सहकारिता के शीशमहल में चुंडावत की ताजपोशी
जयपुर, 2 जनवरी (मुखपत्र)। राज्य सरकार ने मंगलवार को एक आदेश जारी कर, दो शीर्ष सहकारी संस्थाओं के मुखिया की अदली-बदली कर दी, साथ ही, लम्बे समय के उपरांत मुख्यमंत्री के गृहक्षेत्र स्थित भरतपुर केंद्रीय सहकारी बैंक में पूर्णकालिक प्रबंध निदेशक लगा दिया। इस आदेश ने सहकार गौरव के समाचार पर मुहर लगा दी। सहकारिता विभाग के संयुक्त शासन सचिव प्रहलादराय नागा की ओर से जारी आदेशानुसार, एडिशनल रजिस्ट्रार आर.एस. चुंडावत को राजस्थान राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड (अपेक्स बैंक) जयपुर में प्रबंध निदेशक लगाया गया है।
शांत, सौम्य एवं मिलनसार अधिकारी चुंडावत अब तक राजस्थान शिक्षा एवं प्रबंध संस्थान (राइसेम) में निदेशक पद पर कार्यरत थे। अपेक्स बैंक को सहकारिता का शीशमहल भी कहा जाता है। अपेक्स बैंक के प्रबंध निदेशक संजय पाठक को चुंडावत के स्थान पर राइसेम में डायरेक्टर पद पर लगाया गया है। वे राजस्थान सहकारी भर्ती बोर्ड के पदेन सचिव भी होंगे। पाठक, अगस्त 2026 में राजकीय सेवा से सेवानिवृत्त होंगे।
इसी आदेश में उप रजिस्ट्रार नरेश शुक्ला को भरतपुर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक में प्रबंध निदेशक के पद पर स्थानांतरित किया गया है। वे अभी तक हनुमानगढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक में प्रबंध निदेशक के पद पर कार्यरत थे। हनुमानगढ़ बैंक में अधिशासी अधिकारी का पद लंबे समय से रिक्त है। भरतपुर राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृहक्षेत्र हैं। नरेश शुक्ला के रूप में भरतपुर सीसीबी को पिछले पांच साल में 15वां प्रबंध निदेशक मिला है, हालांकि शुक्ला का कार्यकाल भी लम्बा नहीं रहने वाला। वे 30 जून, 2026 को राजकीय सेवा से सेवानिवृत्त हो जायेंगे।
इस संक्षिप्त स्थानांतरण सूची के उपरांत, हनुमानगढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक लि. और बाड़मेर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लि. पूर्णकालिक प्रबंध निदेशक की सेवाओं से वंचित हैं।
‘सहकार गौरव’ के समाचार की पुष्टि
‘सहकार गौरव’ द्वारा 11 दिसम्बर 2025 को ही यह बता दिया गया कि अपेक्स बैंक के प्रबंध निदेशक और डायरेक्टर, राइसेम की अदला-बदली की जायेगी और भरतपुर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक को पूर्णकालिक प्रबंध निदेशक मिलेगा। प्रधान कार्यालय में एडिशनल रजिस्ट्रार-वन के पद पर एक कर्मठ महिला अधिकारी को लगाया जाना फिलहाल लम्बित रखा गया है। वे निवर्तमान रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां मंजू राजपाल की पंसद थी, हालांकि, उससे अधिक, मंत्री के टारगेट पर होने के कारण, उन्हें खंड से निकालकर, प्रधान कार्यालय भेजा जाना था। फिलहाल एक बड़े आयोजन के दृष्टिगत उन्हेें अभयदान मिल गया प्रतीत होता है।
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