प्रत्येक पैक्स कार्मिक को नियमित वेतन, पीएफ कटौती, पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ-परिलाभ दिलायेंगे – आमेरा
श्रीगंगानगर में जिला स्तरीय सम्मेलन का आयोजन, ग्राम सेवा सहकारी समिति कर्मचारियों ने एकजुट होकर किया सहकार नेता का भव्य अभिनंदन
श्रीगंगानगर , 9 जुलाई (मुखपत्र)। गंगानगर सहकारी समितियां कर्मचारी यूनियन के बैनर तले बुधवार को नई धानमंडी स्थित ट्रेडर्स एसोसिएशन के सभागार में ग्राम सेवा सहकारी समिति कर्मचारियों के सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में गंगानगर के साथ-साथ हनुमानगढ़ जिले के पैक्स व्यवस्थापक, सहायक व्यवस्थापक, सेल्समैन व सहायक कर्मचारी शामिल हुए। यूनियन के जिलाध्यक्ष प्रगटसिंह की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में पैक्स कार्मिकों के लिए नियमित वेतन व्यवस्था, कैडर, टैगिंग फ्री कृषि उर्वरक सहित अन्य मांगों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता सहकार नेता सूरजभानसिंह आमेरा (प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान सहकारी साख समितियां एम्प्लाइज यूनियन) ने कहा कि पैक्स के प्रत्येक कार्मिक, चाहे वो व्यवस्थापक हो, सहायक व्यवस्थापक हो, सेल्समैन या सहायक कर्मचारी, इन्हें नियमित रूप से मासिक वेतन दिलाने के साथ-साथ पीएफ में कटौती करवाकर, पेंशन की सुविधा दिलाने और सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्यूटी सहित समस्त लाभ-परिलाभ दिलाना उनके जीवन का सबसे बड़ा मकसद है। उन्होंने कहा कि राजस्थान सहकारी साख समितियां एम्प्लाइज यूनियन के बैनर तले पैक्स कार्मिकों को नियमितिकरण, प्रपत्र 6 में अंकित सुविधाएं (पे-ग्रेड इत्यादि) सहित अनेक मांगे पहले भी पूरी करवायी जा चुकी हैं और भविष्य में भी पैक्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा, सुरक्षित सेवा शर्तों, कैडर के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
बैंक चुका रहे इंकम टैक्स, व्यवस्थापक को वेतन नहीं
सहकार नेता ने प्रश्न उठाया कि यह कैसा त्रिस्तरीय सहकारी साख आंदोलन है, जिसमे सहकारी बैंक तो हर साल करोड़ों रुपये का आयकर भुगतान कर रही हैं जबकि उसी व्यवस्था का अभिन्न अंग पैक्स कर्मी वेतन भुगतान से जूझते हुए दो जून की रोटी से वंचित हो रहा है। यह हालात चिंताजनक है, जिस पर राज्य सरकार, सहकारिता विभाग और सहकारी बैंकों को चिंतन-मनन करना चाहिये और कैडर व्यवस्था से आर्थिक भागीदारी सुनिश्चित कर, पैक्स कर्मी के वेतन भुगतान की व्यवस्था तय करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्थापक पद की भारी कमी के चलते पैक्स को पूरी तरह सहायक व्यवस्थापक ही चला रहे हैं, सहायक व्यवस्थापक को सेवा अनुभव योग्यता के आधार पर नियमित कर उसका वेतनमान निर्धारित किया जाना चाहिए।
पूरी साख व्यवस्था का नेतृत्व
