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आरबीआई ने अब इस सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द किया

नई दिल्ली, 13 फरवरी। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (BR Act) की धारा 56 के साथ पठित धारा 22 के अंतर्गत 11 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा इंडियन मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, लखनऊ का लाइसेंस रद्द कर दिया है। इस आदेश के कारण, 13 फरवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति से बैंकिंग कारोबार रोक दिया गया है।

आरबीआई ने बैंक द्वारा किसी प्रकार की जमाएं स्वीकार करने और राशि के भुगतान पर रोक लगा दी है। साथ ही, सहकारी समितियां के आयुक्त और रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश से भी अनुरोध किया कि वे बैंक का समापन करने और बैंक के लिए एक परिसमापक नियुक्त करने का आदेश जारी करें।

इन कारणों से बैंक का लाइसेंस रद्द किया

बैंक के पास पर्याप्त पूंजी और आय की संभावनाएं नहीं हैं। इस प्रकार, यह बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 22(3)(डी) के प्रावधानों का अनुपालन नहीं करता है। बैंक, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धाराओं 22(3)(बी), 22(3)(सी), 22(3)(डी) और 22(3)(ई) की अपेक्षाओं के अनुपालन में विफल रहा है। बैंक का बने रहना उसके जमाकर्ताओं के हितों के प्रतिकूल है। यदि बैंक को अपने बैंकिंग कारोबार को जारी रखने की अनुमति दी जाती है तो जनहित प्रतिकूल रूप से प्रभावित होगा।

5 लाख रुपये तक की जमाराशि सुरक्षित

आरबीआई के अनुसार, परिसमापन के उपरांत, प्रत्येक जमाकर्ता, डीआईसीजीसी अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अंतर्गत, निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) से 5 लाख रुपये तक की राशि मौद्रिक सीमा तक अपने जमाराशि के संबंध में जमा बीमा दावा राशि प्राप्त करने का हकदार होगा। बैंक द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, लगभग 98.75 प्रतिशत जमाकर्ता डीआईसीजीसी से उनकी पूरी जमाराशि प्राप्त करने के हकदार हैं।

31 दिसंबर 2025 तक, डीआईसीजीसी ने बैंक के संबंधित जमाकर्ताओं से प्राप्त सहमति के आधार पर डीआईसीजीसी अधिनियम, 1961 की धारा 18ए के प्रावधानों के अंतर्गत कुल बीमाकृत जमाराशि में से 2.90 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही कर दिया है।

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