झीलों की नगरी में होगा राष्ट्रीय सहकारिता पर मंथन, केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के अधिकारी, राज्यों के प्रमुख शासन सचिव व सहकारी रजिस्ट्रार आयेंगे
उदयपुर, 4 दिसम्बर (मुखपत्र)। झीलों की नगरी उदयपुर इस बार राष्ट्रीय स्तर के सहकारी आयोजन की मेजबानी करने जा रही है। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की ओर से 8 एवं 9 जनवरी 2026 को होटल ताज अरावली, उदयपुर में सहकारिता समीक्षा बैठक का आयोजन किया जा रहा है। इसमें आरबीआई व नाबार्ड के अधिकारियों के साथ देश के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव/शासन सचिव, सहकारिता रजिस्ट्रार, केेंद्रीय सहकारिता रजिस्ट्रार, भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के 16 अधिकारियों का दल सम्मिलित होगा। बैठक में भाग लेने वाले अधिकारियों को उदयपुर संभाग के प्रमुख स्थलों एवं श्रेष्ठ सहकारी संस्थाओं (पैक्स) का भ्रमण करवाया जाना भी प्रस्तावित है।
केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीषकुमार भूटानी और राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास, संयुक्त रूप से उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में सहकारिता मंत्रालय की महत्वाकांक्षी पहल ‘सहकार से समृद्धि’ के अंतर्गत संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। देशभर के अनुभव, चुनौतियां और सफल मॉडलों पर मंथन कर सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देने पर फोकस रहेगा। पहले दिन सात एवं दूसरे दिन क्लोजिंग सेरेमनी सहित पांच सत्र होंगे। प्रत्येक सत्र एक घंटे का होगा।
कमेटियों का गठन
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सहकारिता विभाग द्वारा राज्य सहकारिता सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति वाली पर्यवेक्षण कमेटी, टेक्नीकल कमेटी, आवास/पंजीयन कमेटी, परिवहन व्यवस्था कमेटी, स्टॉल एवं एग्जीबिशन कमेटी, स्टेज अरेंजमेट एवं कल्चरल कमेटी, जिला प्रशासन से समन्वय, साइट विजिट एवं दर्शन कमेटी, मीडिया एवं प्रचार-प्रसार कमेटी एवं आवास व्यवस्था कमेटी का गठन किया गया है।
इन कमेटियों में राज्य सहकारिता सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों – भोमाराम, संजय पाठक, आरएस चुंडावत, गुंजन चौबे, आशुतोष भट्ट, नानालाल चावला, अभिलाषा पारीक, राजेंद्र सिंह, संजय शर्मा, मेहजबीन बानो, सुनील व्यास, परेश पंड्या, योगेंद्र सिंह सिसोदिया, लोकेश जोशी, विनोद कोठारी, राजकुमार खांडिया, कौटिल्य भट्ट, प्रमोद कुमार, दीपक रत्नू, अलका भारद्वाज, सुमन बैरवा, और सहकारिता विभाग के पीआरओ दिनेश शर्मा को शामिल किया गया है।
प्रथम दिवस: उद्घाटन सत्र
समीक्षा बैठक के पहले दिन 8 जनवरी 2026 को उद्घाटन सत्र में सर्वप्रथम ‘आत्मनिर्भर भारत के लिए वाहन के रूप में सहकारी समितियां’ विषय पर एक सत्र होगा, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉॅ. आशीष भूटानी और राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास करेंगे। इस सत्र में सहकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव एक अवलोकन पत्र प्रस्तुत करेंगे।
प्रथम दिवस: द्वितीय सत्र
