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भजनलाल सरकार ने जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के लिये “ख्याली पुलाव” पकाये, कहा- इसी से सेहत बनाओ

डीसीसीबी के पीडी खाते में 200 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर, लेकिन इस राशि के आहरण पर ही सरकारी रोक

जयपुर, 13 फरवरी (मुखपत्र)। राजस्थान की भजनलाल सरकार, प्रदेश के अल्पकालीन सहकारी साख ढांचे को धराशाही करने पर उतर आयी है। सरकार की वादाखिलाफी के कारण, ऋण माफी के ब्याज की बकाया राशि समय पर नहीं मिलने के कारण, प्रदेश के 11 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड (डीसीसीबी) घाटे में आ चुके हैं। अब सरकार ने ऋण माफी ब्याज पेटे डीसीसीबी को धनराशि का चुकारा करने के बजाय पीडी एकाउंट-पीडी एकाउंट का खेल खेलना शुरू कर दिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि, सहकारिता मंत्रालय और सहकारी विभाग के स्तर से, केंद्रीय सहकारी बैंकों के पक्ष में ठोस पैरवी नहीं होने के कारण, भजनलाल सरकार पूरी तरह से ख्याली पुलाव पकाने के मूढ़ में आ गयी है। इन्हीं ख्याली पुलावों से बैंकों को वित्तीय सेहतमंद बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

ताजा घटनाक्रम इसका जीवंत प्रमाण है। राज्य सरकार के आदेश पर राजस्थान राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड (अपेक्स बैंक), जयपुर ने 12 फरवरी 2026 को लगभग 200 करोड़ रुपये की राशि प्रदेश के 29 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के पीडी एकाउंट में ट्रांसफर कर दी। यह राशि 10 माह से अपेक्स बैंक के पीडी एकाउंट में रखी थी, जिसे सरकार ने 31 मार्च 2025 को ट्रांसफर किया था। पीडी एकाउंट की राशि दरअसल ख्याली पुलाव ही है, जिसे वास्तविक रूप से परोसा नहीं जा सकता यानी इस राशि का उपयोग नहीं किया जा सकता।

डीसीसीबी के पीडी खातों में ट्रांसफर राशि


आभासी राशि को खातों में दर्ज करने का निर्देश

सरकार का निर्देश है कि इस राशि को बैंक अपनी बलेंस शीट में दर्ज कर, सीआरएआर के स्तर को मेंटेन रखें, लेकिन यह ऐसी आभासी राशि है, जिसे नाबार्ड की पोालिसी के अनुसार बैंक अपनी बेलेंस शीट में दर्ज नहीं कर सकते, क्योंकि यह वास्तविक रूप में प्राप्त राशि नहीं है। यदि ऐसा संभव हो सकता, तो अपेक्स बैंक की बैलेंस शीट में इस राशि की प्रविष्टि दर्ज होती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

सरकार के समक्ष ठोस पैरवी का अभाव

दरअसल, प्रदेश के 29 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों द्वारा राजस्थान सरकार से ऋण माफी पेटे 8 प्रतिशत ब्याज राशि के 765.57 करोड़ रुपये लेने हैं, जो कि जून, 2019 से बकाया हैं। सरकार इस राशि पर सहकारी बैंकों को ब्याज भी नहीं दे रही। पिछले दो साल से, भजनलाल सरकार के अस्तित्व में आने के बाद से सहकारिता मंत्रालय, अथवा सहकारिता विभाग के स्तर पर इस राशि को प्राप्त करने के लिए ठोस पैरवी नहीं हो रही। विभागीय मंत्री को अपनी कुर्सी इतनी असुरक्षित लग रही है कि वे मुख्यमंत्री के समक्ष सहकारिता विभाग की बात ही नहीं रख पाते। यही कारण है कि वे अब तक सहकारी बैंकों को न ऋणमाफी ब्याज की राशि दिला पाये हैं, न ही समय पर फसली ऋण वितरण/वसूली का राज्य सरकार के हिस्से का अनुदान। इन्हीं दोनों मदों में केंद्रीय सहकारी बैंकों का राज्य सरकार की ओर 1401 करोड़ रुपये बकाया हैं।

5 डीसीसीबी का सीआरएआर गड़बड़ाया

इसके परिणामस्वरूप फसली ऋण वितरण हेतु बैंकों में वित्तीय तरलता की कमी के कारण अल्पकालीन साख संरचना प्रभावित हो रही है। इससे, विशेषकर पैक्स, डीसीसीबी की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। 31 मार्च 2025 की स्थिति अनुसार 5 केन्द्रीय सहकारी बैंकों का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीआरएआर) भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वांछित स्तर 9 प्रतिशत से कम हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप जैसलमेर, पाली, नागौर, भरतपुर एवं अलवर सीसीबी को नाबार्ड से कृषि ऋण पुनर्वित्त नहीं मिल पा रहा। हाल ही में सरकार ने इन बैंकों के पीडी खाते में 82 करोड़ 85 लाख रुपये की आभासी राशि ट्रांसफर की है, जिसका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभ बैंकों को नहीं मिलने वाला।

पीडी एकाउंट से आहरण पर प्रतिबंध

अब सरकार चाहती है कि ऋण माफी ब्याज के पार्ट क्लेम के रूप में लगभग 200 करोड़ की जो राशि, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में नये खोले गये पीडी खातों में ट्रांसफर की गयी है, 15 फरवरी का सीआरएआर उसी हिसाब से कैलकुलेट किया जाये। हालांकि, सरकार ने पीडी खाते से राशि के आहरण पर प्रतिबंध लगा रखा है।

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