सहकारी बैंक अपने सदस्य को आरटीआई के माध्यम से सूचना उपलब्ध कराने से इंकार नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट
सहकारिता रजिस्ट्रार को बैंक के रिकॉर्ड तक पहुंचने का अधिकार है, तो आरटीआई अधिनियम के तहत उसके सदस्यों को वह जानकारी पाने का अधिकार – सर्वोच्च न्यायालय
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। सुप्रीम कोर्ट ने सहकारी बैंक और सहकारी संस्था को आरटीआई (RTI) के दायरे में मानते हुए, ऐतिहासिक निर्णय सुनाया कि सोसाइटी के सदस्य को आरटीआई के तहत, संबंधित सहकारी संस्था/सहकारी बैंक की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त है। सर्वोच्च न्यायालय ने 26 अक्टूबर 2026 को एक मामले को निस्तारित करते हुए, आदेश दिया कि आवेदक को दो सप्ताह के भीतर आरटीआई के तहत मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएं। यह मामला केरल के मुप्पथादम सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड से जुड़ा एक आरटीआई विवाद है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
बैंक के एक सदस्य ने सहकारी समितियों के संयुक्त रजिस्ट्रार (जनरल) के समक्ष आरटीआई आवेदन दाखिल कर दो दस्तावेज मांगे थे। पहला, बैंक और एक श्रम सहकारी समिति के बीच हुआ भवन निर्माण का समझौता, और दूसरा, बैंक की पिछली वार्षिक आम सभा की बैठक की कार्यवाही का रिकॉर्ड/मिनट्स।
बैंक ने जानकारी देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि वह सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ नहीं है। बैंक ने आरटीआई आवेदन खारिज कर दिया। सदस्य द्वारा उच्चाधिकारियों को की गई प्रथम अपील भी खारिज कर दी गई और राज्य सूचना आयुक्त से भी राहत नहीं मिली।
हाईकोर्ट के सिंगल जज ने भी बैंक के फैसले को सही ठहराया, लेकिन डिवीजन बेंच ने मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया। इसके बाद राज्य सूचना आयुक्त, हाईकोर्ट के सिंगल जज और डिवीजन बेंच, तीनों ने सदस्य के पक्ष में फैसला देते हुए दस्तावेज पाने का अधिकार स्वीकार किया। बैंक ने डिवीजन बेंच के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की बेंच ने बैंक की अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि भले ही कोई सहकारी बैंक सीधे तौर पर ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ न हो, लेकिन यदि किसी अन्य कानून (जैसे केरल को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट) के तहत सहकारिता रजिस्ट्रार को उस बैंक के रिकॉर्ड तक पहुंचने का अधिकार है, तो आरटीआई अधिनियम की धारा 2(एफ) के तहत उसके सदस्यों को वह जानकारी पाने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंक के किसी सदस्य को उसकी संस्था के कामकाज से जुड़े दस्तावेज यह कहकर नहीं रोके जा सकते कि वह बैंक की निजी या आंतरिक बात है।

