Monday, July 22, 2024
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राज्यसहकारिता

ब्याज अनुदान नहीं मिलने से एक साल से बिना वेतन काम कर रहे ग्राम सेवा सहकारी समितियों के हजारों कार्मिक

सहकार गौरव सम्पादकीय

राजस्थान सरकार द्वारा जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCB) और ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से लागू की जा रही ब्याजमुक्त अल्पकालीन फसली ऋण (CROP LOAN) योजना से प्रदेश के लाखों किसानों को बड़ा आर्थिक सम्बल मिल रहा है। अपेक्स बैंक (APEX BANK) के पर्यवेक्षण में राज्य के 29 केंद्रीय सहकारी बैंक और लगभग 7800 ग्राम सेवा सहकारी समितियां यानी पैक्स (PACS) और लैम्पस (LAMPS) द्वारा किसानों को रबी और खरीफ सीजन के लिए अल्पकालीन फसली ऋण उपलब्ध कराया जाता है और दोनों सीजन में इसकी वसूली की जाती है। इसके लिए समितियों को मानव श्रम सहित कई संसाधन झौंकने पड़ते हैं। अल्पकालीन फसली ऋण वितरण की एवज में राजस्थान सरकार की ओर से 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाता है। यह ब्याज अनुदान राजस्थान राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड (RSCB) के माध्यम से केंद्रीय सहकारी बैंकों को प्रेषित किया जाता है। इसमें से अनुदान की आधी राशि यानी 2 प्रतिशत अनुदान पैक्स, लैम्पस को मिलता है।

प्रदेश की 75 फीसदी से अधिक सोसाइटियां इसी 2 प्रतिशत अनुदान पर निर्भर हैं, जिससे समिति कार्मिकों के वेतन-भत्ते व सोसाइटी के खर्च निकलते हैं। अधिकांश सोसाइटियां केवल अल्पकालीन फसली ऋण पर ही निर्भर हैं और विभिन्न कारणों से वे कोई कारोबार नहीं करती। जो प्राथमिक कृषि ऋण समितियां कृषि आदान, उर्वरक, भण्डारण, पशु आहार, कृषि यंत्रीकरण, सुपर बाजार, गौण मंडी, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि जिंसों की खरीद, मध्यकालीन ऋण वितरण सहित अन्य व्यावसायिक गतिविधियां में सतत संलग्न हैं, उनके यहां वेतन-भत्तों को लेकर किसी प्रकार की समस्या नहीं है, परन्तु बहुतेरी समितियां केवल ऋण वितरण की एवज में मिलने वाले अनुदान पर ही निर्भर हैं। इस साल ऋण वितरण की एजव में, 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान की 300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बकाया है। केंद्रीय सहकारी बैंक और केवल ऋण वितरण पर निर्भर समितियां लम्बे समय से ब्याज अनुदान की बाट जोह रही हैं।

अनुदान नहीं मिलने से करीब साल भर से हजारों सोसाइटी कार्मिकों के चूल्हे ठंडे पड़े हैं। हाल ही में वित्तीय रूप से कमजोर होने के कारण व्यवस्थापक आत्महत्या तक का कदम उठा चुके हैं। कईयों की स्थिति बहुत खराब है। एक संगठन के तीन संगठन बन जाने और एकता नहीं होने के कारण, वे संगठन स्तर पर भी अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने में नाकाम हैं। यही कारण है कि इस बार वित्तीय वर्ष समाप्त होने को है और राज्य सरकार की ओर से वर्ष के बीच एक बार भी अनुदान जारी नहीं किया गया। आर्थिक तंगी के कारण, सहकारी सोसाइटियों के कर्मचारियों की पारिवारिक स्थिति खराब दौर से गुजर रही है। हर ग्राम पंचायत पर एक ग्राम सेवा सहकारी समिति खोलने की सरकारी योजना के चलते, समितियों के कार्यक्षेत्र घटने के कारण, ऋण वितरण का कारोबार भी कम होता जा रहा है।

हालांकि, केंद्र सरकार व राज्य सरकार, दोनों ही समितियों को नवाचारों के माध्यम से समितियों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का भरसक प्रयत्न कर रही हैं, लेकिन आर्थिक तंगी से गुजर रहे सोसाइटी कार्मिक अभी नयी योजनाओं को अपनाने से झिझक रहे हैं। साल भर से वेतन नहीं मिलने के कारण उनमें केंद्र सरकार की योजनाओं को अंगीकार करने के प्रति उत्साह नजर नहीं आ रहा। सरकार को चाहिये कि वे ग्राम सेवा सहकारी समिति कार्मिकों में, नवाचारों के प्रति उत्साह पैदा करने के लिए पहले उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए अविलम्ब ब्याज अनुदान की राशि जारी करे। भूखे पेट कोई कब तक भजन करेगा।

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