सहकारिता

राष्ट्रीय सहकारी सुधार अभियान की जयपुर से हुई शुरूआत, एम-पैक्स के गठन एवं सुदृढ़ीकरण पर मंथन

विकेन्द्रीकृत अनाज भंडारण, पैक्स के विस्तार, डेयरी एवं मत्स्य सहकारी संस्थाओं, ‘सहकारों के बीच सहयोग’ तथा वर्ष 2026-27 हेतु राज्यवार कार्ययोजनाओं पर रहा विशेष फोकस

जयपुर, 24 अप्रेल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र के माध्यम से समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के विजऩ के अनुरूप, सहकारिता मंत्रालय देशभर में क्षेत्रीय कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित कर रहा है, ताकि सहकारी क्षेत्र में परिवर्तनकारी सुधारों को गति दी जा सके। इन पहलों का उद्देश्य आधुनिक अनाज भंडारण सुविधाओं को किसानों के निकटतम स्तर तक पहुंचाना, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के नेटवर्क को सशक्त एवं विस्तारित करना, सहकारी गतिविधियों में विविधता लाना तथा सहकारी संस्थाओं के सदस्यों एवं लाभार्थियों के कल्याण हेतु ‘सहकारिता में सहकार’ को बढ़ावा देना है।

इसी राष्ट्रव्यापी पहल के अंतर्गत ‘सहकार से समृद्धि’ विषय पर प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला शुक्रवार को होटल ललित, जयपुर में आयोजित की गई, जिसमें भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, नाबार्ड, राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं तथा विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह कार्यशाला नीतिगत समीक्षा, प्रगति आकलन, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान तथा जमीनी स्तर पर सहकारी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु समयबद्ध कार्ययोजनाओं की तैयारी के लिए एक प्रभावी मंच के रूप में आयोजित की गई।

यह कार्यशाला प्रमुख सहकारी पहलों की प्रगति की समीक्षा, क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों पर चर्चा तथा पैक्स, डेयरी सहकारी संस्थाओं, मत्स्य सहकारी संस्थाओं एवं देशभर में भंडारण अवसंरचना की पहुंच और कार्यक्षमता बढ़ाने हेतु व्यावहारिक रणनीतियों को अंतिम रूप देने का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई।

सहकारी क्षेत्र को रोजगारोन्मुखी बनाने पर जोर

उद्घाटन सत्र में स्वागत उद्बोधन के पश्चात नाबार्ड के अध्यक्ष, सहकारिता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ जैन तथा सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीषकुमार भूटानी द्वारा संबोधन दिया गया। विचार-विमर्श में सहकारी क्षेत्र को ग्रामीण समृद्धि, रोजगार सृजन तथा समावेशी आर्थिक विकास के प्रमुख आधार के रूप में सशक्त बनाने पर बल दिया गया।

अनाज भंडारण योजना की प्रगति की समीक्षा

कार्यशाला के एक प्रमुख सत्र में सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। इसमें ऋण स्वीकृति प्रक्रियाओं की निगरानी, कृषि विपणन अवसंरचना के अंतर्गत क्रियान्वयन, पैक्स की पहचान, भूमि चयन, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन की तैयारी तथा संचालन समन्वय पर चर्चा हुई। राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने सितंबर 2026 और सितंबर 2027 तक अनाज भंडारण लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु अपनी कार्ययोजना भी प्रस्तुत कीं।

गोदाम विकास की प्रगति पर प्रस्तुति

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड), राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ), सीडब्ल्यूसी, तथा एसडब्ल्यूसी के प्रतिनिधियों ने गोदाम विकास की प्रगति पर प्रस्तुति दी, जिनमें स्थान चयन, जिला-वार आवश्यकता, किराया तंत्र, संकेतात्मक दरें तथा भंडारण अवसंरचना के संचालन की योजना शामिल थी।

कार्यशाला में डब्ल्यूडीआरए रूपरेखा पर एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें पैक्स को वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी के अंतर्गत जोडऩे की प्रक्रिया, सरलीकृत प्रक्रियाएं, पात्रता मानदंड, प्रशिक्षण सहयोग तथा सहकारी संस्थाओं को उपलब्ध लाभों की जानकारी दी गई।

एम-पैक्स का गठन एवं सुदृढ़ीकरण

एक अन्य प्रमुख विषय, वर्ष 2026-27 हेतु बहुउद्देशीय पैक्स (एम-पैक्स) के गठन एवं सुदृढ़ीकरण का रहा। राज्यों ने नए गठन, पंजीकरण, संबद्धता एवं व्यवसाय विकास हेतु जिला-वार लक्ष्य साझा किए। ऋण गतिविधियों का विस्तार, जमा राशि में वृद्धि, व्यवसायों में विविधता तथा सुनियोजित हस्तक्षेपों के माध्यम से पैक्स की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हेतु रणनीतियों पर चर्चा की गई।

डेयरी सहकारिताओं के सुदृढ़ीकरण पर चर्चा

डेयरी एवं मत्स्य सहकारी संस्थाओं पर आयोजित सत्रों में मौजूदा संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण, सदस्यता वृद्धि, उत्पादकता बढ़ाने, खरीद प्रणाली को मजबूत करने तथा टिकाऊ मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया। कमजोर सहकारी संस्थाओं के पुनर्जीवन तथा संस्थागत वित्तीय प्रणालियों से उनके एकीकरण पर भी चर्चा हुई।

सहकारी क्षेत्र का आधुनिकीकरण

सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र को आधुनिकीकरण, पारदर्शिता, पेशेवर प्रबंधन तथा राज्यों एवं जमीनी संस्थाओं की सशक्त भागीदारी के माध्यम से भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। जयपुर कार्यशाला से सहकारी सुधारों के क्रियान्वयन को और गति मिलने तथा ‘सहकार से समृद्धि’ के विजऩ को सार्थक रूप से आगे बढ़ाने की अपेक्षा है।

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