सबकी जुबान पर एक ही सवाल, तबादलों में किसकी चलेगी?
जयपुर, 28 जून (मुखपत्र) राजस्थान में स्थानांतरण एवं पदस्थापन पर राज्य सरकार द्वारा शिथिलता दिये आज दस दिन हो चुके हैं, लेकिन सहकारिता विभाग में खामोशी छायी है। कोई भी सहज रूप से यह अनुमान तक नहीं लगा पा रहा कि स्थानांतरण को लेकर सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतमकुमार दक या शासन सचिव (सहकारिता) डॉ. समित शर्मा का क्या रुख रहने वाला है। कितनी संख्या में तबादले होंगें? नेहरू सहकार भवन के गलियारों से लेकर जिलों के कार्यालयों और सहकारी संस्थाओं में एक ही बात की चर्चा है कि लिस्ट कब आने वाले हैं, कितनों की आने वाली है? बड़ी संख्या मेंं स्थानांतरण होंगे या फिर बस एडजस्टमेंट ही होगी, हालांकि एडजस्टमेंट की संभावना कम है।
सूत्रों की मानें तो इस सीजन में 100 के पासआस अधिकारी तबादलों से प्रभावित हो सकते हैं। इस स्थिति में उम्मीदवार अपने हिसाब से राजनीतिक डिजायर लगा रहे हैं, लेकिन मंत्री की अनिश्चित और कई बार एकदम विपरीत रुख वाली आदत को देखते हुए स्थानांतरण की चाह रखने वाले अधिकारी इस बात के लिए सहज नहीं दिख रहे कि डिजायर के अनुरूप तबादला हो ही जायेगा। कुछ लिफाफा लिये भी घूम रहे हैं, लेकिन सामने से लिफाफा पकड़ कर, गारंटी देने वाला कोई नहीं मिल रहा।
कौन पड़ेगा भारी?
भजनलाल सरकार के कार्यकाल में सहकारी क्षेत्र में पहली बार यह सवाल उठ रहा है कि इस बार तबादलों में किसकी चलेगी? यह सवाल इसलिए क्योंकि डूंगला थाना कांड के बाद मंत्री बैकफुट पर हैं। उनके स्वाभाव में नरमी देखने को मिल रही है। सुबहों-शाम एफआईआर-एफआईआर की रट लगाने वाले मंत्री, डूंगला प्रकरण के बाद से शांत हैं। बोलचाल भी कुछ सुधर गया है। दूसरी ओर, ईमानदार, कर्मठ एवं अतिसक्रिय आईएएस अधिकारी डॉ. समित शर्मा हैं, जिनके पास शासन सचिव के पद का दायित्व हैं। उनकी कठोर, निष्पक्ष और निडर प्रशासक की छवि को देखते हुए इस बात की उम्मीद कम है कि तबादलों में केवल सिविल लाइन वालों की ही चलेगी।
हालांकि, इससे पहले अपेक्षाकृत कमजोर शासन सचिवों के रहते हुए, सहकारी अधिकारियों का सिविल लाइन में ही जमघट लगा रहता था। इस बात की उम्मीद अधिक है कि इस बार मेरिट के आधार पर स्थानांतरण होंगे और वित्तीय संस्थाओं से दागी अफसरों की छुट्टी हो सकती है। अधिकारियों की कमी के चलते कैडर के अनुरूप पदस्थापन/स्थानांतरण की संभावना कम है, लेकिन जयपुर, जोधपुर, अजमेर, भरतपुर और उदयपुर संभाग में अच्छी-खासी उल्टपुल्ट हो सकती है।
घरवापसी की उम्मीद
जोधपुर संभाग में विभागीय अधिकारियों और संस्थाओं में कुछ पद रिक्त हैं जबकि कुछ अधिकारियों की संस्थाओं से विदाई होना तय है। यही हाल अजमेर और भरतपुर संभाग का है। इन दोनों संभागों में कार्यरत बाहर के कुछ अधिकारी घर लौटना चाह रहे हैं जबकि राजनीतिक या पैक्स में नियुक्ति विवाद के कारण बेघर कर दिये गये कुछ अफसरों की घरवापसी हो सकती है। कोटा संभाग और बीकानेर संभाग को अपेक्षाकृत कम उथल-पुथल की श्रेणी में रखा जा सकता है।
नेहरू सहकार भवन पर हैं निगाहें
इस बार, पहली दफा सबकी निगाहें नेहरू सहकार भवन पर हैं। यहां के बहुत से अधिकारी भी वर्तमान सीटों पर असहज नजर आ रहे हैं। कईयों को 9.30 एएम से 6 पीएम का सिटिंग कॉन्सेंप्ट रास नहीं आ रहा। ऐसे अधिकारी केवल सहकार भवन से नहीं, बल्कि जयपुर से भी दूर जाने की फिराक में हैं। कुछ अफसर घरवापसी की जद्दोजहद में हैं।

