राष्ट्रीयसहकारिता

तीन दिन बाद ढह जाएगा सहकारी ऋण ढांचा, घाटे में रहेंगे सभी केंद्रीय सहकारी बैंक!

जयपुर, 28 मार्च (मुखपत्र)। वित्त वर्ष का अंतिम सप्ताह आरम्भ होते ही राजस्थान के बैंकिंग सहकारिता क्षेत्र में बेचैनी बढ़ गयी है। बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों को यह चिंता खाये जा रही है कि यदि तीन दिन में राज्य सरकार ने ऋण माफी के विलम्ब से भुगतान पेटे बकाया 767 करोड़ रुपये जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCB) को नहीं दिये तो, प्रदेश का सहकारी अल्पकालीन साख संरचना का ढांचा ध्वस्त हो जायेगा।

राज्य सरकार ने बजट भाषण में इस साल 35 लाख किसानों को 25000 करोड़ रुपये अल्पकालीन फसली ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की है, जिसके लिए व्यापक ब्याज अनुदान का भी प्रावधान किया गया है। लेकिन सरकार ने बजट में, केंद्रीय सहकारी बैंकों को ऋण माफी योजना के एजव में चुकाये जाने योग्य 767 करोड़ रुपये का प्रावधान नहीं किया जबकि भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले साल दिसम्बर माह में ही राज्य सरकार को, सहकारी बैंकों को, स्पष्ट रूप से चेता दिया था कि जो राशि, केंद्रीय सहकारी बैंकों द्वारा अपनी बैलेंस शीट में जो राशि ‘राज्य सरकार से प्राप्य’ मद में दर्शायी जा रही है, यदि वह राशि 31 मार्च 2025 तक बैंकों को फिजिकली प्राप्त नहीं होती है, तो इसका शत-प्रतिशत प्रावधान करना होगा।

इस प्रावधान का सीधा सा अर्थ है कि चालू वित्त वर्ष की समाप्ति के अंतिम तीन दिन में राज्य सरकार ने ऋण माफी की देरी पर दिये जाने वाले ब्याज के रूप में केंद्रीय सहकारी बैंकों को 767 करोड़ रुपये की राशि नहीं चुकायी, तो प्रदेश के समस्त सीसीबी को इस राशि का प्रावधान करना होगा, जिससे राज्य के समस्त 29 सीसीबी घाटे में आ जायेंगे और अधिकांश आरबीआई द्वारा निर्धारित 9 प्रतिशत सीआरएआर का स्तर कायम नहीं रख पायेंगे।

सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल की अध्यक्षता में हाल ही में आयोजित केंद्रीय सहकारी बैंकों की समीक्षा बैठक में भी इस विषय पर चिंतन हुआ था।

सहकार नेता ने सरकार को चिंता से अवगत कराया

इस मामले में सहकार नेता सूरजभान सिंह आमेरा ने राज्य के मुख्य सचिव एवं वित्त विभाग को पत्र प्रेषित कर, केंद्रीय सहकारी बैंकों की चिंता से अवगत कराते हुए 31 मार्च 2025 से पूर्व, सम्पूर्ण 767 करोड़ रुपये की राशि का केंद्रीय सहकारी बैंकों को भुगतान किये जाने की मांग की है।

ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक एम्पलाइज यूनियन और ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव की ओर से प्रेषित पत्रानुसार, राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 में की गई ऋण माफी की एवज मे केन्द्रीय सहकारी बैंकों को राज्य सरकार से प्राप्य बकाया भुगतान राशि 767 करोड़ रुपये का भारतीय रिजर्व बैंक के जारी निर्देशानुसार शत-प्रतिशत प्रोविजन करने से बैंकों की सीआरएआर एवं लाभदेयता प्रभावित होगी। कमजोर आर्थिक स्थिति से सीसीबी के बैंकिंग लाइसेंस पर संकट आने की आशंका है। इस संकट से बैंकों को उबारने के लिए राज्य सरकार द्वारा 767 करोड़ रुपये की बकाया राशि का अविलम्ब बैंकों को भुगतान किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

आमेरा ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 में सहकारी बैंकों के ऋणी सदस्यों के लिए लगातार दो बार ऋण माफी लागू की गई थी। उक्त ऋण माफी के पेटे केन्द्रीय सहकारी बैंकों को राज्य सरकार द्वारा मूल राशि में विलम्ब भुगतान पर 8 प्रतिशत की दर से ब्याज भुगतान की घोषणा भी की गई थी। राज्य सरकार द्वारा ऋण माफी का पूर्ण भुगतान सहकारी बैंकों को वर्ष 2021-22 तक किया जाना निर्धारित था।

सरकार से बकाया भुगतान की लम्बित राशि को केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा लम्बे समय से अपनी लेखा पुस्तकों में राज्य सरकार ने प्राप्त होने योग्य राशि मद में दिखाया जा रहा है। रिजर्व बैंक द्वारा 31 दिसम्बर 2024 को जारी परिपत्र में केन्द्रीय सहकारी बैंकों को अपनी लेखा-पुस्तकों में 90 दिन से अधिक की बकाया दर्शायी गई प्राप्य राशि का पुस्तकों में शत-प्रतिशत प्रावधान के निर्देश दिये गये हैं। आमेरा के अनुसार, राज्य में समस्त केन्द्रीय सहकारी बैंकों का वर्ष 2023-24 में शुद्ध लाभ 408.99 करोड़ रुपये है।

यदि राज्य सरकार से प्राप्य राशि 767 करोड़ रुपये का शत-प्रतिशत प्रावधान किया जाता है तो प्रदेश की सभी सीसीबी का संचित हानि में आना तय है। इसका दुष्परिणाम यह होगा कि आरबीआई द्वारा निर्देशित न्यूनतम सीआरएआर 9 प्रतिशत रखे जाने की पालना में सभी केन्द्रीय सहकारी बैंक विफल होंगे। परिणामस्वरूप नाबार्ड द्वारा अल्पकालीन पुनर्भरण भी बाधित होगा, जिससे सहकारी बैंकों पर तरलता का बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जायेगा और बैंकों का लाइसेंस भी खतरे में पड़ सकता है। ये विपरीत परिस्थितियां राज्य सरकार की 25 हजार करोड़ रुपये के ब्याजमुक्त अल्पकालीन फसली ऋण वितरण को बाधित करेंगी।

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