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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पारदर्शिता के लिए नए दिशा-निर्देश जारी

– अब जांच के उपरांत ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की पॉलिसियों का अनुमोदन किया जा सकेगा

– नए निर्देश खरीफ 2026 से लागू

– गलत अनुमोदित पॉलिसियों को रिवर्ट करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी


जयपुर, 10 अगस्त (मुखपत्र)। कृषि आयुक्तालय, राजस्थान द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) में पारदर्शिता को बढ़ाने, विवादों को कम करने तथा किसानों के हितों की रक्षार्थ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशजारी किए गए हैं। कृषि आयुक्त नरेशकुमार गोयल ने सोमवार को फसल बीमा पॉलिसियों के अनुमोदन से पहले सत्यापन सुनिश्चित करने हेतु नए दिशा-निर्देश जारी किए। ये निर्देश खरीफ 2026 से लागू होंगे।


कृषि आयुक्तद्वारा जारी आदेश में कृषि आयुक्तालय के पूर्व पत्र (दिनांक 04.12.2025) के क्रम में पुन: स्पष्ट किया गया है कि सभी गैर-ऋणी किसानों की फसल बीमा पॉलिसियों का सत्यापन निर्धारित निर्देशों के अनुसार ही किया जाएगा। यह पूर्ण उत्तरदायित्व संबंधित अधिसूचित बीमा कंपनी का होगा।


आदेश में उल्लेेख किया गया है कि ऋणी किसानों की पॉलिसी सृजित करते समय किसानों की सहमति नहीं लेने तथा वास्तविक बोई गई फसल का बीमित फसल से मिलान न होने के कारण क्लेम भुगतान के समय विवाद उत्पन्न होते हैं। इसका समाधान पॉलिसी अनुमोदन के समय ही फसल का सत्यापन करके किया जाना आवश्यक है।

मुख्य दिशा-निर्देश

– परिचालन मार्गदर्शिका 2023 के प्रावधानों के अनुसार इंश्योरेबल इंटरेस्ट का सत्यापन बीमा कंपनी का दायित्व होगा। किसान के आवेदन, बोई गई फसल का मिलान तथा भूमि रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद ही पॉलिसी का अनुमोदन किया जाएगा।

– वास्तविक बोई गई फसल व बीमित फसल के मिलान के लिए भौतिक सत्यापन, क्रॉप हेल्थ मॉनिटरिंग सर्वे तथा तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यदि किसी फसल का बीमित क्षेत्र औसत बुवाई क्षेत्र से अधिक पाया जाता है, तो अनिवार्य रूप से संबंधित पॉलिसियों की जांच की जाएगी। पालन न करने पर राज्य प्रीमियम अंश का भुगतान रोके जाने की चेतावनी दी गई है।

– ऐसी स्थिति में जिला कलेक्टर एवं संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) के समन्वय से ई-गिरदावरी/डीसीएस सर्वे रिपोर्ट प्राप्त कर मिलान किया जाएगा।

– बीमा कंपनी की मांग पर जिला स्तर पर संबंधित अधिकारी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए उत्तरदायी होंगे।

– अनुमोदन की निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। देरी की स्थिति में ऑटो-अनुमोदन रोकने का अनुरोध किया जा सकता है। गलत अनुमोदित पॉलिसियों को जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रिवर्ट करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

– गलत पॉलिसी अनुमोदन से उत्पन्न किसी भी वित्तीय या अन्य भार का पूर्ण उत्तरदायित्व संबंधित बीमा कंपनी का होगा।

नये निर्देशों से फसल बीमा में पारदर्शिता बढ़ेगी

आदेश में सभी संबंधित बीमा कंपनियों तथा जिला स्तरीय अधिकारियों को इन निर्देशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। फसल बीमा पॉलिसियों के अनुमोदन/निरस्त की रिपोर्ट जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। गोयल के अनुसार, इन निर्देशों का उद्देश्य फसल बीमा योजना में पारदर्शिता बढ़ाना, विवादों को कम करना तथा किसानों के हितों की रक्षा करना है।

 

 

 

 

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