राष्ट्रीयसहकारिता

मिशन प्राकृतिक खेती : ड्रोन खरीदने के लिए केंद्र सरकार दे रही 50 से 100 प्रतिशत अनुदान

नई दिल्ली, 25 फरवरी। केंद्र सरकार परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) के तहत भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (BPKP) नामक एक उप-योजना के माध्यम से 2019-2020 से प्राकृतिक खेती को रसायन मुक्त खेती के रूप में बढ़ावा दे रही है। देश भर में बीपीकेपी के तहत 8 राज्यों में प्राकृतिक खेती के लिए अब तक 4.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को मंजूरी दी गई है और 70.13 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। गंगा कॉरिडोर के किनारे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 1.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को भी मंजूरी दी गई है। किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने और प्राकृतिक खेती की पहुंच बढ़ाने के लिए, सरकार ने बीपीकेपी को बढ़ाकर एक अलग और स्वतंत्र योजना के रूप में प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन (NMNF) तैयार किया है।

किसानों के लाभ के लिए, भारत सरकार कृषि के क्षेत्र में ड्रोन (DRONE) को बढ़ावा दे रही है, जो उन्नत प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने, दक्षता में सुधार करने, फसल की उपज बढ़ाने और संचालन की लागत को कम करने में मदद करेगा। सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) के तहत ड्रोन की खरीद की लागत के 100 प्रतिशत की दर से अधिकतम 10 लाख रुपये प्रति ड्रोन की खरीद और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), फार्म मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (SAU), राज्य और अन्य केंद्र सरकार के कृषि संस्थानों/विभागों और कृषि गतिविधियों में लगे हुए भारत सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के अधीन संस्थानों द्वारा किसानों के खेतों पर प्रदर्शन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

एफपीओ को 75 प्रतिशत तक अनुदान

किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को किसानों के खेतों पर इसके प्रदर्शन के लिए किसान ड्रोन की लागत का 75 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाता है। इन कार्यान्वयन एजेंसियों को 6000 रुपये प्रति हेक्टेयर का आकस्मिक व्यय प्रदान किया जाता है, जो ड्रोन खरीदना नहीं चाहते हैं, लेकिन कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC), हाई-टेक हब, ड्रोन निर्माताओं और स्टार्ट-अप से प्रदर्शन के लिए ड्रोन किराए पर लेंगे। ड्रोन प्रदर्शनों के लिए ड्रोन खरीदने वाली कार्यान्वयन एजेंसियों का आकस्मिक व्यय 3000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक सीमित है। किसानों को किराये के आधार पर ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए, किसानों, एफपीओ और ग्रामीण उद्यमियों की सहकारी समिति के तहत सीएचसी द्वारा ड्रोन की खरीद के लिए 40 प्रतिशत की दर से अधिकतम 4 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

सीएचसी के लिए 50 प्रतिशत अनुदान

सीएचसी स्थापित करने वाले कृषि स्नातक ड्रोन की लागत का 50 प्रतिशत की दर से अधिकतम 5 लाख रुपये प्रति ड्रोन तक वित्तीय सहायता प्राप्त करने के पात्र हैं। व्यक्तिगत स्वामित्व के आधार पर ड्रोन की खरीद के लिए लघु और सीमांत, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, महिलाओं और उत्तर-पूर्वी राज्य के किसानों को लागत का 50 प्रतिशत की दर से अधिकतम 5 लाख रुपये तक और अन्य किसानों को 40 प्रतिशत की दर से अधिकतम 4 लाख रुपये तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह जानकारी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

 

 

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