राजस्थान में प्राकृतिक एवं योगिक खेती को मिलेगी नई पहचान, कृषि विभाग और ब्रह्माकुमारी संस्थान के बीच ऐतिहासिक समझौता
– आबूरोड स्थित तपोवन को योगिक प्राकृतिक खेती के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल
जयपुर, 25 अक्टूबर (मुखपत्र)। राजस्थान में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों को आत्मनिर्भर बनाने तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों के विस्तार की दिशा में कृषि विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। रविवार को आबूरोड स्थित ब्रह्माकुमारी संस्थान के शांतिवन परिसर में आयोजित ग्लोबल समिट के दौरान राजस्थान सरकार के कृषि विभाग एवं ब्रह्माकुमारी संस्थान की राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के कृषि एवं ग्रामीण विकास प्रभाग के मध्य महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए।
राजस्थान सरकार की ओर से कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। ब्रह्माकुमारी संस्थान की ओर से कृषि एवं ग्रामीण विकास प्रभाग की अध्यक्ष बीके सरला के प्रतिनिधित्व में यह समझौता संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक पहल से प्रदेश में प्राकृतिक एवं योगिक खेती के विस्तार, किसानों के प्रशिक्षण, कृषि कार्मिकों के क्षमता संवर्धन तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई गति मिलेगी। समझौते के माध्यम से कृषि विभाग की तकनीकी विशेषज्ञता और ब्रह्माकुमारी संस्थान के प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता संबंधी अनुभवों का समन्वय किया जाएगा।
प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता : गोयल

इस अवसर पर कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल के मार्गदर्शन में राज्य सरकार कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल एवं किसान हितैषी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन तथा किसानों की दीर्घकालीन आर्थिक समृद्धि से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल है।
प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए किसानों को तकनीकी जानकारी के साथ निरंतर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं सफल कृषि मॉडल से जोडऩा आवश्यक है। कृषि विभाग और ब्रह्माकुमारी संस्थान के संयुक्त प्रयास इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उल्लेेखनीय है कि मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री पूर्व में ब्रह्माकुमारी संस्थान के प्राकृतिक खेती मॉडल का अवलोकन कर इसकी सराहना कर चुके हैं।
गांव-गांव पहुंचेगी प्राकृतिक खेती की तकनीक
समझौते के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसानों के लिए प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती से संबंधित प्रशिक्षण शिविर, कार्यशालाएं, प्रदर्शनियां तथा जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, स्थानीय संसाधनों से कृषि आदान तैयार करने, जल संरक्षण, जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों तथा टिकाऊ कृषि प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके साथ ही किसानों को सफल प्राकृतिक खेती मॉडल का प्रत्यक्ष अवलोकन कराने के लिए शैक्षणिक भ्रमण एवं अनुभव साझा करने के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि किसान इन पद्धतियों को अपनी खेती में अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें।
कृषि कार्मिकों के क्षमता संवर्धन पर फोकस
इस समझौते का लाभ किसानों के साथ-साथ कृषि विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, कृषि पर्यवेक्षकों एवं क्षेत्रीय कार्मिकों को भी मिलेगा। दोनों संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में कृषि कार्मिकों को प्राकृतिक खेती की नवीन तकनीकों, प्रभावी कृषि प्रसार गतिविधियों एवं किसानों को बेहतर मार्गदर्शन प्रदान करने के संबंध में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से मुख्य प्रशिक्षक तैयार किए जाएंगे, जो आगे जिला, ब्लॉक एवं ग्राम स्तर पर किसानों तथा कृषि कार्मिकों को प्रशिक्षण प्रदान कर सकेंगे।
तपोवन बनेगा योगिक प्राकृतिक खेती का उत्कृष्टता केंद्र
समझौते की एक महत्वपूर्ण विशेषता आबूरोड स्थित तपोवन को योगिक प्राकृतिक खेती के उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) के रूप में विकसित करने की सैद्धांतिक सहमति है। आवश्यक शासकीय स्वीकृतियों एवं निर्धारित प्रक्रियाओं के अधीन प्रस्तावित यह केंद्र प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण, प्रदर्शन, अनुसंधान, ज्ञान-विनिमय एवं क्षमता संवर्धन की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकेगा।
यहां किसानों, कृषि अधिकारियों एवं मुख्य प्रशिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्राकृतिक खेती के मॉडल प्रदर्शन तथा शैक्षणिक भ्रमण जैसी गतिविधियां आयोजित की जा सकेंगी। केंद्र के संस्थागत स्वरूप, आधारभूत सुविधाओं, वित्तीय व्यवस्था एवं संचालन संबंधी विषयों पर पृथक से आवश्यक स्वीकृति प्राप्त की जाएंगी।
गांव तक चलेगा संयुक्त जागरूकता अभियान
समझौते के तहत राज्य, संभाग, जिला, ब्लॉक एवं ग्राम स्तर पर प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए संयुक्त जागरूकता अभियान संचालित किए जा सकेंगे। दोनों संस्थाएं किसान मेलों, सम्मेलनों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण शिविरों एवं प्रदर्शनियों के आयोजन में सहयोग करेंगी।
प्रारंभिक चरण में चयनित जिलों अथवा कृषि समूहों में गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी। प्राप्त अनुभवों एवं परिणामों के आधार पर इनका चरणबद्ध विस्तार प्रदेश के अन्य जिलों में किया जाएगा।
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