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शासन सचिव और रजिस्ट्रार ने सहकारी बैकिंग सिस्टम पर किया गंभीर मंथन

जयपुर, 9 मई (मुखपत्र)। एक लम्बे अर्से के उपरांत, राज्य की दो युवा आईएएस अधिकारियों की पहल पर सहकारी बैंकों की दो दिवसीय समीक्षा बैठक में बैंकिंग सहकारिता पर गंभीरता से मंथन किया गया। बैठक में राज्य के केंद्रीय सहकारी बैंकों की मौजूदा वित्तीय स्थिति और आरबीआई एवं नाबार्ड के पैरामीटर पर ही फोकस रहा। बैठक में सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति में सुधार, गैर कृषि ऋण कारोबार में बढोतरी, व्यवसाय विविधता, जमाओं में वृद्धि जैसे विशुद्ध बैंकिंग बिन्दुओं पर विचार उपरांत, तात्कालिक एवं दीर्घकालीन उपायों पर चर्चा की गयी। एक मुद्दत के बाद, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशकों की ऐसी बैठक हुई, जिसमें अल्पकालीन फसली ऋण का एजेंडा नहीं था। बैठक में बैंकिंग पैरामीटर्स के साथ-साथ, प्रबंध निदेशकों के बैंकिंग एवं वित्तीय कौशल को भी परखा गया।

सहकारिता विभाग की शासन सचिव और राजस्थान राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड (RSCB) की प्रशासक श्रीमती शुचि त्यागी एवं सहकारी समितियों की रजिस्ट्रार, श्रीमती अर्चना सिंह की सजग उपस्थिति में 7 एवं 8 मई को अपेक्स बैंक में आयोजित इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में अपेक्स बैंक के प्रबंध निदेशक भोमाराम, प्रदेश के समस्त 29 केंद्रीय सहकारी बैंकों के मौजूदा प्रबंध निदेशक, सहकारिता विभाग के अतिरिक्त रजिस्ट्रार (बैंकिंग) संजय पाठक, ज्वाइंट रजिस्ट्रार (बैंकिंग) प्रेमचंद जाटव और अपेक्स बैंक के सम्बंधित अधिकारीगण मौजूद रहे।

प्रत्येक एमडी ने प्रस्तुत किया प्रगति का ब्यौरा

प्रबंध निदेशकों ने बारी-बारी से पीपीटी के माध्यम से अपने बैंक की प्रगति का ब्यौरा प्रस्तुत किया। यहीं से पता चला कि अधिकांश डीसीसीबी की बैलेंस शीट और लाभदेयता का मुख्य आधार, केवल शॉर्टटर्म लोन और इसकी एवज में मिलने वाला ब्याज अनुदान एवं मार्जिन ही है। कुछेक बैंकों को छोडक़र, अन्य डीसीसीबी का नोन-फार्मिंग सैक्टर में निवेश और जमाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक पायी गयी। कुछ बैंकों की जमाओं का स्तर पिछले 10 साल से एक ही स्तर पर मेंटेन किया गया मालूम हुआ, जिस पर शासन सचिव और रजिस्ट्रार, दोनों ही असहज दिखी।

गुणवत्तापूर्वक बैंकिंग का दिखा अभाव

दो दिन की चर्चा के उपरांत यह महसूस किया गया कि जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में गुणवत्तापूर्वक बैंकिंग नहीं हो रही। बैंकिंग के नाम पर केवल अल्पकालीन फसली ऋण और सरकारी योजनाओं को ढोया जा रहा है। व्यवसाय विविधिता के मामले में, राज्य के डीसीसीबी, वाणिज्यिक बैंक तो छोडिय़े, दक्षिण भारत के सहकारी बैंकों के सामने भी नहीं ठहरते। डीसीसीबी के पास न केवल अच्छी ऋण योजनाओं का अभाव देखा गया, बल्कि इसके लिए पिछले एक दशक में कोई उत्साह भी प्रतीत नहीं हुआ। दोनों आईएएस अधिकारियों द्वारा प्रबंध निदेशकों से आगामी एक साल और आगामी 5 साल के विजन को लेकर टिप्पणी चाही गयी थी, जबकि प्रबंध निदेशकगण आगामी 4 जून को लोकसभा चुनाव परिणाम के पश्चात, अपनी-अपनी कुर्सी को लेकर भी आशंकित दिखे।

पांच बैंंको को रिकॉल किया

बैठक के एजेंडा में हालांकि, फिट एवं प्रोपट क्राइटेरिया को लेकर किसी प्रकार का बिन्दू नहीं रखा गया था क्योंकि यह राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र का विषय था, तथापि, कुछ एमडी तो पीपीटी के माध्यम से बैंक की प्रगति का ब्यौरा भी ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पाये, जिससे शासन सचिव और रजिस्ट्रार को उनकी योग्यता, सक्षमता और बैंकिंग समझ का सहज ही ज्ञान हो गया। यह स्थिति तब थी, जब अपेक्स बैंक की ओर से बैठक से पांच दिन पहले, 2 मई को ही पीपीटी के लिए विस्तार से आवश्यक निर्देश जारी कर दिये गये थे और बाकायदा एक प्रपत्र भेज दिया गया था, जिसमें केवल डेटा फीडिंग कर, उसका प्रस्तुतिकरण देना था। यही कारण रहा कि भीलवाड़ा सहित पांच बैंकों के प्रबंध निदेशकों को आगामी दिनों में पुन: कॉल किया गया है।

