राष्ट्रीय सहकार मसाला मेला : एंब्रॉयडरी वर्क वाले सूट और जूट के बैग बने महिलाओं की पहली पसंद
लाख की अनब्रेकेबल चूडिय़ां, जूट के खिलौने व सजावटी आइटम भी उपलब्ध
महिला सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए उपयोगी प्लेटफार्म सिद्ध हो रहा है राष्ट्रीय सहकार मसाला मेला
जयपुर, 22 अप्रेल (मुखपत्र)। जयपुर, 22 अप्रेल (मुखपत्र)। सहकारिता विभाग और राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (कॉनफैड) की ओर से जवाहर कला केंद्र, जयपुर के दक्षिण परिसर मेें आयोजित किया जा रहा दस दिवसीय राष्ट्रीय सहकार मसाला मेला अपनी आधी से अधिक यात्रा पूर्ण कर चुका है। यह मेला महिला सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए अत्यंत उपयोगी प्लेटफार्म सिद्ध हो रहा है, साथ ही महिलाओं के लिए रुचिकर उत्पादों की प्रचूर उपलब्धता के कारण मेला महिलाओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
सहकारिता विभाग और राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (कॉनफैड) की ओर से आयेजित इस मेले में महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महिला सहकारी समितियां और स्वयं सहायता समूहों का व्यापक स्थान उपलब्ध कराया गया है। महिला सहकारी समितियां और स्वयं सहायता समूहों द्वारा परम्परागत नमकीन और अन्य किचन प्रोडक्ट्स के साथ-साथ महिलाओं के रुचिकर अनेक अन्य उत्पादों की विशाल रेंज उपलब्ध करायी गयी है।
महिलाओं द्वारा संचालित इन स्टॉल्स पर साडिय़ां, स्टिच्ड सूट्स, प्लाजो, पेंट सूट, टॉप, एंब्रॉयडरी वर्क वाले सूट, हैंडबैग, जूट के बैग, जूट के सजावटी आईटम, लाख की चूडिय़ां, जूतियां, सेंडल, रसोईघर के लिए उपयोगी बर्तन, औजार आदि उपलब्ध हैं। महिला सहकारी समितियों को मुख्य डोम में स्थान दिया गया है, जहां उन्होंने प्रदर्शन एवं बिक्री के अपने उत्पादों को डिसप्ले कर रखा है, जबकि स्वयं सहायता समूहों के लिए अलग से स्थान आवंटित है। यहां पर 40 से अधिक स्वयं सहायता समूह अपने उत्पादों के साथ महिला सशक्तीकरण की पटकथा लिख रही हैं।
मुख्य डोम में हमारी मुलाकात महिला एंटरप्रेन्योर ऊषा जैन से होती है। वे जयपुर में ही महिला हैंडीक्रॉफ्ट सहकारी समिति चलाती हैं।

सहकार मसाला मेला में वे हैंड एम्ब्रॉयडरी, मशीन एम्ब्रॉयडरी, कोटा डोरिया, गोटा-पत्ती और हैंड ब्लॉक वर्क के साथ लेडीज सूट्स, साड़ी की विशाल रेंज लेकर आयी हैं। वे महिलाओं की पंसद के अनुरूप वस्त्रों पर डिजाइन करने की सेवाएं भी देती हैं, साथ ही, बी-टू-बी बिजनेस में भी डील करती हैं।
मेले में एसएचजी के लिए विशेष स्थान आवंटित हैं, जहां पर हमें, मेलों के माध्यम से अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए सतत सक्रिय रहने वाली ममता गौतम मिली। वे जूट के आईटम बनाती और बेचती हैं। जयश्रीश्याम एसएचजी का संचालन करने वाली ममता, राजस्थान के हर सरकारी मेले में भागीदारी करती हैं।

राजस्थान की राजधानी के बाद अब वे देश की राजधानी दिल्ली में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने को तैयार हैं। उनके पास जूट से बने खिलौने, बेबी डॉल, राधा-कृष्ण, वॉल हैंगिंग आईटम, पक्षियों के घौंसले सहित कई सजावटी और यूनीक आइटम हैं। वे जूट से बने बैग, हैंडबैग और बोटल बैग भी बनाती-बेचती हैं।
इन विशेष डोम में महालक्ष्मी एसएचजी, वाणी एसएचजी, मदीना एसएचजी और कई अन्य स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित महिलाओं से मुलाकात होती हैं, जो मुख्य रूप से महिला परिधानों पर आधारित कारोबार कर रही हैं। इनके पास कॉटन सूट, थ्री-पीस पेंट सूट, प्लाजो सूट, टॉप, कोट-पैंट सूट, फ्रॉक, टॉप, बैडशीट्स और जूट के बैग उपलब्ध हैं। कॉटन के सूट्स की बेहतर वैरायटी बहुत कम दाम पर मिल रही है। जूट के बैग का मूल्य मात्र 50 रुपये से शुरू हो जाता है।
यहीं पर महिला जीवन ज्योति बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति पर लाख की आकर्षक चूडिय़ां उपलब्ध हैं। अनाबिया एसएचजी पर ठंडे लाख से निर्मित अब्रेकेबल चूडिय़ां भी खूब पंसद की जा रही हैं।
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