आमेरा ने स्वयं पर सहकारी बैंक कार्मिकों का नेता होने की टीका-टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सहकारी क्षेत्र में कोई एक व्यक्ति किसी एक संस्था यानी अपेक्स बैंक, केंद्रीय सहकारी बैंक या ग्राम सेवा सहकारी समिति के कर्मचारियों का नेता नहीं होता, बल्कि वह पूरी सहकारी साख व्यवस्था के तहत आने वाले समस्त संस्थाओं के कर्मचारियों का नेतृत्व करता है। पैक्स से लेकर अपेक्स बैंक तक, समस्त सहकारी साख संस्थाएं हैं और हमने सबके लिए संघर्ष किया है, जिसकी बदौतल पैक्स कर्मचारियों को कई सुविधाएं हासिल हुई हैं।
जुझारू एवं ईमानदार नेतृत्व से मिलती है सफलता
जिला यूनियन के जिला सचिव यादव वीरेंद्र यादव ने अपने संबोधन में अलग-अलग समय में अलग-अलग व्यक्तियों के नेतृत्व में जोरदार संघर्ष के बावजूद सफलता नहीं मिलने की चर्चा की, जिस पर आमेरा ने कहा कि वार्ता के टेबल से बहुत कुछ या कुछ न कुछ लेकर उठना ही जुझारू नेतृत्व की पहचान होती है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान वार्ता के टेबल पर अलग प्रकार का मैनोवैज्ञानिक संघर्ष होता है। सरकार के नुमाइंदे चाहते हैं कि कम से कम दिया जाये या कुछ नहीं देकर केवल आश्वासन से काम चलाया जाये, जबकि नेतृत्वकर्ता की कोशिश नेगोशिएबल टेबल-टॉक में अधिक से अधिक सुविधा प्राप्त करके उठने की होती है।
इसके लिए नेता के पास अनुभव के साथ-साथ साहस, ईमानदारी, कर्मठता एवं कर्तव्यनिष्ठा का होना बहुत जरूरी है। ऐसे समय में नेता का बेदाग होना भी बहुत मायने रखता है। यही कारण है कि सहकारी साख समितियां एम्प्लाइज यूनियन के बैनर तले हुए आंदोलन में हमेशा कुछ न कुछ हासिल किया जाता रहा है, लेकिन पिछले चार-पांच साल में नेतृत्व की कमजोरी के कारण प्रदेश के सहकारी समिति कर्मचारी खाली हाथ रहे हैं और स्वार्थी नेताओं द्वारा कर्मचारियों को गुमराह करके केवल उगाहियां की गयी हैं।
70 साल बाद भी वेतन के लिए संघर्ष
आमेरा ने कहा कि 1950 के दशक में जब ट्रेड यूनियन का आगाज हुआ था, तब मुख्य मांग वेतन की थी। उसके बाद समय-समय पर वर्किंग टाइम, सुरक्षित सेवा शर्तें एवं वेज-रिजीवन पर संघर्ष हुए और संगठनों की जीत हुई, लेकिन दुर्भाग्य है कि ट्रेड यूनियन की शुरूआत के 70 साल बाद भी राजस्थान के सहकारी क्षेत्र में पैक्स कर्मचारी नियमित वेतन के लिए तरस रहे हैं, काम के घंटे तय नहीं हैं, सुरक्षित सेवा शर्तों का अभाव है।
उन्होंने पैक्स कार्मिकों में एकजुटता एवं एकता पर जोर देते हुए कहा कि सहकारी साख समितियां एम्प्लाइज यूनियन हर मुद्दे को राज्य सरकार के समक्ष उठायेगी और हम इसमें निश्चित रूप से सफल होंगे, लेकिन इसके लिए सबका एक बैनर के तले एकजुट होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मेरे जीवन का मुख्य उद्देश्य पैक्स कार्मिकों के लिए नियमित वेतनमान की व्यवस्था करना, पीएफ की कटौती करवाना ताकि सेवानिवृत्ति पर पेंशन की सुविधा मिल सके, रिटायर्डमेंट पर ग्रेच्यूटी व अन्य लाभ-परिलाभ दिलाना है, लेकिन इसके लिए पैक्स कर्मचारियों को एकजुट होकर उनके हाथ मजबूत करने होंगे।
एकता से ही संघर्ष की जीत : जगदीपसिंह
सम्म्लेन के विशिष्ट अतिथि, पंजाब सहकारी सभाओं (समितियां) के प्रांतीय अध्यक्ष जगदीपसिंह ने एकजुटता का आह्वान करते हुए कहा कि एकता के बिना सरकार या प्रबंधन से कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र में सिर गिने जाते हैं, एकता और संघर्ष से ही सफलता मिलती है। संगठनों के संचालन और संघर्ष करने के लिये फंड की मुख्य भूमिका है। फंड के बिना न तो संगठनों का सफल संचालन संभव है, न ही सरकार से प्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से लड़ाई लड़ी जा सकती है।
