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पैक्स को विकास के इंजन के रूप में सशक्त बनाने पर रणनीतिक मंथन

नई दिल्ली, 30 मार्च। सहकारिता क्षेत्र को देश के विकास के सशक्त इंजन के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत 30 मार्च 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के कार्यान्वयन पथ एवं आगे की राह’ विषय पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। सहकारिता मंत्रालय और त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कॉन्क्लेव में देशभर से नीति-निर्माताओं, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों एवं हितधारकों ने भाग लेते हुए नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक विचार-विमर्श किया।

कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि सहकारिता भारत की सामाजिक-आर्थिक संरचना का एक मजबूत स्तंभ रही है, जिसने दशकों से ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभाई है। बदलते समय, बढ़ती ग्रामीण आकांक्षाओं और विकसित होती अर्थव्यवस्था के अनुरूप राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 एक व्यापक और दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत करती है, जो सहकारिता को देश के विकास के दूसरे इंजन के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगी। इस नीति का लक्ष्य सहकारिता के माध्यम से समावेशी विकास को गति देना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करना और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित करना है।

सहकारिता की नींव को सुदृढ़ करना

उन्होंने कहा कि यह नीति व्यापक परामर्श प्रक्रिया के बाद तैयार की गई है, जिसमें 48 सदस्यीय राष्ट्रीय समिति द्वारा 17 बैठकों और 4 क्षेत्रीय कार्यशालाओं के माध्यम से देशभर के सुझावों को शामिल किया गया। उन्होंने नीति के प्रमुख स्तंभों का उल्लेख करते हुए कहा कि सहकारिता की नींव को सुदृढ़ करना, सहकारी ढांचे का विस्तार, व्यावसायिक इकोसिस्टम का विकास, पारदर्शी एवं पेशेवर प्रबंधन, सदस्य-केंद्रितता को बढ़ावा, नए क्षेत्रों में विस्तार और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना इसके मुख्य आयाम हैं। उन्होंने राज्यों को अपनी सहकारिता नीतियां बनाने के लिए प्रोत्साहित करने की भी जानकारी दी, जिससे सहकारिता आंदोलन को और गति मिल सके।

पैक्स को 25 से अधिक गतिविधियों में सक्षम बनाना

गुर्जर ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय ने राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के अनुरूप अनेक परिवर्तनकारी पहलें शुरू की हैं, जिनमें पैक्स को बहुउद्देशीय आर्थिक इकाइयों में विकसित करना, उन्हें 25 से अधिक गतिविधियों में सक्षम बनाना, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना, श्वेत क्रांति 2.0, राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस, सहकारी रैंकिंग फ्रेमवर्क तथा ‘भारत टैक्सी’ जैसी अभिनव पहलों का क्रियान्वयन शामिल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कॉन्क्लेव नीति के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा और सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा प्रदान करेगा।

80 हजार से अधिक पैक्स का कंप्यूटरीकरण

सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीषकुमार भूटानी ने कहा कि देश में 80 हजार से अधिक पैक्स का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है, जिससे उन्हें बहुउद्देशीय, व्यावसायिक और अधिक उपयोगी इकाइयों में परिवर्तित किया जा सके। उन्होंने कहा कि पैक्स स्तर पर भंडारण का विकेंद्रीकरण, किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित करना, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना तथा लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाना मंत्रालय की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

सहकारिता समावेशी और सतत विकास का एक प्रभावशाली माध्यम

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रो. एस. महेंद्र देव ने अपने विशेष व्याख्यान में सहकारिता क्षेत्र के योगदान को तीन गुना करने की रणनीतियों पर बल देते हुए कहा कि सहकारिता समावेशी और सतत विकास का एक प्रभावशाली माध्यम बन सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड के निदेशक सतीश मराठे ने कहा कि अंतिम छोर तक किफायती ऋण उपलब्ध कराने में सहकारिता क्षेत्र की भूमिका सबसे अधिक प्रभावी है।

विषयगत सत्रों का आयोजन

कॉन्क्लेव के दौरान विभिन्न विषयगत सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, पैक्स को विकास के इंजन के रूप में सशक्त बनाना, सदस्य शिक्षा, युवाओं एवं महिलाओं की भागीदारी, जैविक उत्पाद बाजार में नेतृत्व तथा सहकारी ऋण एवं बैंकिंग जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। ब्रेकआउट सत्रों और ओपन हाउस चर्चाओं के माध्यम से नीति के क्रियान्वयन हेतु व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए गए तथा समापन सत्र में आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।

 

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