अन्नपूर्णा फूड पैकेट योजना के बंटाधार के लिए आईएएस मेघराज रतनू, आरएएस दिनेश जांगिड़ और राज्य नोडल अधिकारी राजीव लोचन शर्मा को उत्तरदायी माना
– टैंडर दरों में एकरूपता नहीं होने से राज्य सरकार को कई सौ करोड़ रुपए की वित्तीय हानि हुई
– विशेष जांच दल की रिपोर्ट में 14 जिलों के कलेक्टर और और जिला रसद अधिकारी भी उत्तरादायी माने गए
जयपुर, 2 सितम्बर (मुखपत्र)। निवर्तमान अशोक गहलोत सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री नि:शुल्क अन्नपूर्णा फूड पैकेट योजना का सत्यानाश करने और भारी वित्तीय अनियमितताओं के लिए सरकार ने 14 जिला कलेक्टर्स और जिला रसद अधिकारियों सहित तत्कालिन सहकारिता रजिस्ट्रार मेघराज सिंह रतनू (IAS), सहकारिता विभाग के तत्कालिन संयुक्त शासन सचिव दिनेशकुमार जांगिड़ (RAS) और योजना के राज्य नोडल अधिकारी/तत्कालिन एडिशनल रजिस्ट्रार-प्रथम (अभी सेवानिवृत्त) राजीव लोचन शर्मा को उत्तरदायी माना गया है।
विशेष जांच दल की जांच रिपोर्ट के आधार पर फूड पैकेट योजना में खरीद प्रक्रिया की देरी, जिला स्तर पर टेंडर की दरों में भारी अंतर और गुणवत्ता जांच में लापरवाही को लेकर जवाबदेही तय करने की कार्यवाही शुरू होने से प्रशासनिक और सहकारिता गलियारों में हडक़ंप मच गया है। निदेशक निरीक्षण विभाग द्वारा निष्पादित विशेष जांच प्रतिवेदन संख्या 09/2025-26 के क्रम में सहकारिता विभाग ने पूर्व अधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
‘सहकार गौरव’ एवं ‘मुखपत्र’ द्वारा योजना की अवधि के दौरान ही इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित कर, राज्य नोडल अधिकारी राजीव लोचन शर्मा की लापरवाही, हठधर्मिता और जिम्मेदारी से बचने के लिए जानबूझकर योजना में देरी किए जाने को लेकर विस्तृत समाचार प्रकाशित किया गया था। इस खुलासे के कुछ समय पश्चात ही राजीव लोचन शर्मा, नवम्बर, 2024 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर सहकारिता विभाग से कूच कर गए थे।
सहकारी विभाग में 74 दिन धूल फांकती रही फूड पैकेट योजना की पत्रावली
तत्कालिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा 10 फरवरी 2023 को बजट घोषणा 2023-24 के बिन्दु संख्या 5.01.0 के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए ) के दायरे में आने वाले परिवारों को मुख्यमंत्री निशुल्क अन्नपूर्णा फूड पैकेट उपलब्ध करवाने की शोषणा की गई। इसके तहत वित्त विभाग द्वारा 13 अप्रेल 2023 को मुख्यमंत्री नि:शुल्क अन्नपूर्णा फूड योजना की वित्तीय स्वीकृति जारी की गई। महंगाई राहत कैम्प के दिशा-निर्देशानुसार यह योजना 25 मई 2023 से लागू हो जानी चाहिए थी। इसकी जिम्मेदारी कॉनफैड को दी गई और सहकारिता विभाग के तत्कालिन अतिरिक्त रजिस्ट्रार-प्रथम राजीव लोचन शर्मा को योजना का राज्य नोडल अधिकारी बनाया गया। तानाशाही, तुनकमिजाजी और लेटलतीफ कार्यप्रणाली के लिए विशिष्ट पहचान रखने वाले राजीव लोचन शर्मा और सहकारिता विभाग के तत्कालिन संयुक्त शासन सचिव दिनेशकुमार जांगिड़ ने योजना की क्रियान्वित और राज्य स्तर से अन्नपूर्णा फूड पैकेट के टेंडर की पत्रावली को 45 दिन तक अपने पास रोके रखा। इसके लिए जांच रिपोर्ट में जांगिड़ और शर्मा को दोषी माना गया।
डीबीटी की प्लानिंग पर भी पानी फेरा