जगदीपसिंह ने पंजाब में सहकारी सभाओं और इनके कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं, बिना टैंगिंग रासायनिक उर्वरक, वेतन व्यवस्था आदि पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सभाओं के लिए कृषि उर्वरक लाइसेंस की व्यवस्था समाप्त करवाने, कृषि विभाग का हस्तक्षेप समाप्त करवाने, सहकारी सभाओं के लिए यूरिया-डीएपी का 60 प्रतिशत कोटा रिजर्व करवाने और सेवानिवृत्ति आयु, जिसे सरकार ने 60 से घटाकर 58 साल कर दिया था, को पुन: 60 साल करवाने के लिए यूनियन द्वारा किये गये संघर्ष को रेखांकित किया।

जयपुर में पड़ाव डालेंगेे, खाली हाथ नहीं लौटेंगे
सम्मेलन को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष प्रगट सिंह ने समय पर मासिक वेतन नहीं मिलने, इफको-कृभको द्वारा उर्वरकों के साथ अन्य गैरजरूरी उत्पादों की जबरन टैगिंग करने, पैक्स कम्प्यूटरीकरण में सिस्टम इंटीग्रेटर टीम की मनमानी आदि बिन्दुओं की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि हमारी मुख्य मांग यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक पैक्स कार्मिक को हर माह वेतन समय पर वेतन मिलना, इफको-कृभको द्वारा डीएपी, यूरिया सहित सभी प्रकार के उर्वरकों की बिक्री ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम करना और टैगिंग बंद करवाना है।
उन्होंने गंगानगर जिले की इस मांग को लेकर इफको-कृभको के राज्य मुख्य प्रबंधकों से मिलकर समस्या के निराकरण का प्रयास करने के लिए सहकार नेता सूरजभानसिंह आमेरा का आभार व्यक्त किया, साथ ही घोषणा की कि जब तब इफको-कृभको द्वारा टैंगिंग व्यवस्था समाप्त नहीं की जाती, तब तक कोई भी ग्राम सेवा सहकारी समिति इन कम्पनियों से उर्वरक नहीं खरीदेगी।
इफको-कृभको की आलोचना
प्रगट सिंह ने इफको-कृभको की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की कि इन दोनों सहकारी उर्वरक संस्थाओं को पैक्स के पसीने से सींचा गया है, और आज ये कम्पनियां सहकारी संस्थाओं को ही दरकिनार करने में लगी हैं। उन्होंने कहा कि इफको-कृभको की असली मालिक सहकारी समितियां है। हम इनको मनमानी नहीं करने देंगे।
संघर्ष और नेतृत्व के लिए आमेरा को समर्थन
प्रगटसिंह ने पैक्स कार्मिकों के समर्थन में संघर्ष के लिए आमेरा को नेतृत्व के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि वे पैक्स कर्मियों के लिए जयपुर में संघर्ष की शुरूआत करते हैं, तो गंगानगर से उन्हें पूरा समर्थन मिलेगा। हम ट्रैक्टर-ट्रालियों पर राशन भरकर साथ लायेंगे और जयपुर में पड़ाव डाल देंगे। जब तक मांगों का पूर्ण निराकरण नहीं होता, तब तक घर लौट कर नहीं आयेंगे।
टेबल टॉक में विफलता, हमारी बड़ी कमी
