सीएम-ओटीएस में रिकार्ड वसूली, लॉन्गटर्म सैक्टर को मिलेगी आर्थिक संजीवनी
147 करोड़ रुपये की नगद वसूली, ऋणियों को मिली 191 करोड़ रुपये की सुकूनभरी राहत
जयपुर, 3 अप्रेल (मुखपत्र) । राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक लिमिटेड (RSLDB) के प्रेरणादायक मार्गदर्शन एवं प्रभावशाली मोनेटरिंग और प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों (PLDB) की कड़ी मेहनत के बूते दीर्घकालीन सहकारी ऋण संरचना को आर्थिक संजीवनी मिल गयी है। आरएसएलडीबी के ऊर्जावान प्रबंध निदेशक जितेंद्र प्रसाद शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश के 36 पीएलडीबी द्वारा मुख्यमंत्री अवधिपार ब्याज राहत एकमुश्त समझौता योजना 2025-26 (सीएम-ओटीएस) के अंतर्गत दीर्घकालीन सैक्टर के हजारों अवधिपार ऋणियों को 191 करोड़ रुपये से अधिक राहत प्रदान करते हुए, राहत एवं नगदी सहित 338 करोड़ रुपये की रिकार्ड वसूली की गयी है।
आधिकारिक रूप से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 36 प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों के स्तर पर 29955 ऋणी सदस्यों की ओर बकाया अवधिपार राशि 868.18 करोड़ रुपये के विरुद्ध 31 मार्च 2026 तक 11087 ऋणी सदस्यों से 146.95 करोड़ रुपये की नकद वसूली करके 10534 ऋणी सदस्यों को 191.23 करोड़ रुपये की राहत प्रदान की गई। राहत एवं नकद वसूली सहित कुल 338.18 करोड़ रुपये के अवधिपार ऋण का निस्तारण हो चुका है, जो कुल अवधिपार मांग का 38.88 प्रतिशत है।
प्रतिशत वसूली में बिलाड़ा, चित्तौडग़ढ़ और बीकानेर अव्वल
प्रदेश के 36 में से 21 पीएलडीबी द्वारा राज्य औसत से अधिक वसूली की गयी। वसूली प्रतिशत में टॉप टन पीएलडीबी में बिलाड़ा (91.46 प्रतिशत), चित्तौडग़ढ़ (86.17 प्रतिशत), बीकानेर (82.74 प्रतिशत), बालोतरा (77.93 प्रतिशत), जोधपुर (74.36 प्रतिशत), जैसलमेर (65.98 प्रतिशत), सीकर (63.01 प्रतिशत), रायसिंहनगर (64.26 प्रतिशत), दौसा (58.39 प्रतिशत) और गंगानगर (58.13 प्रतिशत) रहे। इनके अलावा, नागौर, डूंगरपुर, अलवर, भीलवाड़ा, चूरू, राजसमंद और भरतपुर पीएलडीबी ने 50 प्रतिशत से अधिक जबकि झुंझुनूं, अजमेर, प्रतापगढ़ और हनुमानगढ़ पीएलडीबी ने 45 प्रतिशत से अधिक ऋण वसूली की।
राहत एवं वसूली का रिकार्ड कायम करने वाले बैंक
ऋण राहत सहित नगद वसूली की दृष्टि से सीकर (3102 लाख), जालोर (3088 लाख), अलवर (1933 लाख), राजसमंद (1847 लाख), झालावाड़ (1821 लाख), जयपुर (1474 लाख), चूरू (1434 लाख), कोटा (1402 लाख), रायसिंहनगर (1283 लाख), जोधपुर (1192 लाख), टोंक (1127 लाख) और भीलवाड़ा (1110 लाख रुपये) टॉप 12 पीएलडीबी में शामिल रहे।
नगद वसूली में इन बैंकों ने बाजी मारी
पीएलडीबी सीकर ने 1339 लाख, जालोर ने 1226 लाख, राजसमंद ने 1048 लाख, रायसिंहनगर ने 707 लाख, जयपुर ने 699 लाख, चूरू ने 681 लाख, झालावाड़ ने 672 लाख, अलवर ने 668 लाख, भीलवाड़ा ने 551 लाख, जोधपुर ने 532 लाख, कोटा ने 443 लाख और टोंक ने 408 लाख रुपये की नगद वसूली की।
ऋणियों को राहत देने में अग्रणी पीएलडीबी
इसी प्रकार, योजना के अंतर्गत 15 पीएलडीबी ने अपने अवधिपार ऋणियों को 500 लाख रुपये या इससे अधिक राशि की राहत प्रदान की। इनमें जालौर ने 2061 लाख, जोधपुर ने 659 लाख, झालावाड़ ने 1149 लाख, कोटा ने 958 लाख, सीकर ने 1763 लाख, जैसलमेर ने 548 लाख, रायसिंहनगर ने 575 लाख, जयपुर ने 776 लाख, अलवर ने 1264 लाख, भरतपुर ने 636 लाख, सवाईमाधोपुर ने 532 लाख, हिण्डौन ने 600 लाख, चूरू ने 753 लाख, भीलवाड़ा ने 559 लाख, टोंक ने 719 लाख और राजमंसद ने 798 लाख रुपये की राहत प्रदान की।
बैंकों को मिला आर्थिक संबल
प्रबंध निदेशक जितेंद्र प्रसाद ने अवधिपार ऋण प्रकरणों में अभूतपूर्व वसूली करने एवं राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप ऋणियों को अधिकतम राहत प्रदान करने में सतत योगदान देने पर राज्य बैंक और प्राथमिक बैंकों के अधिकारियों, कर्मचारियों की पीठ थपथपाते हुए उन्हें शुभकामनायें प्रेषित की हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सीएम-ओटीएस से हुई वसूली से दीर्घकालीन सहकारी साख सरंचना को मजबूत आर्थिक संबल मिलेगा और ये बैंक, आगामी अनेक वर्षों तक कृषकों के आर्थिक एवं सामाजिक उन्नयन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
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