द्वितीय सत्र में सहकारिता मंत्रालय की विभिन्न पहलों की प्रगति की समीक्षा होगी। इसमें मुख्य रूप से पैक्स कंप्यूटराइजेशन प्रोजेक्ट, कृषि एवं सहकारी भूमि विकास बैंकों का कंप्यूटरीकरण और सहकारिता रजिस्ट्रार (आरसीएस) कार्यालयों का कम्प्यूटरीकरण, एमपैक्स, एमडीसीएस, एमएफसीएस, विश्व की सबसे बड़ा अनाज भंडारण योजना, पैक्स से संबंधित अतिरिक्त सेवाएं (कॉमन सर्विस सेेंटर, पीएम किसान सेवा केंद्र, पीएम जन औषधि केंद्र आदि) की प्रगति की समीक्षा की जायेगी।
प्रथम दिवस: तृतीय सत्र
पहले दिन के तीसरे सत्र में सहकारी बैंकिंग, सहकार सारथी, सहकारी बीमा, आधार सीडिंग, नई शाखाएं खोलने, आधुनिक बैंकिंग, डोर स्टेप बैंकिंग, नाबार्ड अप्रोच नोट आदि पर चर्चा होगी। तदोपरांत तीन राष्ट्र स्तरीय सहकारी समितियों – एनसीईएल, एनसीओएल व बीबीएसएसएल, श्वेत क्रांति 2.0 की प्रगति की समीक्षा की जायेगी।
प्रथम दिवस : चतुर्थ सत्र
चतुर्थ सत्र में एनसीडी को मजबूत करने और मल्टीस्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी (एमएससीएस) सुधारों पर रणनीतिक संवाद होगा। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और बिहार के अधिकारी अपना अनुभव साझा करेंगे। इसी के साथ, एनसीडी के साथ एपीआई इंटीग्रेशन, जीवीए के लिए वार्षिक टर्नओवर, लाभ/हानि डेटा का अपडेशन, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, ओडिशा द्वारा एमएससीएस से संबंधित मुद्दे डिस्कस किये जायेंगे। एमएससीएस अधिनियम की धारा 103 के तहत डीम्ड पंजीकरण का मुद्दा, एमएससीएस के परिसमापन में तेजी लाना और परिसमापक/मध्यस्थों के पैनल को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी। साथ ही, राज्यों में चुनाव प्राधिकरण का गठन, जैम पोर्टल पर सहकारी समितियों का पंजीकरण व ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर विचार-विमर्श होगा।
प्रथम दिवस : पंचम सत्र
पंचम सत्र में सहकारी बैंकों के व्यवसाय विविधीकरण पर मंथन होगा। इसमें मुख्य रूप से सहकारी बैंकों (स्टेट कोऑपरेटिव बैंक, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक एवं शहरी सहकारी बैंक) का व्यावसायिक विविधीकरण, क्रेडिट पोर्टफोलियो को कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्र में संतुलित करना, आरसीबी में घटते ग्राउंड लेवल क्रेडिट के रुझान को उलटने के उपाय, सहकार सारथी और नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फायनेंस एंड डवल्पमेंट कोर्पोरेशन (एनयूसीएफडीसी) के माध्यम से आधुनिक तकनीक लाने पर विचार विमर्श होगा। इसके बाद, गुजरात, बिहार, कर्नाटक, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और राज्य सहकारी बैंकों पर नाबार्ड की प्रस्तुति होगी। इसी सत्र में सहकारी बैंकों से नियामक और पर्यवेक्षी अपेक्षाएं, सहकारी बैंकों के सामने नियामक और पर्यवेक्षी चुनौतियां, सहकारी बैंकों द्वारा प्रमुख/बार-बार डिफ़ॉल्ट, अनुपालन सुनिश्चित करने के तरीके पर संवाद होगा।
प्रथम दिवस: षष्टम सत्र
षष्टम सत्र में भविष्य के लिए तैयार सहकारी समितियाँ : नेतृत्व और शासन की भूमिका विषय के अलावा, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण पहल, सहकारी सुधार एजेंडा और महिलाओं, युवाओं और हाशिए पर पड़े समुदायों पर विशेष जोर देते हुए भविष्य की संभावनाएँ विषय पर विचार विमर्श होगा।
प्रथम दिवस : सप्तम सत्र
