सहकारिता मंत्री और सहकारी विभाग के कोरे आश्वासनों से पैक्स कर्मचारियों के सब्र का बांध टूटा, बजट सत्र के बाद बड़े आंदोलन की चेतावनी
– केंद्रीय सहकारी बैंकों में जमा मिनी बैंकों की धनराशि की एकमुश्त वापसी और सरकार को हिस्सा राशि लौटाने पर विचार
– फसली ऋण वितरण और पैक्स कम्प्यूटराजेशन परियोजना बंद करने की चेतावनी
जयपुर, 5 फरवरी (मुखपत्र)। भाजपा राज में दो साल से पूरी तरह उपेक्षित और हाशिये पर पड़े ग्राम सेवा सहकारी समिति (PACS) कर्मचारियों ने राज्य सरकार के उपेक्षित रवैये से आहत होकर आरपार की लड़ाई का मानस बना लिया है। राज्य में जिला केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड (DCCB) को सहकारिता का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता है, लेकिन दो साल से भजनलाल शर्मा सरकार की नीतियों ने जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) को प्रशासनिक कुप्रबंधन और वित्तीय कुप्रबंधन से खोखला कर दिया है और सहकारिता के चमकदार चेहरे को कुरूप बना दिया है, उससे, इन बैंकों से जुड़ी ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारियों में असुरक्षा का भाव उत्पन्न हो गया है।
पैक्स कार्मिकों ने सीधे शब्दों में सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों व वर्षों पुरानी समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ, तो वे सरकार और सहकारिता विभाग के साथ वित्त का संबंध पूरी तरह से तोड़ लेंगे। इस संबंध में राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतमकुमार दक और सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव को एक बार पुन: ज्ञापन प्रेषित कर, विभाग एवं मंत्री स्तर से हो रही उपेक्षा की पीड़ा को उजागर किया है।

मांगों पर सहमति के बावजूद ठोस कार्यवाही नहीं की
ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारियों की लंबित मांगों के त्वरित निस्तारण एवं आगामी आंदोलन की चेतावनी शीर्षक के साथ दिये गये इस ज्ञापन में सहकारिता मंत्री गौतमकुमार दक व शासन सचिव का ध्यान प्रदेश की ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारियों की विगत कई माह से लंबित मांगों की ओर आकर्षित किया गया है।
ज्ञापन में बताया गया कि संघर्ष समिति द्वारा पूर्व में अपनी 4 मुख्य मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार किया गया था। कार्य बहिष्कार समाप्त कराने के लिए विभाग द्वारा गठित कमेटी और संघर्ष समिति के मध्य तीन दौर की सकारात्मक वार्ता में चारों बिंदुओं पर सहमति बनी थी, लेकिन खेद का विषय है कि आज दिनांक तक विभाग द्वारा किसी भी बिंदु पर कोई ठोस धरातलीय कार्यवाही नहीं की गई है, केवल कागजी औपचारिकताओं तक मामला सीमित है। अब विभाग द्वारा बजट एवं अनुदान मांगों के पारित होने तक कॉमन कैडर या कैडर अथॉरिटी के गठन का आश्वासन दिया गया है।
संघर्ष समिति की ओर से ज्ञापन में स्पष्ट शब्दों में चेताया गया है कि यदि 11 फरवरी 2026 तक सरकार एवं विभाग स्तर से इस दिशा में कोई निर्णायक कार्यवाही नहीं होती है, तो संघर्ष समिति अपने आंदोलन के तहत कठोर वित्तीय कदम उठाने के लिए विवश होगी।
वित्तीय चोट करने की तैयारी
ज्ञापन में संघर्ष समिति के चरणबद्ध आंदोलन को रेखांकित करते हुए बताया गया कि सरकार व विभाग द्वारा संघर्ष समिति की मांगों पर ठोस कार्यवाही नहीं होने की सूरत में ग्राम सेवा सहकारी समितियों में संचालित मिनी बैंकों के माध्यम से जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में जमा समस्त सावधि जमा (एफडी) और आवर्ती जमा (आरडी) की पूर्ण राशि की निकासी की जाएगी। वैद्यनाथन पैकेज की सिफारिशों के अनुरूप, स्वायतशासी निकाय के तौर पर समितियों के हित की रक्षार्थ बैंकों में जमा शेयर कैपिटल/हिस्सा राशि को वापस निकाला जाएगा। ग्रामसेवा सहकारी समितियों से राज्य सरकार का हिस्सा लौटाया जायेगा और केंद्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से संचालित अल्पकालीन फसली ऋण वितरण प्रणाली को पूर्णत: बंद कर दिया जायेगा। इसके अलावा, मांगे पूरी होने तक, केंद्र सरकार की पैक्स कम्प्यूटराइजेशन योजना को बंद रखा जायेगा।
बजट सत्र के बाद आंदोलन
ज्ञापन में सहकारिता मंत्री व शासन सचिव से अनुरोध किया गया है कि सरकार एवं पैक्स कार्मिकों के टकराव को टालने का एक मात्र विकल्प यही है कि कर्मचारियों हितों की रक्षार्थ, संघर्ष समिति की मांगों का अविलम्ब समाधान किया जाये, अन्यथा स्थिति में राज्य सरकार के बजट सत्र के पश्चात पैक्स कार्मिक आंदोलन के लिए तत्पर हैं।
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