ऋण, निवेश, जमाओं और पैरामीटर पर फोकस

समीक्षा बैठक के दौरान, प्रत्येक डीसीसीबी के प्रबंध निदेशक द्वारा पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से बैंक के मुख्य पैरामीटर्स, जैसे – कृषि/गैर कृषि ऋण एवं अग्रिम और आउटस्टेंडिंग, गैर-कृषि ऋण में निवेश, जमाओं की स्थिति, हिस्सा पूंजी, ऋणी सदस्यों की संख्या, शुद्ध लाभ/हानि, एनपीए (राशि और प्रतिशत), सीआरएआर, कोष एवं निधियों, सकल एवं शुद्ध एनपीए, ऋण जमा अनुपात (सीडीआर) सहित नाबार्ड वैधानिक मापदंडों की पालना और राज्य सरकार की विभिन्न बजट घोषणाओं की प्रगति का प्रस्तुतीकरण दिया गया। प्रबंध निदेशकों से शाखावार गैर-कृषक खाताधारकों की सूची, शेयर कैपिटल, रिजर्व, स्वयं के कोष, निवल मूल्य, जमाओं की लागत, प्रति ब्रांच बिजनेस, प्रति कर्मचारी बिजनेस, वित्तीय मार्जिन के बारे में प्रगति का ब्यौरा प्रस्तुत करने के लिए कहा गया।

पैक्स पर भी हुई चर्चा

इसके अलावा, पैक्स को लेकर भी डेटा साझा किया गया। प्रबंध निदेशकों द्वारा डीसीसीबी वाइज पैक्स की संख्या, पैक्स के कुल सदस्यों की संख्या, ऋणी सदस्यों की संख्या, साल 2023-24 में ऋण प्राप्त करने वाले कुल सदस्यों एवं नये सदस्यों की संख्या पर भी प्रस्तुतिकरण दिया गया। राज्य सरकार की बजट घोषणा संख्या 171 के तहत सहकारी ग्रामीण परिवार आजीविका मिशन और राजीविका समूहों की महिलाओं को ऋण वितरण, बजट घोषणा संख्या 172 के तहत खेत में आवास योजना और दीर्घकालीन ऋण योजना में ऋण वितरण, बजट घोषणा संख्या 180 के अंतर्गत पैक्स कम्प्यूटरीकरण की प्रगति केे आंकड़ें भी प्रस्तुत किये गये।

नाबार्ड के निरीक्षण में अक्सर केंद्रीय सहकारी बैंकों में वैधानिक मापदंडों का पालन नहीं करने की टिप्पणी अंकित की जाती है। इस बार समीक्षा बैठक में नाबार्ड के वैधानिक मापदंडों पर विशेष फोकस रहा। बैठक में डीसीसीबी में बैंकिंग विनिमय अधिनियम, 1949 की धारा 23(3)(बी), धारा 26 एवं 26ए, धारा 9 और धारा 35ए के अनुपालन पर प्रस्तुतिकरण देना पड़ा।

शासन सचिव और रजिस्ट्रार ने दिये निर्देश

समीक्षा बैठक के आधार पर प्रशासक श्रीमती शुचि त्यागी ने वाणिज्यिक बैंकों की तर्ज पर भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार बैंक की नवीन शाखाएं खोलने एवं जमाओं में वृद्धि करने, मध्यकालीन एवं दीर्घकालीन ऋण मदों में कुल ऋण वितरण का कम से कम 25 प्रतिशत ऋण वितरण हेतु लक्ष्य निर्धारित करने के लिए निर्देशित किया। साथ ही, बैंक स्तर पर सम्बंधित जिला कलक्टर/प्रशासक के माध्यम से बैंक की प्रगति हेतु नवाचार किये जाने का निर्देश दिया गया। सहकारिता रजिस्ट्रार, श्रीमती अर्चना सिंह ने एनपीए ऋण की वसूली पर विशेष ध्यान दिये जाने की आवश्यता जतायी।

योजनाओं की समयबद्ध क्रियान्विति की अपेक्षा

अपेक्स बैंक के प्रबंध निदेशक भोमाराम ने कन्द्रीय सहकारी बैंकों को भारत सरकार की मंशा के अनुरूप, सहकार ने स्मृद्धि के दृष्टिकोण से विभिन्न योजनाएं क्रियान्वित करने हेतु निर्देशित किया। केंद्रीय सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशकों से पैक्स कम्प्यूटरीकरण, जन औषधि केन्द्र एवं एफपीओ योजनाओं की समयबद्ध क्रियान्वित की अपेक्षा की गयी।
बैठक के दौरान, सहकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के राज्य नोडल अधिकारी इन्दर सिंह गुर्जर, अतिरिक्त रजिस्ट्रार ने योजना के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला जबकि राइसेम के निदेशक जितेंद्र प्रसाद, अतिरिक्त रजिस्ट्रार द्वारा केंद्रीय सहकारी बैंकों के कार्मिकों के प्रशिक्षण को लेकर प्रस्तावित कार्यक्रम से अवगत कराया।

 

 

 

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