सहकारिता

भजनलाल सरकार ने केंद्रीय सहकारी बैंकों के 1400 करोड़ रुपये के अनुदान क्लेम रोके, 11 डीसीसीबी घाटे में, 5 बैंकों का नाबार्ड ने कृषि ऋण पुनर्वित्त रोका

जयपुर, 13 जनवरी (मुखपत्र)। सहकार से समृद्धि के जयघोष के बीच, राजस्थान की भाजपा सरकार के सहकारी बैंकों के प्रति असहिष्णु रवैये के कारण प्रदेश का अल्पकालीन सहकारी ऋण ढांचा (अल्पकालीन फसली ऋण संरचना) चरमराने लगा है। भाजपा सरकार के सहकारी बैंकों के प्रति इस नकारात्मक दृष्टिकोण के कारण राजस्थान के 11 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड DCCB वित्तीय हानि में आ गये हैं और नाबार्ड ने इनके कृषि ऋण पुनर्भरण पर रोक लगा दी है। इसका मुख्य कारण राजस्थान सरकार की ओर बकाया 1401 करोड़ रुपये हैं, जिनका भुगतान जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) को नहीं मिल रहा। प्रदेश में 29 केंद्रीय सहकारी बैंकों द्वारा ग्राम सेवा सहकारी समितियां के माध्यम से राज्य के 30 लाख कृषकों को अल्पकालीन साख संरचना के अंतर्गत ब्याजमुक्त फसली ऋण उपलब्ध कराया जाता है।

ऑल राजस्थान कॉआपरेटिव बैंक एम्पलाइज यूनियन और ऑल राजस्थान कोअॅापरेटिव बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव, सहकार नेता सूरजभान सिंह आमेरा ने सहकारी बैंकों की चरमराती आर्थिक स्थिति और इससे जुड़े लाखों किसानों की पीड़ा को पत्र के माध्यम से राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार के समक्ष रखा है। सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतमकुमार दक और सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां आनंदी को प्रस्तुत पत्र में सहकार नेता ने राज्य सरकार से ऋण माफी पर देय लम्बित क्लेम राशि सहित विभिन्न योजनाओं की बकाया राशि का शीघ्र भुगतान दिलाकर अल्पकालीन साख चक्र निर्बाध रखने के लिए निवेदन किया है।

आमेरा के अनुसार, प्रदेश के 20 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों द्वारा राजस्थान सरकार से ऋण माफी पेटे देय 8 प्रतिशत ब्याज राशि के 765.57 करोड़ रुपये, ब्याजमुक्त फसली ऋण योजना में मिलने वाले अनुदान के एजव में 466.50 करोड़ रुपये (वर्ष 2024-25 के 275.52 करोड़ व वर्ष 2025-26 के 190.98 करोड़ रुपये), क्षतिपूर्ति ब्याज अनुदान योजना के वर्ष 2020-21 से 2025-26 (31.08.2025 तक) 169.48 करोड़ रुपये, कुल 1401.55 करोड़ रुपये बतौर क्लेम बकाया हैं। इसमें से भारत सरकार और राजस्थान सरकार द्वारा इस बकाया राशि में से 775.99 करोड़ रुपये की राशि पीडी खाते में ट्रांसफर की जा चुकी है और 625 करोड़ 56 लाख रुपये की राशि स्वीकृति होनी बाकी है, परंतु पीडी खाते में से आहरण पर प्रतिबंध होने के कारण, फिलहाल 1401 करोड़ 55 लाख रुपये की पूरी राशि, सरकार के स्तर पर बैंकों को दी जानी है।

11 डीसीसीबी हानि में

सहकार नेता के अनुसार, वर्ष 2018-19 की कृषक ऋण माफी योजना में केंद्रीय सहकारी बैंकों को विलम्ब भुगतान पर 8 प्रतिशत की दर से ब्याज देने की घोषणा की गई, जिसमें से तातारीख तक 765.57 करोड रुपये की राशि का भुगतान बकाया है, जो केंद्रीय सहकारी बैंकों को नहीं मिलने से एवं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के निर्देशानुसार लेखा पुस्तकों में शत-प्रतिशत प्रावधान करने से प्रदेश के अजमेर, अलवर, बाड़मेर, भरतपुर, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर, नागौर, पाली, सिरोही एवं उदयपुर केंद्रीय सहकारी बैंक शुद्ध वार्षिक हानि संचित हानि में आ गई है।

नाबार्ड से सहकारी बैंकों का पुनर्वित्त रोका

फसली ऋण वितरण हेतु बैंकों में वित्तीय तरलता की कमी के कारण अल्पकालीन साख संरचना प्रभावित हो रही है। इससे पैक्स, सीसीबी एवं शीर्ष बैंक की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। 31 मार्च 2025 की स्थिति अनुसार 5 केन्द्रीय सहकारी बैंकों का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीआरएआर) भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वांछित स्तर 9 प्रतिशत से कम हुआ है, जिसके परिणामस्वरुप जैसलमेर, पाली, नागौर, भरतपुर एवं अलवर सीसीबी को नाबार्ड से कृषि ऋण पुनर्वित्त नहीं मिल पा रहा है।

सरकार संपूर्ण बकाया क्लेम का भुगतान करे

ऋण माफी की लम्बित राशि सहित उक्त योजनाओं के लम्बित क्लेम राशि डीसीसीबी को शीघ्र जारी नहीं की जाती है, तो कुछ और डीसीसीबी के सीआरएआर का स्तर भी निर्धारित 9 प्रतिशत से कम हो जाने की पूर्ण आशंका है। निकट भविष्य में नाबार्ड द्वारा इन डीसीसीबी के कृषि ऋण पुनर्वित्त पर रोक लगायी जा सकती है, जिससे प्रदेश का अल्पकालीन साख चक्र बाधित हो सकता है।
राज्य सरकार में बकाया क्लेम राशि के परिणामस्वरूप पैक्स एवं सहकारी बैंकों की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के कारण पैक्स कर्मियों तथा बैंक कर्मचारियों, अधिकारियों के सेवा परिलाभ एवं सेवा सुरक्षा नकारात्मक रूप से प्रभावित होने के कारण पैक्स एवं सहकारी बैंक कर्मियों में राज्यव्यापी असंतोष एवं निराशा व्याप्त होना स्वाभाविक है।

सहकार नेता की सरकार से मांग

आमेरा ने सरकार से मांग की है कि राज्य सरकार द्वारा ऋणमाफी पद देय 8 प्रतिशत ब्याज की लम्बित राशि रु. 765.57 करोड का एवं अन्य बकाया क्लेम राशि का सहकारी बैंकों को अलिम्ब भुगतान जारी करें। आरबीआई स्तर पर प्रयास करके उक्त राशि का सीसीबी की लेखा पुस्तकों में प्रावधान के लिए तीन वर्ष की मोहलत स्थगन (DEFER) करवाकर तत्समय राज्य सरकार द्वारा बकाया क्लेम भुगतान जारी किया जाये। बकाया क्लेम ब्याज राशि का सीसीबी की लेखा पुस्तकों में एकमुश्त शत प्रतिशत प्रावधान की जगह क्रमोन्नत तीन वर्ष में प्रावधान करने की अनुमति प्रदान कर तत्समय राज्य सरकार द्वारा बकाया क्लेम का भुगतान जारी किया जाये।

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