सहकारिता

अजमेर डेयरी अध्यक्ष के RCDF एमडी श्रुति भारद्वाज पर गंभीर आरोप, पुनर्नियुक्ति और सेवा विस्तार रोकने की मांग

जयपुर/अजमेर, 12 सितंबर। राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) की प्रबंध संचालक श्रुती भारद्वाज के खिलाफ अजमेर सरस डेयरी के अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी ने मोर्चा खोल दिया है। रामचन्द्र चौधरी ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और वित्त सचिव को लिखे एक पत्र में आरसीडीएफ एमडी पर प्रशासनिक विफलता, वित्तीय अनियमितता, पशुपालकों के हितों के विरुद्ध काम करने, सरस ब्रांड का डूबोने, सरस के उत्पादों की गुणवत्ता को गिराने, पसंदीदा नोन-टेक्नोक्रेट्स को डेयरी संघों में एमडी बनाने और तानाशाही व्यवहार जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। चौधरी ने सरकार से मांग की है कि वर्तमान एमडी को किसी भी परिस्थिति में सेवा विस्तार न दिया जाए, अन्यथा ‘सरस’ ब्रांड और प्रदेश के लाखों पशुपालक पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।

अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड, अजमेर के अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी द्वारा लिखे गए पत्र में एमडी पर लगाए गए 11 गंभीर आरोप इस प्रकार हैं:-

1. पशु आहार के दामों में विसंगति : भारत सरकार द्वारा पशु आहार के कच्चे माल एवं जीएसटी की दरों में कटौती करने के कारण पूरे देश में इसके दाम कम हुए हैं। किंतु, राजस्थान में एमडी की कुनीतियों के कारण पशु आहार के भाव ऐतिहासिक रूप से सर्वोच्च स्तर पर हैं, जो सीधे तौर पर गरीब पशुपालकों का आर्थिक शोषण है।

2. ठेकेदारों से मिलीभगत और अपारदर्शिता : पशु आहार का वितरण कभी नियमित नहीं रहा। कच्चा माल सप्लाई करने वाले ठेकेदारों के साथ मिलकर की गई खरीद प्रक्रिया में घोर अपारदर्शिता और सांठगांठ स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

3. कृत्रिम लाभ दिखाकर एफडी बनाना : पशुपालकों का शोषण करके पशु आहार के उत्पादन से प्राप्त अनुचित लाभ को आरसीडीएफ के खाते में फिक्स डिपॉजिट (एफडी) के रूप में जमा कर एमडी द्वारा अपनी झूठी वाहवाही लूटी जा रही है।

4. प्रतिस्पर्धी संस्थाओं को अनुचित लाभ व चहेतों की नियुक्ति : एमडी के कार्यकाल में राजस्थान में अमूल एवं मदर डेयरी का जबरदस्त विस्तार हुआ है, जबकि सरस का संकलन और विपणन विगत वर्षों की तुलना में भारी गिरावट का शिकार है। जिला दुग्ध संघों में योग्य टेक्नोक्रेट की जगह पसंदीदा बाबुओं को एमडी लगाकर संस्था को अपनी आय का साधन बना लिया है।

5. दिल्ली विपणन व्यवस्था में पूर्ण विफलता : दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण बाजार में सरस दुग्ध उत्पादों के विपणन में रत्तीभर भी वृद्धि नहीं हुई है। उलटा, राजस्थान में अमूल और मदर डेयरी के प्लांट लग रहे हैं, जो सरस ब्रांड के साथ घोर अन्याय है।

6. 3000 पद खाली और प्रशासनिक लापरवाही : वर्तमान में आरसीडीएफ और विभिन्न जिला संघों में लगभग 3000 पद खाली पड़े हैं। एक भी नए कर्मचारी की भर्ती नहीं की गई है, और मात्र 20 प्रतिशत स्थायी कर्मचारियों के भरोसे पूरा काम घसीटा जा रहा है।

7. गुणवत्ता में भारी अवनति : भारी मात्रा में रिक्त पदों और प्रशासनिक लापरवाही के चलते सरस के दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है। यह स्थिति ब्रांड को पूर्ण अवनति की ओर ले जा रही है।

8. बजट आवंटन में खुला पक्षपात : विभिन्न जिला संघों के बीच बजट आवंटन में जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण पक्षपात किया गया है।

9. लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हनन : आरसीडीएफ संचालक मंडल के चुनाव नहीं करवाए गए हैं, और एमडी स्वयं ही प्रशासक एवं प्रबन्ध संचालक बनकर तानाशाही रवैये से काबिज हैं।

10. अध्यक्षों का अपमान और एजीएम नहीं बुलाना : विभिन्न जिला संघों के निर्वाचित अध्यक्षों द्वारा लिखित नोटिस देने के बावजूद वार्षिक आमसभा (एजीएम) की एक भी बैठक नहीं बुलाई गई। उलटा, जिला संघों के अध्यक्षों के साथ अप्रजातांत्रिक और अपमानजनक व्यवहार किया जाता है।

11. जन-कल्याणकारी योजनाओं में विफलता : ‘मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना’ की 5 रुपये प्रति लीटर अनुदान राशि दुग्ध उत्पादकों को कभी समय पर नहीं दी गई। इसी प्रकार, मिड-डे मील की करोड़ों रुपए की राशि का भुगतान भी पिछले एक वर्ष से लंबित पड़ा हुआ है।

अजमेर डेयरी अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी ने राज्य सरकार से कड़े शब्दों में आग्रह किया है कि इन 11 गंभीर अनियमितताओं और मनमानी को देखते हुए, आरसीडीएफ को पूर्ण रूप से गर्त में जाने से बचाने के लिए एमडी श्रुती भारद्वाज को किसी भी सूरत में सेवा विस्तार न दिया जाए।

 

 

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