फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले बैंकिंग सहायक की सेवा समाप्त
अपेक्स बैंक ने जारी किया बर्खास्तगी का आदेश
जयपुर, 4 अक्टूबर (मुखपत्र)। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामलों में दी राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (अपेक्स बैंक), जयपुर ने सख्त कार्रवाई की है। अपेक्स बैंक के प्रबंध निदेशक रणजीत सिंह चूंडावत द्वारा जारी आदेश के अनुसार, बैंकिंग सहायक के पद पर प्रोविजनल रूप से नियुक्त कर्मचारी राकेश सांगवा की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। बैंक प्रबंधन ने आरोपी कर्मचारी को अब तक मिले वेतन एवं पीएफ मद की कुल 1,86,425 रुपए, 7 दिन में लौटाने का निर्देश दिया है। समय पर राशि जमा न कराने पर आरोपी के खिलाफ वसूली एवं आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा।
फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट से हथियाई थी नौकरी
जारी आदेश के अनुसार, नागौर जिले के माताजी का बास निवासी राकेश सांगवा पुत्र राम किशोर को 15 जुलाई 2025 को प्रोविजनल नियुक्ति पत्र जारी किया गया था। चयन प्रक्रिया के दौरान आरोपी ने दिव्यांगजन (RPwD) कोटा के तहत नौकरी प्राप्त करने के लिए 41 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था तथा शपथ पत्र देकर दस्तावेजों को सही व वैध बताया था।
मेडिकल बोर्ड की जांच में हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
दस्तावेजों के सत्यापन के लिए जब सामुदायिक अस्पताल, अजमेर के अधीक्षक कार्यालय स्थित अधिकृत मेडिकल बोर्ड (SMS अस्पताल, जयपुर के विशेषज्ञों द्वारा) से आरोपी के दिव्यांगता प्रमाण पत्र का पुन: परीक्षण कराया गया, तो पाया गया कि आरोपी में मानसिक बीमारी या बौद्धिक दिव्यांगता का कोई साक्ष्य नहीं है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि आरोपी की दिव्यांगता RPwD एक्ट 2016 के तहत निर्धारित मापदंडों के अनुसार नहीं है।
तत्काली बर्खास्तगी
मेडिकल बोर्ड की जांच रिपोर्ट के आधार पर अपेक्स बैंक के प्रबंध निदेशक रणजीतसिंह चूंडवत द्वारा 29 सितंबर 2026 को एक आदेश जारी कर, राकेश सांवगा की प्रोविजनल नियुक्ति निरस्त कर दी। चूंडावत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कूटरचित एवं फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर धोखाधड़ी करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत मिलने वाले संरक्षण को समाप्त करता है।
7 दिन में वसूली और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी
सेवा काल के दौरान प्राप्त 1,86,425 रुपए, 7 दिन के भीतर बैंक में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में राशि जमा न कराने पर बैंक द्वारा वसूली की अग्रिम कानूनी कार्रवाई और आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा।
राणावत को भी इसी तरह बर्खास्त किया गया था
उल्लेखनीय है कि राकेश सांगवा से पहले, चित्तौडग़ढ़ निवासी विजेंद्रसिंह राणावत, प्रबंधक, अपेक्स बैंक को भी झूठा विकलांगता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर, रणजीतसिंह चूंडावत द्वारा ही बैंक की सेवा से बर्खास्त किया गया था। बाद में, हाईकोर्ट के आदेश पर, दोबारा मेडिकल हुआ तो जोधपुर एम्स ने राणावत को 70 प्रतिशत स्थाई विकलांगता का प्रमाणपत्र बनाकर दे दिया।
जो बैंक पहले 42 प्रतिशत विकलांगता पर सहमत नहीं था, उसने बाद में राणावत द्वारा प्रस्तुत 70 प्रतिशत विकलांगता को सही मानते हुए, विजेंद्रसिंह को सेवा में बहाल कर दिया। इसके लिए बैंक ने कानूनी सलाहकार की सेवाएं लिया जाना भी उचित नहीं माना। उस समय एमडी के आदेश पर राणावत के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करायी गई थी, जो उसकी बहाली से पहले वापिस नहीं ली गई, न ही उस पर पुलिस द्वारा एफआर लगाने या चालान पेश करने का इंतजार किया गया। वही राणावत अब अपेक्स बैंक के प्रधान कार्यालय में पदस्थ है। जबकि इससे पहले, वो बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय, उदयपुर में पदस्थापित था।