पहले दिन के सातवें एवं अंतिम सत्र का एजेंडा होगा – समूहों के बीच सहयोग। एक घंटे के इस सत्र में स्वयं सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन को पैक्स के एकीकृत करने पर चर्चा होगी। साथ ही, माइक्रो एटीएम व रुपे केसीसी के वितरण और सदस्यता अभियान के लिए राज्य द्वारा की गई पहलों की समीक्षा की जायेगी। इस सत्र में सहकारी समितियों को बढ़ावा देने के लिए एनसीडीसी की योजनाएं और राज्यों से अपेक्षाएं पर चर्चा होगी। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, असम और उत्तर प्रदेश, राज्यों की स्थिति पर सहकारिता मंत्रालय के अधिकारी प्रस्तुति देंगे।
द्वितीय दिवस : प्रथम सत्र
दूसरे दिन का पहला सत्र सहकार से समृद्धि पर आधारित होगा, जिसमें राजस्थान, आंध्रप्रदेश, उत्तरप्रदेश और कर्नाटक में पैक्स को पुन: सक्रिय करने में सहकारी बैंकों की भूमिका पर चर्चा होगी। झारखंड, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु में कैशलेस पैक्स, एमआईएस मुद्दे पर विचार विमर्श होगा। उत्तराखंड, आंध्रप्रदेश और तेलगांना के संदर्भ में सहकारिताओं के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम पर मंथन होगा। जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के संदर्भ में जिला विशिष्ट व्यवसाय योजनाओं पर चर्चा होगी। मॉडल सहकारी गांव पर नाबार्ड स्तर पर चर्चा की जायेगी। उत्तरप्रदेश, राजस्थान और बिहार के संदर्भ में सदस्यता अभियान पर चर्चा होगी। भारतीय खाद्य निगम, पंजाब, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडि़शा, झारखंड और महाराष्ट्र के संदर्भ में आधुनिक भंडारण और आपूर्ति शृंखला एकीकरण पर मंथन होगा।
द्वितीय दिवस : द्वितीय सत्र
दूसरे दिन के दूसरे सत्र में उत्तरपूर्व राज्यों में सेशन उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में सहकारी समितियों का विकास पर व्यापक चर्चा होगी। इसमें उत्तर पूर्वी राज्यों में पैक्स को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए अनुभव, चुनौतियाँ, सर्वोत्तम तरीके और आगे की राह विषय पर फोकस रहेगा। सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर राज्यों की ओर से प्रस्तुतिकरण होगा। साथ ही, नॉर्थ-ईस्टर्न डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड पर मंथन होगा।
द्वितीय दिवस : तृतीय सत्र
दूसरे दिन के तीसरे सत्र में सफल सहकारी समितियों के साथ सहकार संवाद होगा। फिर, तेलंगाना, तमिलनाडु, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, गुजरात और पश्चिम बंगाल के संदीर्भ में टेक-सक्षम मत्स्य पालन और डेयरी विषय पर चर्चा होगी। इसके उपरांत, सफलता की कहानियां और नवाचार, समस्या-समाधान के सर्वोत्तम तरीकों और राज्य-वार सिफारिशों व आगे की राह पर विचार विमर्श होगा।
द्वितीय दिवस : चतुर्थ सत्र
दूसरे दिन का चतुर्थ सत्र में मुख्य रूप से मीडिया, सोशन मीडिया और आईवाईसी 2025 के राष्ट्रीय कार्यक्रमों, वैश्विक सम्पर्कों और सार्वजनिक अभियानों के माध्यम से सहकारी नवाचार का प्रदर्शन पर फोकस रहेगा।
समापन सत्र
इस दो दिवसीय समीक्षा बैठक के अंतिम सत्र में सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष भूटानी की टिप्पणी होगी। मंत्रालय के संयुक्त शासन सचिव धन्यवाद ज्ञापित करेंगे।
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