जिला सचिव वीरेंद्र यादव ने भी सहकार नेता सूरजभानसिंह आमेरा की नेतृत्वक्षमता की प्रशंसा की और विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यदि आमेरा चाहें तो कोई ताकत, कोई सरकार, पैक्स कर्मचारियों की समस्याओं को हल होने से नहीं रोक सकती। यादव ने हाल के वर्षों में हुए संघर्षों की सुखद परिणति नहीं होने पर अफसोस जताते हुए कहा कि हम दो, तीन महीने तक संघर्ष करते हैं, लेकिन वार्ता के टेबल पर जाकर हार जाते हैं। इस हार को जीत में बदलने के लिए जुझारू नेतृत्व की आवश्यकता है।

एकता की कमी से आंदोलन विफल हुए
हनुमानगढ़ जिलाध्यक्ष रमेश ढाका ने पैक्स कर्मचारियों को आंदोलन के विफल होने का सबसे बड़ा कारण एकता में कमी को बताया। उन्होंने कहा कि हमारी आपसी फूट के कारण हम सफल नहीं हो पाये। ढाका ने हनुमानगढ़ जिले में पैक्स कम्प्यूटरीकरण में सिस्टम इंटीग्रेटर के तकनीकी कर्मचारियों की मनमानी का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे व्यवस्थापकों को उचित प्रशिक्षण नहीं दिया गया। आज भी अनेक व्यवस्थापक की-बोर्ड तक चलाना नहीं जानते, लेकिन सिस्टम इंटीग्रेटर के प्रतिनिधियों ने व्यवस्थापकों से हजारों रुपये की उगाही कर, उनके डेटा फीड कर दिये और पैक्स को ऑनलाइन घोषित कर दिया।
उन्होंने कहा कि इस बारे में जानकारी मिलने पर वे एकजुट होकर बैंक प्रबंधन से मिले और पर्याप्त संख्या में सिस्टम इंटीग्रेटर के कर्मचारी उपलब्ध कराने की मांग की, उसके बाद उगाही पर अंकुश लगा। ढाका ने कहा कि सहकारी कानून और संस्था के उपनियमों में ग्राम सेवा सहकारी समिति की प्रत्येक वर्ष 30 सितम्बर तक ऑडिट करवाने का प्रावधान है, लेकिन जयपुर से 30 जून तक ऑडिट नहीं करवाने पर एफआईआर करवाने की धमकी भरे निर्देश जारी किये जाते हैं, ये केवल इसलिए कि हमारे में एकता नहीं है। हम एकजुट होंगे, तो कोई ताकत अनावश्यक रूप से हमें दबा नहीं सकेगी।

इन्होंने ने भी संबोधित किया
सम्मेलन को सहकारी साख समितियां एम्प्लाइज यूनियन के सवाईमाधोपुर जिलाध्यक्ष शेरसिंह राजपूत, जयपुर जिलाध्यक्ष शंकरसिंह नरूका व जिला सचिव सोहनलाल शर्मा, अजमेर जिला सचिव गणेश शर्मा, व्यवस्थापक दिनेश सहारण व गुरमीतसिंह आदि ने संबोधित करते हुए व्यवस्थापकों की समस्याओं पर चर्चा की। इस दौरान पंजाब यूनियन के प्रेस प्रवक्ता जगमीतसिंह भी मंचस्थ रहे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए जिला सचिव राजकुमार वर्मा ने व्यवस्थापकों से एकजुट करने की अपील की। सम्मेलन में निवर्तमान जिलाध्यक्ष जसविंद्रसिंह बराड़ और जसवंत पचार सहित गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक की समस्त 22 शाखाओं से बड़ी संख्या में व्यवस्थापक, सहायक व्यवस्थापक, सेल्समैन आदि शामिल हुए।
पैक्स कर्मियों ने किया भव्य स्वागत
इससे पूर्व कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर जिला यूनियन और व्यवस्थापकों द्वारा अतिथियों का साफा पहनाकर एवं माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। सहकार गौरव/मुखपत्र के सम्पादक मनीष मुंजाल का सहकारी क्षेत्र में पोजिटिव पत्रकारिता एवं व्यापक कवरेज के लिए माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।
अधिकारियों का प्रदर्शन तय करेगा कि वे पुरस्कार के हकदार हैं या दंड के भागीदार : डॉ. समित शर्मा

