जयपुर, 16 जनवरी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से सोमवार को बड़ी कार्यवाही करते हुए अजमेर से एसओजी की एडिशनल एसपी दिव्या मित्तल को दो करोड़ रुपये की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार कर लिया। एसीबी ने आज सक्षम ऑथिरिटी से सर्च वारंट लेकर मित्तल के पांच ठिकानों पर सर्च की, जहां से कुछ कागजात कब्जे में लिये गये। दिव्या मित्तल को पूछताछ के लिए अजमेर से एसीबी मुख्यालय जयपुर लाया गया, जहां से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले मे दलाल की भूमिका निभाने वाला पुलिस का बर्खास्त सिपाही है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
एसीबी के एडीजी दिनेश एमएन के अनुसार, दिव्या मित्तल द्वारा दो करोड़ रुपये की मांग करने की शिकायत होने पर, पुष्टि के बाद, मित्तल के विरूद्ध प्रकरण दर्ज करके उप पुलिस अधीक्षक मांगीलाल को जांच सौंपी गयी। जांच अधिकारी ने इस मामले में और अधिक सुबूत एकत्र करने के लिए कोर्ट से वारंट लेकर पांच जगह सर्च की। दिव्या को हिरासत में लेकर पूछताछ की गयी, और संतुष्ट होने पर गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि इस मामले में जो दलाल सुमित कुमार की तलाश जारी है, पुलिस का बर्खास्त कांस्टेबल है।
परिवादी ने एसीबी को प्रस्तुत शिकायत कर बताया कि उससे दो करोड़ रुपये की मांग की गयी है। जब वह 3 जनवरी को अजमेर में एसओजी के ऑफिस पहुुंचा, तब एडिशनल एसपी दिव्या मित्तल ने ही उससे कहा था कि दलाल का फोन आयेगा। दलाल ने फोन करके उसे मित्तल के रिसार्ट और फार्म हाउस में बुलाकर धमकाया और दो करोड़ रुपये की मांग की। शिकायत के आधार पर एसीबी ने जब 12 जनवरी को शिकायत का सत्यापन करवाया तो उस दौरान परिवादी ने कहा कि वो एक करोड़ नहीं, केवल 10 लाख रुपये ही दे सकता हूं, इस पर दिव्य मित्तल से उससे कहा कि ऐसे नहीं चलता, ये कोई बनिए की दुकान नहीं है ,जो बात हुई है उतना देना होगा। ये सिर्फ मेरे तक का मामला नहीं, ये बहुत ऊपर तक का मामला है। दूसरी ओर, दिव्या ने मीडिया से कहा कि उन्होंने कोई रिश्वत नहीं ली है। ये सब ड्रग माफिया का रैकेट है, ताकि उनकी फाइल मेरे यहां से हट जाये।
पहली किश्त में मांगे एक करोड़ रुपये
रिश्वत की मोटी रकम चुकाने के लिए कुछ मांग कर, परिवादी जैसे ही दलाल के चंगुल से छूटा, तो सीधा जयपुर में एसीबी हैडक्वार्टर पहुंचा और शिकायत प्रस्तुत की। इस शिकायत पर एसीबी विशेष अनुसंधान इकाई, जयपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बजरंग सिंह शेखावत के निर्देशन में द्वारा शिकायत का सत्यापन किया गया। सत्यापन के दौरान दिव्या मित्तल और उसके दलाल सुमित कुमार द्वारा परिवादी से 2 करोड़ रुपये रिश्वत की मांग करने की पुष्टि हुई। सत्यापन की वार्ता में आरोपियों द्वारा परिवादी के बार बार गिड़गिड़ाने पर पहले 1 करोड़ रुपये, फिर 50 लाख रुपये की मांग पर सहमति जाहिर की। आरोपी रिश्वत के रूप में 25 लाख रुपये अभी लेने और 25 लाख रुपये परिवादी की बहन की शादी के बाद लेने पर राजी हुये। इस दौरान एसीबी कार्रवाई की भनक लगने के कारण आरोपियों द्वारा रिश्वत राशि नहीं ली गई, जिसके बाद एसीबी द्वारा मामले में मुकदमा दर्ज किया गया और कोर्ट से वारंट लेकर आगे की कार्यवाही का अंजाम दिया गया।