तहत ब्याजमुक्त अल्पकालीन फसली ऋण सुविधा से वंचित हो गये हैं। मुख्य रूप से 9 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों का 2200 करोड़ रुपया किसानों की ओर बकाया है। अब इन किसानों को भविष्य में ब्याजमुक्त ऋण सुविधा का लाभ तभी मिलेगा, जब ये 9 प्रतिशत ब्याज सहित बकाया राशि का चुकारा कर देंगे।

जोधपुर संभाग के बैंक अधिक प्रभावित

जोधपुर संभाग के 6 में से 4 केंद्रीय सहकारी बैंकों की स्थित अधिक खराब है। इनमें बाड़मेर, जोधपुर, जैसलमेर और पाली डीसीसीबी शामिल हैं। सीसीबी बाड़मेर के1 लाख 76 हजार किसान अवधिपार हुए हैं, जिनकी ओर 605 करोड़ रुपये का ऋण बकाया है। जोधपुर के 56 हजार किसान प्रभावित हुए हैं एवं 324 करोड़ रुपये फंस गये हैं। जैसलमेर के 21 हजार किसानों से ऋण वसूली नहीं की जा सकी, जिससे 146 करोड़ रुपये की वसूली अटक गयी है। पाली सीसीबी के 17500 किसानों की ओर 94 करोड़ रुपये की वसूली बकाया है।

इसी प्रकार, सीसीबी नागौर के 61 हजार किसान, भीलवाड़ा के 34 हजार किसान, टोंक के 21 हजार किसान, अलवर के 31500 किसान और हनुमानगढ़ के 19500 किसान अवधिपार की श्रेणी में आ गये हैं। नागौर में 186 करोड़, भीलवाड़ा में 161 करोड़, टोंक में 70 करोड़, अलवर में 128 करोड़ और हनुमानगढ़ में 89 करोड़ रुपये की फसली ऋण वसूली बकाया है।

वित्त विभाग का नेगेटिव रुख

राज्य सरकार की बजट घोषणा के बावजूद, वित्त विभाग सहकारी बैंकों के प्रति बहुत ही नेगेटिव भूमिका में है। वित्त विभाग, सहकारी बैंकों को ऋण माफी एवजी 765.57 करोड़ रुपये, अल्पकालीन फसली ऋण वसूली पेटे देय 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान पेटे 568.62 करोड़ रुपये और 0.8 प्रतिशत क्षतिपूर्ति ब्याज अनुदान के 181.18 करोड़ रुपये देने से भी आनाकानी कर रहा है। ब्याज अनुदान पेटे देय 4 प्रतिशत राशि में से 2 प्रतिशत राशि केंद्रीय सहकारी बैंकों द्वारा पैक्स को पास-ऑन की जाती है, जिससे पैक्स कार्मिकों के वेतन-भत्ते व अन्य खर्चों की भरपाई होती है।

सीएमओ से हस्तक्षेप की जरूरत

वित्त विभाग के नकारात्मक रवैये को देखते हुए यह उम्मीद कम ही है कि सहकारिता राज्यमंत्री गौतम दक, सहकारी बैंकों को गंभीर वित्तीय संकट से बचाने के लिए ठोस पैरवी कर पायेंगे। वे अपने अब तक के अढाई साल के कार्यकाल में ऋण माफी एवजी 765 करोड़ रुपये की राशि नहीं दिला पाये, जिसके चलते, आरबीआई के निर्देशानुसार, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को इस राशि का शत-प्रतिशत प्रावधान करना पड़ा। सहकारी बैंकों और किसानों को अब सीएमओ से ही उम्मीद की किरण नजर आ रही है। अल्पकालीन फसली ऋण की वसूली के लिए सीएमओ का हस्तक्षेप जरूरी हो गया है, क्योंकि सहकारिता राज्यमंत्री गौतम दक की वित्त विभाग वालों के समक्ष एक नहीं चल रही।

सीएमओ से हस्तक्षेप की मांग

 

सहकार नेता सूरजभान सिंह आमेरा

सहकार नेता सूरजभानसिंह आमेरा ने 5 लाख 58 हजार किसानों के अवधिपार की श्रेणी मेें आने और उनके ब्याजमुक्त अल्पकालीन फसली ऋण सुविधा से वंचित होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि 5 लाख 58 हजार किसानों पर 9 प्रतिशत ब्याज का अनावश्यक भार पड़ेगा, साथ ही, नाबार्ड से केंद्रीय सहकारी बैंकों को मिलने वाले पुनर्भरण में भी कमी आयेगी। ऋण वसूली पर मिलने वाला ब्याज अनुदान कम मिलने से पैक्स की आर्थिक स्थिति और बैंकों की लाभदेयता प्रभावित होगी। आमेरा ने इस मामले में सीएमओ से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।

 

 

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