सहकारिता की जोनल रिव्यू कॉन्फ्रेंस 8-9 जनवरी को उदयपुर में, 12 सत्रों में सहकारी क्षेत्र पर मंथन होगा
सहकारिता मंत्रालय के अधिकारी, सभी राज्यों के सहकारिता सचिव एवं रजिस्ट्रार शामिल होंगे
जयपुर, 6 जनवरी (मुखपत्र) । सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 8 एवं 9 जनवरी को उदयपुर में दो दिवसीय जोनल रिव्यू कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र में केंद्र एवं राज्यों द्वारा संचालित विभिन्न पहलों की प्रगति की समीक्षा करना तथा भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श करना है।
कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव डॉ. आशीषकुमार भूटानी संबोधित करेंगे जबकि, राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास वीसी के माध्यम से उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। इस अवसर पर सहकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव (सीटीपी प्रभाग) द्वारा विषय पर ओवरव्यू प्रस्तुतीकरण दिया जाएगा तथा सहकारिता विभाग, राजस्थान की शासन सचिव द्वारा स्वागत उद्बोधन होगा।
दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में 12 सत्र होंगे
सहकारिता विभाग की शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां श्रीमती आनन्दी ने बताया कि कॉन्फ्रेंस के दौरान विभिन्न विषयों पर आधारित कुल 12 सत्र होंगे। सहकारिता मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही देश के सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों से सहकारिता विभाग के सचिव एवं रजिस्ट्रार इस कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे। समापन सत्र के बाद 9 जनवरी को प्रतिभागियों द्वारा राजसमन्द एवं उदयपुर जिले में सहकारी संस्थाओं एवं एफपीओ का भ्रमण किया जाना प्रस्तावित है।
कोऑपरेटिव बैंकिंग पर होगी चर्चा
शासन सचिव ने बताया कि कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रथम दिन आयोजित सत्रों में पैक्स, एआरडीबी एवं आरसीएस कार्यालयों के कम्प्यूटराइजेशन, नवीन एम-पैक्स डेयरी समितियों एवं मत्स्य समितियों के गठन, विश्व के सबसे बड़े अन्न भंडारण प्रोजेक्ट तथा पैक्स द्वारा दी जा रही अतिरिक्त सेवाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। सहकारी बैंकिंग को सशक्त बनाने के लिए एनयूसीएफडीसी, सहकार सारथी, आधार सीडिंग, डिजिटल भुगतान, डोर-स्टेप बैंकिंग, नई शाखाओं के विस्तार एवं आधुनिक बैंकिंग सेवाओं पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर गठित तीन बहुराज्यीय समितियों बीबीएसएसएल, एनसीओएल एवं एनसीईएल की सदस्यता तथा श्वेत क्रांति 2.0 की प्रगति पर भी विचार किया जाएगा।
एनसीडी व एमएससीएस पर होगा संवाद
श्रीमती आनन्दी ने बताया कि कॉन्फ्रेंस के एक महत्वपूर्ण सत्र में राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD) के सुदृढ़ीकरण एवं बहु-राज्य सहकारी समितियों (MSCS) से संबंधित सुधारों पर संवाद आयोजित किया जाएगा, जिसमें राज्यों के अनुभव साझा किए जाएंगे तथा नीतिगत एवं प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। कॉन्फ्रेंस में सहकारी बैंकों के व्यवसाय विविधीकरण, कृषि एवं गैर-कृषि ऋण संतुलन, जमीनी स्तर पर ऋण प्रवाह बढ़ाने के उपायों तथा नियामक एवं पर्यवेक्षण अपेक्षाओं पर भी विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा।
नेतृत्व एवं सुशासन पर मंथन होगा
नेतृत्व एवं सुशासन की भूमिका पर आधारित एक सत्र में सहकारिता क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, सहकारी सुधार एजेंडा तथा महिलाओं, युवाओं एवं वंचित वर्गों की भागीदारी पर विशेष रूप से फोकस करते हुए चर्चा की जाएगी। इसके अतिरिक्त, एक सत्र में सहकारिता में सहकार विषय पर चर्चा होगी, जिसमें स्वयं सहायता समूहों एवं किसान उत्पादक संगठनों का पैक्स से एकीकरण, माइक्रो एटीएम, रूपे क्रेडिट कार्ड वितरण एवं सदस्यता अभियान आदि पर विस्तार से मंथन होगा।
एक सत्र में पैक्स पर होगी चर्चा
शासन सचिव ने बताया कि कॉंन्फ्रेंस के दूसरे दिन ‘सहकार से समृद्धि-पैक्स अहैड’ विषय पर आयोजित सत्र में पैक्स के पुनरुद्धार, कैशलेस पैक्स, स्टार्टअप इकोसिस्टम, मॉडल सहकारी गांव, जिला-विशिष्ट व्यवसाय योजनाएं तथा आधुनिक भंडारण एवं सप्लाई चेन एकीकरण जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। पूर्वोत्तर क्षेत्र में सहकारिताओं के विकास विषय पर केंद्रित एक सत्र में वहां की चुनौतियों, बेस्ट प्रेक्टिसेज एवं वित्तीय स्थिरता के उपायों पर चर्चा की जाएगी। कॉन्फ्रेंस के एक सत्र में सफल सहकारी संस्थाओं के संबंध में ‘सहकार संवाद’ आयोजित कर नवाचार, सफलता की कहानियों एवं समस्या-समाधान के अनुभव साझा किए जाएंगे।
आईवाईसी-2025 के प्रमुख निष्कर्षों पर डिस्कशन
कॉन्फ्रेंस के एक सत्र में अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के प्रमुख निष्कर्षों तथा मीडिया एवं संचार रणनीति पर भी चर्चा होगी। उम्मीद है कि यह सम्मेलन सहकारिता क्षेत्र को सुदृढ़, समावेशी एवं भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। (Photo – vecteezy.com)
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