सहकारिता

वचनभंगी सरकार के खिलाफ सहकारी बैंक कार्मिकों के आंदोलन का कल से आगाज

– कुल 1401.56 करोड़ रुपये में से ऋण माफी योजना के 765 करोड़ रुपये जून, 2019 से सरकार की ओर बकाया

– सरकार की वादाखिलाफी और लेटलतीफी से 11 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक घाटे में आ चुके

जयपुर, 3 फरवरी (मुखपत्र)। राज्य सरकार की वादाखिलाफी से आक्रोषित सहकारी बैंक कर्मियों ने आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCB) का सरकार की ओर बकाया 1400 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। ऋण माफी योजना की बकाया राशि चुकाने के वचन से मुकरने वाली राज्य सरकार के विरूद्ध ऑल राजस्थान कोऑपरेटिव बैंक एम्प्लॉइज यूनियन और ऑल राजस्थान कोऑपरेटिव बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन ने आंदोलन की घोषणा की है।

इसकी शुरूआत 4 फरवरी 2026 को राज्य के समस्त केंद्रीय सहकारी बैंक (डीसीसीबी) के प्रधान कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन से होने जा रही है। तदोपरांत 9 फरवरी को नेहरू सहकार भवन, जयपुर में धरना-प्रदर्शन किया जायेगा। इसी दिन सहकारी बैंकों में हड़ताल की कॉल पर भी विचार किया जा सकता है। प्रदेश नेतृत्व के कार्यक्रम की पालना में जिला इकाईयों द्वारा केंद्रीय सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशक के माध्यम से सरकार (सीएम, वित्त मंत्री, सहकारिता मंत्री एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां) को ज्ञापन प्रेषित कर, अपनी मांगों व आंदोलन के कार्यक्रम से अवगत कराया जा रहा है।

राज्य सरकार की ओर 1401 करोड़ 56 हजार रुपये बकाया

राज्य सरकार के वचनभंग के कारण प्रदेश में जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। डीसीसीबी का राज्य सरकार की ओर 1401 करोड़ 56 हजार रुपये बकाया है। इसमें से ऋण माफी ब्याज के 765 करोड़ रुपये जून, 2019 से बकाया चले आ रहे हैं। अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में जब सहकारी बैंकों के किसानों के लिए ऋण माफी की घोषणा की गयी, तब सरकार की ओर से समस्त राशि का भुगतान जून, 2019 तक किये जाने की वचनबद्धता व्यक्त की गयी थी।

लेकिन सरकार ने ऋण माफी ब्याज पेटे 765 करोड़ रुपये का आदिनांक तक भुगतान नहीं किया। दुर्भाग्य से सहकारी बैंकों को इस राशि पर किसी प्रकार का ब्याज भी देय नहीं है जबकि साधारण ब्याज की दर से गणना करें तो इस राशि पर केंद्रीय सहकारी बैंकों को प्रति वर्ष लगभग 70 करोड़ रुपये के ब्याज का क्षति हो रही है।

इसके अतिरिक्त, 635 करोड़ 98 लाख रुपये ब्याजमुक्त अल्पकालीन फसली ऋण योजना में बकाया हैं। सहकारी बैंकों द्वारा समय पर अल्पकालीन फसली ऋण का समय पर भुगतान करने वाले किसानों को नियमित रूप से ब्याजमुक्त योजना का लाभ दिया जा रहा है, परन्तु सरकार ने इस योजना के प्रारंभ होने की तिथि से आज तक, सहकारी बैंकों को देय ब्याज अनुदान एवं मार्जिन अनुदान का कभी समय पर भुगतान नहीं किया।

11 डीसीसीबी घाटे में

 

सहकार नेता सूरजभान सिंह आमेरा

यूनियन-एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव, सहकार नेता सूरजभान सिंह आमेरा के अनुसार, संगठन की ओर से सरकार को प्रेषित ज्ञापन में सरकार की वादाखिलाफी और लेटलतीफी के कारण, इससे सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव के बारे में बताया गया है। ऋण माफी ब्याज के बकाया 765.56 करोड़ रुपये एवं फसली ऋण वितरण पर ब्याज अनुदान के बकाया 635.98 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं करने के फलस्वरूप राजस्थान के 11 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) घाटे में आ गये हैं। कुछ सहकारी बैंकों का सीआरएआर गिरने से नाबार्ड द्वारा फसली ऋण पुनर्वित्त पर रोक लगा दी गयी है, जिससे किसानों को समुचित ऋण उपलब्ध नहीं हो रहा। इसके चलते सहकारी साख व्यवस्था बाधित होने की आशंका है।

4 फरवरी को प्रधान कार्यालयों के समक्ष धरना-प्रदर्शन

आमेरा ने बताया कि सहकारी बैंकों के बकाया 1401.56 करोड़ रुपये का अतिशीघ्र भुगतान नहीं होने की स्थिति में बैंकों को इस राशि का लेखा पुस्तकों में प्रावधान करना होगा, जिससे वित्तीय वर्ष की समाप्ति में प्रदेश के सभी 29 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के घाटे में आ जायेेंगे, इससे किसानों के लिए पैक्स से अपैक्स तक सहकारी ऋण व्यवस्था चौपट होना तय है। आमेरा ने बताया कि बैंकों की बिगड़ती आर्थिक स्थिति पर पैक्स से अपैक्स तक कार्मिकों के असंतोष से संगठनात्मक आंदोलन में 4 फरवरी 2026 को सभी सीसीबी जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करने तथा 9 फरवरी को सहकार भवन जयपुर पर सहकारी बैंक कर्मियों का प्रान्तीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

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