आसन्न विधानसभा चुनावों को देखते हुए राज्य सरकार ने फूड पैकेट के स्थान पर, इसकी कीमत के बराबर राशि डायरेक्ट बेनेफिट स्कीम (डीबीटी) के तहत लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर करने की योजना बनाने का निर्देश सहकारिता विभाग को दिया, लेकिन तब भी यह फाइल तत्कालिन रजिस्ट्रार मेघराजसिंह रतनू, संयुक्त शासन सचिव दिनेशकुमार जांगिड़ और राज्य नोडल अधिकारी राजीव लोचन शर्मा के बीच फुटबाल बनी रही और इसे 24 दिन पत्रावली को रोके रखने के बाद, प्रशासनिक विभाग को लौटाया गया। यानी सहकारिता विभाग ने फूड पैकेट की पत्रावली को 13 अप्रेल 2023 से 26 जून 2023 तक, कुल 74 दिन (अढ़ाई महीने) अपने पास रोके रखा। इसके लिए जांच रिपोर्ट में तत्कालिन रजिस्ट्रार मेघराजसिंह रतनू, तत्कालिन संयुक्त शासन सचिव दिनेश कुमार जांगिड़ और राज्य नोडल अधिकारी राजीव लोचन शर्मा को जिम्मेदार माना गया है।
टेंडर की दरों में एकरूपता बनाए रखने में विफलता
सहकारिता विभाग के राज्य नोडल अधिकारी के स्तर हुई इस घनघोर लापरवाही के चलते अंतत: राज्य सरकार ने योजना की शीघ्र क्रियान्वित के लिए इस काम को कॉनफैड से लेकर जिला कलेक्टर को सौंपने का निर्णय लिया और फूड पैकेट की अधिकतम कीमत 357 रुपए प्रति पैकेट निर्धारित करते हुए जिलास्तर पर टेंडर आमंत्रित करने का निर्णय लिया, इसके लिए कलेक्टरों को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन नियम-शर्तें तय करने की जिम्मेदारी राजीव लोचन शर्मा को दी गई। पहले की भांति, शर्मा यहां भी फेल सिद्ध हुए, जिसके चलते जिला स्तर पर हुए टैंडर की दरों में एकरूपता नहीं रही।
मॉडल बिड डॉक्यूमेंट्स में फूड पैकेट में शामिल खाद्य वस्तुओं – सोयाबीन तेल, चना दाल, चीनी, नमक, धनिया, लाल मिर्च व हल्दी पाउडर की अलग-अलग दर दर्शाते हुए, एवं लेबलिंग, पैकेजिंग, परिवहन लागत की अनुमानित लागत को दर्शाया जाना चाहिए था, इससे टैंडर कम कीमत पर छूटते लेकिन शर्मा ने ऐसा नहीं किया। फूड पैकेट के लिए एकमुश्त टेंडर आमंत्रित कर लिए गए। राज्य नोडल अधिकारी के रूप में राजीव लोचन शर्मा, टेंडर की दरों में एकरूपता बनाए रखने में भी फेल सिद्ध हुए, जिसके चलते 33 जिलों में से केवल 12 जिलों में ही 357 रुपए या इससे कम दर पर फूड पैकेट के लिए टैंडर फाइनल हुए, जबकि 21 जिलों में निर्धारित राशि के कहीं अधिक पर टैंडर छूटे।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न जिलों में केवल परिवहन लागत के आधार पर ही दरों में मामूली विभिन्नता होना संभव था, लेकिन टैंडर बहुत अधिक कीमत पर छूटे, जिससे राज्य सरकार को कई सौ करोड़ रुपए की वित्तीय हानि हुई। दर विभाजन के अभाव में उपानन संस्थाएं, टेंडर की दरों को लेकर नेगोसिएशन नहीं कर पाईं। यदि ऐसा होता तो राज्य सरकार की बड़ी धनराशि कीे बचत की जा सकती थी। राज्य नोडल अधिकारी के पास एक सुरक्षित विकल्प इस बात का भी था कि वे केंद्रीयकृत उपानन प्रक्रिया अपनाकर खाद्य सामग्री वितरण में अनुभवी फर्मों का एम्पैनलमेंट कर जिला स्तर पर सूचित किया जा सकता था, लेकिन उन्होंने इस पर भी काम नहीं किया। जांच रिपोर्ट में इसके लिए राज्य नोडल अधिकारी राजीव लोचन शर्मा को जिम्मेदार माना गया है।
गुणवत्ता परखने में नाकामी
