राज्यसहकारिता

सहकारी सोसाइटी कर्मचारियों के सभी संगठनों को एक मंच पर लाने का प्रयास, 24 को जयपुर में होगी साझा बैठक

जयपुर, 22 जुलाई (मुखपत्र)। राजस्थान के सहकारी सोसाइटी कर्मचारियों को एक जाजम पर लाने एवं संगठित करने के प्रयास फिर से आरम्भ हो गये हैं। प्रदेश की प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) और वृहदाकार बहुद्देश्यीय प्राथमिक समितियों (लैम्पस) के जिलाध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारी 24 जुलाई को किसान भवन, जयपुर में जुटने होने जा रहे हैं। संगठन में एकजुटता के लिए प्रयासरत सोसाइटी कार्मिकों की ओर से राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ, सहकारी साख समितियां एम्प्लाइज यूनियन, राष्ट्रीय सहकारी पेक्स कर्मचारी संघ भारत, टीएसपी संघर्ष समिति और ग्राम सेवा सहकारी समितियां कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसका उद्देश्य हाल के वर्षों में खंडित हो चुकी एकता और संगठन को अखंडता के एकसूत्र में पिरोना और फिर अपनी मांगों को मनमाने के लिए मजबूती के साथ सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखना है।

पिछले कुछ अर्से से ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारी विषम आर्थिक परिस्थितियों से जूूझ रहे हैं। राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ में एक के बाद एक, दो टूट से संगठन बिखर गया है और एकता के अभाव में कर्मचारियों की आवाज दब गयी है। सरकार की ओर से सोसाइटी कर्मचारियों को कोई तवज्जो नहीं मिल रही। सहकारी अफसर भी सोसाइटी कर्मचारियों की मांग को प्राय:-प्राय: अनसुना करते आ रहे हैं। साल 2019 में कुछ शीर्ष नेताओं की ढिलाई के कारण, पैक्स कर्मचारियों की कॉमन कैडर के गठन की सबसे बड़ी मांग पूरी होते-होते रह गयी और अब हालत ये है कि सोसाइटी कार्मिकों को, ब्याजमुक्त अल्पकालीन फसली ऋण वितरण की एवज में मिलने वाला ब्याज अनुदान समय पर नहीं मिलने से प्रदेश के कई जिलों में कर्मचारियों को दो साल से वेतन नहीं मिल रहा। साल 2017 से पैक्स में, सोसाइटी स्तर पर भर्ती पर रोक लगी हुई है जबकि इन सालों के सैकड़ों कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गये और पिछले चार साल में एक हजार से अधिक नयी प्राइमरी सोसाइटियों का गठन कर दिया गया। ऐसे में लगभग चार हजार पैक्स/लैम्पस मेें स्थायी मुख्य कार्यकारी नहीं है और इन पैक्स को अतिरिक्त चार्ज में चलाया जा रहा है। कुछ सप्ताह पहले टीएसपी संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेश के पैक्स कर्मचारी गोगुंदा (उदयपुर) में जुटे थे, लेकिन बहुत कम जिलों का प्रतिनिधित्व होने के कारण, एकता के प्रयास सफल नहीं हो पाये। अब नये सिरे से एकजुट करने के प्रयास के तहत 24 जुलाई को जयपुर में बैठक बुलाई जा रही है।

सोसाइटी कर्मचारियों के सोशल मीडिया ग्रुपों पर प्रस्तावित बैठक का संदेश प्रसारित होने के बाद से 22 जुलाई की देर शाम तक श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, सिरोही, भीलवाड़ा, डूंगरपुर, दौसा, बीकोनर, बूंदी, करौली, उदयपुर, सैलूम्बर जिलों की ओर से 24 जुलाई की बैठक में शामिल होने की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।

राष्ट्रीय सहकारी पेक्स कर्मचारी संघ भारत के राष्ट्रीय महासचिव नितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, व्यवस्थापकीय सेवा नियम-2022 में सोसाइटी कर्मचारियों के लिए केंद्रीय सहकारी बैंकों में बैंकिंग सहायक की स्वीकृत स्टाफ स्ट्रेंथ में 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था, जो अब सेवा नियम में संशोधन करके समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे कतई सहन नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ब्याजमुक्त फसली ऋण वितरण पेटे मिलने वाला 2 प्रतिशत ब्याज अनुदान नहीं मिलने के कारण, दो साल से वेतन नहीं मिल रहा, जिससे कर्मचारियों के लिए जीवन यापन करना बहुत मुश्किल हो गया है। अब हालात बेहद विकट हो गये हैं, यदि अब भी एकजुट नहीं हुये तो राज्य सरकार व सहकारिता विभाग कभी हमारी सुध नहीं लेगा।

 

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