सहकारी आंदोलन की मजबूती के लिए सहकारिताओं में पारदर्शी निर्वाचन नितांत आवश्यक – आमेरा
सहकार नेता ने जिला सहकार संघ के चुनाव सम्पन्न होने पर प्रसन्नता जतायी
जयपुर, 25 मार्च (मुखपत्र)। ऑल राजस्थान कोआपरेटिव बैंक एम्प्लाइज यूनियन एवं ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रांतीय महासचिव, सहकारी साख समितियां एम्प्लाइज यूनियन के प्रान्तीय अध्यक्ष और राजस्थान के जागरूक सहकार नेता सूरज भान सिंह आमेरा ने श्रीगंगानगर जिला सहकारी संघ के तेरह वर्ष बाद संचालक मण्डल के निर्विरोध चुनाव सम्पन्न होने पर खुशी व्यक्त की है। एक बयान में सहकार नेता ने कहा कि यह जो दीपक प्रज्वलित हुआ है, वह सहकारी लोकतंत्र की दृष्टि से सराहनीय कदम है। सहकार नेता ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष शिव स्वामी एवं उपाध्यक्ष डॉ. मोहित टांटिया सहित संचालक मंडल के समस्त सदस्यों को शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। आमेरा ने विश्वास जताया कि इस निर्वाचन के बाद जिले के सहकारी आंदोलन को नयी गति एवं ऊर्जा मिलेगी।
आमेरा ने कहा कि प्रदेश में राज्य सहकारी संस्थाओं के चुनाव 12 वर्ष से लम्बित हैं। राजफैड के चुनाव हुए तो दो दशक से अधिक समय व्यतीत हो चुका है। हाल के वर्षों में कुछ संस्थाओं के चुनाव उच्च न्यायालय के आदेश पर ही करवाये गये हैं लेकिन राज्य सरकार उदासीनता धारण किये हुए हैं और तथाकथित स्वायत्तशासी सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण आंख मूंद कर बैठा है।
हितधारकों के अभाव में कमजोर हो रही सहकारी संस्थाएं
सहकार नेता ने कहा कि सहकारी आंदोलन में सहकारिता से समृद्धि के लिए, सहकारी संस्थाओं की मजबूती के लिए, संस्था और सदस्यों के हितों की पैरवी के लिए और सहकारी आंदोलन की सफलता के लिए सहकारी संस्थाओं के पारदर्शी निर्वाचन नितांत आवश्यक है। राज्य में हमारा अनुभव है कि सहकारी संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधियों के अभाव में पिछले सालों में सहकारी बैंक और सभी सहकारी संस्थाएं प्रशासनिक और आर्थिक रूप से कमजोर हुई हैं, भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय पिछले सप्ताह ही दिल्ली में ‘सहकारी संस्थाओं के पारदर्शी चुनाव व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्य’ विषय पर दो दिन की राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित कर राज्य सरकारों से चुनाव की अपेक्षा की है।
सहकारिताओं के त्वरित चुनाव आवश्यक
आमेरा ने कहा कि केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के संकल्प ‘सहकारिता से समृद्धि’ को जमीनी स्तर पर साकार करने के लिए राज्य सरकार सहकारी चुनाव की त्वरित कार्रवाई करे ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों की बहाली से सहकारी सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
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