टैंडर के बाद, विभिन्न जिलों में आपूर्ति किए गए अन्नपूर्णा फूड पैकेट की खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करवाने के लिए सफल बोलीदाता को उच्च गुणवत्ता वाले ब्रांडेड (एफएसएसएआई/बीआईएस/एगमार्क/ एचएसीसीपी/एफपीओ आदि प्रमाणीकरण के साथ) वस्तुओं की आपूर्ति शुरू करने से पहले खाद्य पैकेट के प्रत्येक आइटम के तीन नमूनों के साथ बैच अथवा लॉट वार एनएबीएल, एफएसएसएआई अनुमोदित प्रयोगशाला विश्लेषण रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य था। जिला कलक्टर किसी भी एनएबीएल, एफएसएसएआई प्रयोगशाला या एजेंसी से बैच/ लॉट नमूने की गुणवत्ता की पुन: जांच करवा सकते थे।
यह भी शर्त थी कि यदि लिए गए नमूनों में से कोई भी घटिया, हानिकारक, मिलावटी आदि पाया जाता है, तो बोलीदाता इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार होगा। बोलीदाता के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी, एवं उसे अपने खर्च पर घटिया/मिलावटी खाद्य पैकेटों के पूरे स्टॉक को तुरन्त बदलना होगा। यदि किसी भी मात्रा में घटिया/मिलावटी खाद्य पैकेट को उसके उपभोग के कारण उचित मूल्य की दुकान से बदला/वापस नहीं लिया जा सकता है, तो पहली बार जुर्माना सम्बन्धित आपूर्ति लॉट का 15 प्रतिशत होगा और दूसरी बार सम्बन्धित आपूर्ति लॉट का 25 प्रतिशत होगा, उसके बाद जिला कलेक्टर आपूर्ति जारी रखने या बन्द करने का उचित निर्णय लेंगे।
आपूर्तिकर्ता की बजाय किसी और ने भेजे नमूने
परंतु, सहकारिता विभाग द्वारा विशेष जांच दल को उपलब्ध करवाये गए कुल 14 जिलों के दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि जोधपुर, करौली, झालावाड़, सीकर, बून्दी, सवाईमाधोपुर, कोटा, अजमेर, सिरोही, जयपुर और भीलवाड़ा जिलों में तय दिशानिर्देशों के अनुसार पैक की जाने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच में जो नमूना एन.ए.बी.एल. अनुमोदित प्रयोगशाला को प्रेषित किया गया है, वह आपूर्तिकर्ता फर्म के स्थान पर अन्य फर्म द्वारा प्रेषित किया गया। यानी आपूर्तिकर्ता द्वारा सामग्री की पैकिंग से पूर्व स्वंय के स्तर से नमूना जांच नहीं करवायी गई। इससे यह स्पष्ट नहीं हुआ कि आपूर्तिकर्ता द्वारा पैंकिग से पूर्व जिस सामग्री की नमूना जांच करवायी गई है, वही सामग्री फूड पैकेट के रूप में पैक की गई है या नहीं। इसके लिए जांच रिपोर्ट में संबंधित जिला कलेक्टरों और जिला रसद अधिकारियों को जिम्मेदार माना गया है।
आकस्मिक नमूना जांच में फेलियॉर
मॉडल बिड डॉक्यूमेंट्स की शर्तों के तहत जिला स्तर पर खाद्य सामग्री की आकस्मिक नमूना जांच का भी पूरी तरह से अभाव रहा। अधिकांश जिलों में जिला कलेक्टर/जिला रसद अधिकारी के स्तर पर फूड पैकेट की खाद्य सामग्री का आकस्मिक नमूना लेकर, उसकी एनएबीएल, एफएसएसएआई प्रयोगशाला से जांच नहीं करवाई गई। जोधपुर, अजमेर, करौली, भीलवाड़ा और चित्तौडग़ढ़ जिलों में तो फूड पैकेट की खाद्य सामग्री की रेंडम जांच भी नहीं करवाई गई, जबकि डॉक्यूमेंट बिड में घटिया या गुणवत्ताहीन सामग्री पाए जाने पर आपूर्तिकर्ता पर जुर्माना लगाए जाने का स्पष्ट प्रावधान था। जांच रिपोर्ट में इस चूक के लिए भी कलेक्टर्स और डीएसओ को उत्तरादायी माना गया है।
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