राज्य सहकारी बैंक में वित्तीय अनुशासन तार-तार, सरकार की मंजूरी के बिना ही बैंक के लाभ-हानि खाते से कर दिया 95 लाख रुपये का भुगतान
जयपुर, 28 नवंबर (मुखपत्र)। राजस्थान राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड, (अपेक्स बैंक), जयपुर में वित्तीय अनुशासन को तार-तार करते हुए बैंक के लाभ-हानि खाते से पैक्स कम्प्यूटराइजेश प्रोजेक्ट के लिए सिस्टम इंटिग्रेटर फर्म ओसवाल कम्प्यूटर्स एवं कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड को लगभग एक करोड़ रुपये का भुगतान किये जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। इस विषय पर अपेक्स बैंक प्रबंधन ने चुप्पी साध रखी है और यह भी बताने को तैयार नहीं है कि उक्त राशि अभी तक केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार से अपेक्स बैंक को पुन: प्राप्त हुई है अथवा नहीं और वित्तीय अनुशासन को भंग करने वालों क्यों बक्शा गया? इस अग्रिम राशि के भुगतान से बैंक को हुए ब्याज के नुकसान की भरपाई कैसे होगी?
विलम्ब से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अपेक्स बैंक में शीर्ष पदों पर कार्यरत, राजस्थान राज्य सहकारिता सेवा के दो अधिकारियों की विशेष रुचि के चलते ओसवाल कम्प्यूटर्स एवं कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड को 95 लाख 11 हजार 67 रुपये का अग्रिम भुगतान बैंक के लाभ-हानि खाते से किया गया, जबकि यह राशि भारत सरकार एवं राजस्थान सरकार से प्राप्त होने के बाद किये जाने का नियम है।
राजस्थान में पैक्स कंप्यूटराइजेशन प्रोजेक्ट का काम कर रही फर्म ओसवाल कम्प्यूटर्स एवं कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड को समय-समय पर भुगतान किये जाने के लिए प्रक्रिया निर्धारित है, जिसके अनुसार, फर्म द्वारा बिल प्रस्तुत किये जाने पर उसे कार्यालय, रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां में अनुमोदन के लिए भेजा जाता है। रजिस्ट्रार कार्यालय से ये बिल वित्त विभाग भेजे जाते हैं। वित्त विभाग से बिलों की मंजूरी होने के बाद, पुन: रजिस्ट्रार कार्यालय होते हुए ये बिल अपेक्स बैंक आते हैं, जहां पर पैक्स कंप्यूटराइजेशन के लिए संधारित एसएनए खाते से फर्म को सीधे ही भुगतान प्राप्त हो जाता है, परंतु अक्टूबर 2025 में ओसवाल कम्प्यूटर्स एवं कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत 95 लाख 11 हजार 67 रुपये के बिलों का अपेक्स बैंक के स्तर पर भी भुगतान कर दिया गया।
अनुभाग ने ऐतराज किया, जीएम ने टिप्पणी को ही अस्वीकार कर दिया
सूत्र बताते हैं कि ओसवाल कम्प्यूटर्स एवं कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा भुगतान के लिए बिल प्रस्तुत किये जाने पर संबंधित अनुभाग द्वारा स्थापित प्रक्रिया के पालन के तहत ही एसएनए खाते से भुगतान किये जाने और भुगतान के लिए अन्य विकल्प पर विचार करने के लिए नाबार्ड/वित्त विभाग से परामर्श किसे जाने की सुझावित करते हुए टिप्पणी (पैरा नंबर 869) अंकित कर, पत्रावली डीजीएम (ईडीपी) के समक्ष प्रस्तुत की गयी। डीजीएम (इडीपी) ने बिना कोई टिप्पणी किये इस पत्रावली को कार्यवाहक जीएम (एएंडपी) ललित मीणा, सहायक रजिस्ट्रार की ओर बढा दी। ललित मीणा ने बतौर लिंक ऑफिसर एवं जीएम (एएंडएफ) अनुभाग की ओर से अंकित टिप्पणी (पैरा नंबर 869) को अस्वीकार करते हुए, दिनांक 16 अक्टूबर 2025 को भुगतान किया जाना प्रस्तावित कर दिया।
एमडी ने दी भुगतान की स्वीकृति
इसके उपरांत प्रबंध निदेशक संजय पाठक ने प्रशासक महोदय से इस मामले में पहले से ही चर्चा किया जाना अंकित करते हुए भुगतान की स्वीकृति प्रदान कर दी। फिर आनन-फानन में, वित्त विभाग की अनिवार्य स्वीकृति का इंतजार किये बिना ही, 16 अक्टूबर 2025 को अपेक्स बैंक के लाभ/हानि खाते से सिस्टम इंटीग्रेटर फर्म ओसवाल कम्प्यूटर्स एवं कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड को 95 लाख 11 हजार 67 रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसमें 91 लाख 88 हजार 655 रुपये की राशि सिस्टम इंटीग्रेटर फर्म के बैंक खाते में ट्रांसफर की गयी जबकि शेष 3 लाख 22 हजार 412 रुपये की राशि की आयकर टीसीएस, सीजीएसटी टीडीएस और एसजीएसटी टीडीएस के लिये कटौती कर ली गयी।
बैंक प्रबंधन ने नहीं दिया सवालों का जवाब

इस मामले में अपेक्स बैंक प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए प्रबंध निदेशक संजय पाठक को व्हाट्सएप पर प्रश्न भेजे गये, लेकिन उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। रिमांडर दिये जाने पर वे खामोशी की चादर ओढ़े रहे। इसलिये, वित्तीय अनुशासन भंग करने की नौबत क्यों आयी?, इस सवाल सहित ये प्रश्र भी अनुतरित हैं कि जो राशि सिस्टम इंटीग्रेटर फर्म को दी गयी, क्या वो बैंक को पुन: प्राप्त हो गयी है और इस राशि का अग्रिम भुगतान किये जाने पर वित्तीय अनुशासन भंग करने वालों पर एवं बैंक को हुए ब्याज के नुकसान की भरपाई कब और कैसे होगी।
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