दिव्यांगता प्रमाणपत्र में गड़बड़ी, राणावत अपेक्स बैंक की सेवा से बर्खास्त
जयपुर, 17 मार्च (मुखपत्र)। राजस्थान के शीर्ष सहकारी बैंक – राजस्थान राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड (अपेक्स बैंक) ने अपने एक प्रबंधक विजेंद्र सिंह राणावत को बैंक सेवा से बर्खास्त कर दिया है। चित्तौडग़ढ़ के मूल निवासी राणावत का दृष्टि दिव्यांगता प्रमाणपत्र सही नहीं पाया गया। अपेक्स बैंक ने दृष्टि दिव्यांगता की जांच के उपरांत, तय मानकों से कम दिव्यांगता पाये जाने पर राणावत को बर्खास्त कर दिया और उसके खिलाफ फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर, बैंक की नौकरी प्राप्त करने के मामले में बजाज नगर थाना, जयपुर में प्राथमिकी भी दर्ज करायी गयी है। अपेक्स बैंक के प्रबंध निदेशक आरएस चूंडावत ने राणावत को बैंक सेवा से टर्मिनेट किये जाने और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराये जाने की पुष्टि की है।
जानकारी के अनुसार, विजेंद्र सिंह राणावत पुत्र रघुवीरसिंह राणावत, मूल रूप से चित्तौडग़ढ़ शहर का निवासी है। राजस्थान सहकारी भर्ती बोर्ड द्वारा 2025 में आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत उसने दिव्यांग कोटे में 21 जुलाई 2025 को प्रबंधक पद पर ज्वाइनिंग दी थी। तब उसने, चित्तौडग़ढ़ सीएमएचओ द्वारा तैयार 42 प्रतिशत दृष्टि दिव्यांगता का प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था।
फर्जी परीक्षार्थियों और विभिन्न प्रकार के फर्जी प्रमाणपत्रों से सरकारी नौकरी प्राप्त करने के विभिन्न विभागों के मामले समाचार पत्रों की सुर्खियों में होने के बावजूद तत्कालिन बैंक प्रबंधन द्वारा तत्समय दिव्यांगता प्रमाणपत्र की जांच करवाये बिना ही राणावत को ज्वाइनिंग दे दी गयी। साथ ही, तत्कालिन बैंक प्रबंधन द्वारा पूरी उदारता बरतते हुए, 14 अगस्त 2025 को राणावत को पहली ही पोस्टिंग उसके गृह क्षेत्र के पास, अपेक्स बैंक के उदयपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में दी गयी।
दृष्टिबाधिता की जांच करवायी
इसके कुछ समय उपरांत बैंक प्रबंधन को विजेंद्रसिंह राणावत के दिव्यांगता प्रमाणपत्र की जांच की आवश्यकता महसूस हुई। बैंक ने सवाईमानसिंह हॉस्पिटल को दृष्टिबाधिता की जांच के लिये निवेदन किया। एसएमएस होस्पिटल द्वारा संभागीय स्तर के सरकारी होस्टिपटल से जांच करवाने के लिए कहा गया। तब, उदयपुर के ही महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय में राणावत की दृष्टिबाधिता (दिव्यांगता) की जांच करवायी गयी, जो 30 प्रतिशत आयी, जबकि सरकारी नियमानुसार 40 प्रतिशत या इससे अधिक दृष्टिबाधिता होने पर ही दिव्यांग कोटे का लाभ मिल सकता है।
वसूली की कार्यवाही शुरू
नई परिस्थितियों में बैंक प्रबंधन ने कानूनी परामर्श के उपरांत 9 फरवरी 2026 को एक आदेश जारी कर, विजेंद्र सिंह राणावत को बैंक सेवा से पृथक कर दिया। उसके खिलाफ बजाजनगर थाना में एफआईआर दर्ज करायी गयी। बैंक प्रबंधन ने बॉन्ड की शर्तों के अनुरूप, राणावत द्वारा अब तक उठाये गये वेतन-भत्तों की वसूली की कार्यवाही भी शुरू कर दी है। राणावत ने बैंक प्रबंधन के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
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